झरिया, सुमित राज अरोड़ा: यह कोई बगीचा नहीं है जनाब! पर बगीचे जैसा देखने वाला यह झरिया का प्रसिद्ध राजा तालाब है। जो जलकुंभियों के फूल से पूरा तालाब बगीचा बन गया है। एक समय ऐसा था कि लोग इस तालाब के पानी का प्रयोग पीने के लिए किया करते थे।

आज यह तालाब  जलकुंभियों का आशियाना बनकर रह गया है। दुर्भाग्य यह है कि सौंदर्यीकरण को लेकर आज तक उक्त तालाब पर लगभग एक करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं। स्थिति आज भी जस की तस बनी हुई है। जहां एक समय हंसों का जोरा अठखेलियां खेला करती थी आज उसी तालाब में भैंसे नहाने से भी कतरा रहे ऐसा है।

तालाब की चौड़ाई और लंबाई दिनोंदिन अतिक्रमण होता जा रहा है। ऐसा ही चलता रहा  तो झरिया का ऐतिहासिक राजा तालाब लुुप्त होने से कोई नहींं बचा सकता है। चुनावी दौर आते ही राजा तालाब चुनावी मुद्दा बंद कर रह जाता है। वादे तो बहुत होते है पर उन वादों को पूरा करने में जनप्रतिनिधि असमर्थ बन जाते है। वही अतिक्रमणकारियों के घरों का गंदा पानी उक्त तालाब पर ही बहा दिया जाता है। जिससे तालाब का पानी दूषित हो गया है। 

जर्जर हो चले घाट

तालाब के घाट कई बार बनाए गए थे। पत्थरों से तैयार यह घाट अब जर्जर हो चले हैं। घाटों के पत्थर टूटते जा रहे है। इनकी मरम्मत का कार्य के लिए लाखों रुपए खर्च हो चुके हैं पर इसकी मरम्मत नहीं हुई है। तालाब के घाटों को नया रुप देने के लिए स्थानीय लोगों द्वारा वर्षों से मांग की जा रही है, जनप्रतिनिधियों द्वारा आश्वासन के अलावा लोगों को कुछ नहीं मिला है।