जागरण संवाददाता, धनबाद: धनबाद में कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआइसी) के तहत सूचीबद्ध लाभुकों की चिकित्‍सा सुविधा का हाल बुरा है। जिले में योजना से जुड़े हजारों लाभुकों को इलाज के लिए भटकना पड़ रहा है। दरअसल ईएसआइ से संबद्ध अधिकांश अस्पताल बोकारो अथवा दूसरे जिलों में है, इस वजह से धनबाद के कर्मचारियों के बीमार पड़ने पर उन्‍हें कैशलेस इलाज के लिए सबसे करीबी जिला बोकारो या फिर दूसरे जिलों में रेफर किया जा रहा है। बताया जाता है कि ईएसआइसी से धनबाद में लगभग 25000 कर्मचारी जुड़े हैं। ऐसे में सबसे ज्यादा परेशानी वैसे मरीजों को उठानी रही है, जो मामूली सर्दी-खांसी के इलाज के लिए भी बाहर रेफर किए जा रहे हैं।

धनबाद में  मैनेजर बदले, पर नहीं बदल रही व्यवस्था

धनबाद में पदस्‍थापित कर्मचारी राज्‍य बीमा निगम के मैनेजर गयासुद्दीन हुसैन का तबादला किया जा चुका है। उन्‍हें धनबाद से हजारीबाग भेजा गया है। वहीं धनबाद में नया मैनेजर सौमित्र नाथ को बनाया गया है, लेकिन इसके बावजूद व्यवस्था में कोई खास परिवर्तन नहीं हुआ है।

गौरतलब है कि महीने में 21 हजार रुपये से कम वेतन पाने वाले कर्मचारियों के वेतन से हर महीने तीन से चार सौ रुपये स्‍वास्‍थ्‍य बीमा के तौर पर काटे जा रहे हैं, लेकिन इन मरीजों का धनबाद में इलाज के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। जिले में जिन निजी अस्पतालों को सूचीबद्ध किया गया है, उनमें सामान्य बीमारी का भी इलाज नहीं हो रहा है। कुछ लाभुकों ने इसकी शिकायत राज्य मुख्यालय तक से की है।

घोषणा के बावजूद नहीं खुला मैथन का ईएसआइ अस्पताल

मालूम हो कि राज्य कर्मचारी बीमा निगम ने मैथन में बंद पड़े अस्पताल को पूर्ण रूप से खोलने का आश्वासन दिया था, लेकिन आज तक यह घोषणा पूरी नहीं हो सकी है। वहीं पूर्व में मैथन में संचालित ईएसआइ का एक सौ बेड का अस्पताल पिछले 8 वर्षों से बंद पड़ा है। रखरखाव के अभाव में अस्पताल हर दिन खंडहर में तब्दील होता जा रहा है। गौरतलब है कि कभी गुलजार रहने वाले इस अस्पताल की गिनती राज्य में बड़े अस्पतालों के तौर पर होती थी। निरसा और इसके आसपास काफी संख्या में विभिन्न प्रकार की फैक्ट्रियां थी। यहां काम करने वाले कर्मचारियों को देखते हुए अस्पताल खोला गया था, लेकिन अब इस पर से विभाग और सरकार का ध्यान हट गया है। इस वजह से अपना अस्पताल होते हुए भी निजी अस्पतालों से काॅरपोरेशन को करार करना पड़ रहा है। वहीं ईएसआइसी कॉलोनी में बाहरी व्यक्तियों का अतिक्रमण हो गया है, सो अलग।

Edited By: Deepak Kumar Pandey