बिना इंटरनेट और सिर्फ 871 KB में चलेगा कैलकुलेटर, दुकानदारों के लिए बिलिंग और GST का हिसाब हुआ आसान
धनबाद की गारा इंडस्ट्रीज ने कारोबारियों के लिए 'राजगढ़ जीएसटी कैलकुलेटर' ऐप बनाया है, जो जीएसटी के हिसाब-किताब को आसान बनाएगा।

एआई द्वारा जेनरेट इमेज।
HighLights
धनबाद की गारा इंडस्ट्रीज ने 'राजगढ़ जीएसटी कैलकुलेटर' ऐप बनाया।
वन-टैप जीएसटी, एडिटेबल रेट्स और ऑफलाइन कार्यक्षमता प्रमुख विशेषताएं हैं।
यह ऐप छोटे-बड़े कारोबारियों के लिए जीएसटी हिसाब-किताब आसान करेगा।
रवि चौरसिया, धनबाद। कोयलांचल के छोटे-बड़े व्यवसायियों को अब जीएसटी के हिसाब में उलझना नहीं पड़ेगा बल्कि वे अब एक क्लिक में जीएसटी का हिसाब कर सकेंगे।
क्योंकि धनबाद की गारा इंडस्ट्रीज कंपनी ने अब धनबाद सहित देशभर के कारोबारियों ध्यान में रखकर 'राजगढ़ जीएसटी कैलकुलेटर' नामक एप बनाया है।
इस मोबाइल एप्लिकेशन को बहुत जल्द धनबाद में आधिकारिक रूप से लॉन्च किया जाएगा। कंपनी का दावा है कि 'राजगढ़ जीएसटी कैलकुलेटर' की सबसे बड़ी खासियत इसका 'वन टैप जीएसटी' फीचर है जिसके माध्यम से कारोबारी 5 प्रतिशत, 18 प्रतिशत और 40 प्रतिशत जैसी विभिन्न दरों पर सीजीएसटी और एसजीएसटी का सटीक विभाजन केवल एक क्लिक में देख सकेंगे।
इसके अतिरिक्त एप में अपनी जरूरत के हिसाब से जीएसटी स्लैब सेट करने के लिए 'एडिटेबल जीएसटी रेट्स' की सुविधा भी दी गई है। वहीं हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में अंकों को शब्दों में बदलने के लिए ''''नंबर टू वर्ड'''' विकल्प भी जोड़ा गया है।
कंपनी के पार्टनर तथा जीटा के महासचिव राजीव शर्मा ने बताया कि इस ऐप में व्यापारियों को बिलिंग के दौरान गलतियों से बचाने के लिए इसमें 'चेक एंड करेक्ट टेप' की सुविधा शामिल की गई है, जिससे हर एंट्री की समीक्षा कर सुधार किया जा सकता है।
साथ ही, मार्जिन और बिक्री मूल्य तय करने के लिए 'एमयू/मार्जिन की', मासिक किस्त के हिसाब के लिए ईएमआई व लोन कैलकुलेटर और विभिन्न मापों के लिए यूनिट कनवर्टर की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है।
उन्होंने बताया कि दैनिक कारोबार में छोटे दुकानदारों को जीएसटी के हिसाब-किताब में होने वाली उलझन को देखकर इस एप का विचार आया।
पारंपरिक कैलकुलेटर से समय अधिक लगने और बिलिंग में गलती की संभावना अधिक होती है, व्यापारियों की इस व्यावहारिक समस्या का समाधान करने और हिसाब-किताब को पूरी तरह आसान व डिजिटल बनाने के लिए इस विशेष एप को तैयार करने की जरूरत पड़ी।
उन्हाेंने बताया कि गूगल प्ले स्टोर पर मात्र 871 केबी की बेहद हल्की साइज में उपलब्ध यह ऐप आफलाइन भी कार्य करता है। डेवलपर्स के अनुसार, यह ऐप पूरी तरह से सुरक्षित है और उपयोगकर्ताओं का कोई भी निजी डेटा एकत्र या किसी तीसरे पक्ष (थर्ड पार्टी) के साथ साझा नहीं करता है।
एप का लाभ उठाने के लिए 30 दिनों का मुफ्त ट्रायल दिया जा रहा है। धनबाद की यह तकनीकी पहल स्थानीय कारोबारियों के हिसाब-किताब को आधुनिक और सुलभ बनाने में कारगर साबित होगी।
पुराना बाजार के थोक कारोबारी बिजय कुमार साव ने बताया कि यह एप छोटे और मझोले कारोबारियों के लिए बेहद उपयोगी है।
व्यस्त समय में सीजीएसटी-एसजीएसटी का सटीक विभाजन और कैश मिलान करने में यह एप काफी समय बचाता है। बिना इंटरनेट के चलने वाला यह हल्का एप हर व्यवसाई के लिए एक बेहतरीन डिजिटल साथी साबित होगा।
एप को गूगल प्ले स्टोर पर अपलोड करने की प्रक्रिया
मोबाइल एप को प्ले स्टोर पर लाइव करने के लिए गूगल प्ले कंसोल पर डेवलपर अकाउंट बनाना पड़ता है। इसके बाद एप की एएबी फाइल तैयार की जाती है।
स्टोर लिस्टिंग में एप का लोगो, स्क्रीनशाट, विवरण और गोपनीयता नीति अपलोड करनी होती है। सभी नियम पूरे करने के बाद एप को परीक्षण के लिए सबमिट किया जाता है और अनुमति मिलते ही यह प्ले स्टोर पर डाउनलोड के लिए लाइव हो जाता है।
मोबाइल एप्लिकेशन का वेरिफिकेशन कौन और कैसे करता है?
मोबाइल एप्लीकेशन का वेरिफिकेशन गूगल की स्वचालित सुरक्षा प्रणालियों और विशेषज्ञ समीक्षा टीम द्वारा किया जाता है। एप अपलोड होते ही एआई एल्गोरिदम और गूगल प्ले प्रोटेक्ट कोड की गहन जांच करते हैं ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि ऐप मैलवेयर या सुरक्षा खतरों से मुक्त है।
इसके अलावा एप द्वारा मांगे जाने वाले डेटा एक्सेस और परमीशंस की प्रामाणिकता की भी बारीकी से जांच की जाती है।
यह भी पढ़ें- Karwa Chauth पर छुट्टी देने वाला झारखंड का इकलौता केंद्रीय विद्यालय बना धनबाद, महिला कर्मियों को मिली राहत
