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धनबाद में 60% बिजली दर वृद्धि पर जनसुनवाई में भारी विरोध, उपभोक्ताओं ने बताया कमरतोड़ फैसला

By Ravi Kumar Chourasia Edited By: Mritunjay Pathak
Published: Sat, 28 Feb 2026 08:38 AM (IST)

धनबाद में जेबीवीएनएल के 60% बिजली दर वृद्धि के प्रस्ताव का कड़ा विरोध हुआ। झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग की ...और पढ़ें

झारखंड में बिजली दर में वृद्धि का प्रस्ताव।

झारखंड में बिजली दर में वृद्धि का प्रस्ताव।

HighLights

  1. धनबाद में 60% बिजली दर वृद्धि का कड़ा विरोध।

  2. उपभोक्ताओं ने बिजली चोरी, भ्रष्टाचार पर उठाए सवाल।

  3. आयोग ने राजस्व घाटा सात साल में समायोजित करने का आश्वासन दिया।

जागरण संवाददाता, धनबाद। धनबाद की जनता के जेब पर करीब 60 प्रतिशत अतिरिक्त बिजली बिल का बोझ डालने की जेबीवीएनएल की कोशिशों को शुक्रवार को धनबाद में कड़े विरोध का सामना करना पड़ा। कोयला नगर स्थित सामुदायिक भवन में झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग द्वारा आयोजित जनसुनवाई में गहमागहमी का माहौल रहा। सैकड़ों की संख्या में पहुंचे आम उपभोक्ताओं और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने प्रस्तावित बिजली दरों को जनता की कमर तोड़ने वाला फैसला करार दिया।

सुनवाई के दौरान मंच पर आयोग के सदस्यों तथा जेबीवीएनएल एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अरविंद कुमार के समक्ष अपनी दलीलें रखते हुए उपभोक्ताओं ने साफ कहा कि घरेलू दरों को 6.85 रुपये से बढ़ाकर सीधे 10.30 रुपये प्रति यूनिट करना किसी भी लिहाज से तर्कसंगत नहीं है।

चैंबर से जुड़े केसी गोयल, विश्वजीत सरकार, शिवचरण शर्मा, विवेक लोढ़ा और दीपक कुमार गुप्ता ने एक स्वर में कहा कि यदि यह प्रस्ताव लागू हुआ तो जिले के छोटे और मंझोले उद्योग बंद होने की कगार पर पहुंच जाएंगे। उन्होंने सवाल उठाया कि जब विभाग निर्बाध बिजली देने में सक्षम नहीं है तो फिक्स्ड चार्ज और यूनिट रेट में इतना भारी उछाल क्यों किया जा रहा है

सुनवाई में सबसे तीखा हमला विभाग की आंतरिक खामियों पर हुआ। शिकायतकर्ता संतोष कुशवाहा ने आयोग के सामने दावा किया कि विभाग द्वारा दिखाया जा रहा 8,712 करोड़ का राजस्व घाटा असल में बिजली चोरी और विभागीय भ्रष्टाचार का नतीजा है।

उपभोक्ताओं ने आरोप लगाया कि लाइन लास और बिजली चोरी में विभाग के ही कुछ कर्मचारियों की संलिप्तता है जिसका आर्थिक दंड अब ईमानदार उपभोक्ताओं को देने पर मजबूर किया जा रहा है। वहीं विवाद बढ़ता देख आयोग के सदस्यों ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के आलोक में इस राजस्व घाटे को अगले सात वर्षों में धीरे-धीरे समायोजित करने पर विचार किया जा रहा है ताकि जनता पर अचानक बोझ न पड़े।

आयोग ने कहा कि अगले 6 महीनों के भीतर धनबाद में एक एक्सक्लूसिव उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम शुरू करने का लक्ष्य है, जिससे लोगों को हजारीबाग जाने की मजबूरी खत्म होगी। साथ ही योजना के तहत नंगे तारों को बदलने और स्मार्ट मीटर की शुरुआती तकनीकी समस्याओं को जल्द दूर करने का आश्वासन दिया गया। आयोग ने स्पष्ट किया कि यदि स्थानीय स्तर पर सुनवाई न हो, तो उपभोक्ता सीधे आयोग को ईमेल के जरिए शिकायत भेज सकते हैं।