जागरण संवाददाता, धनबाद। जज उत्तम आनंद हत्याकांड की तह तक पहुंचना सीबीआइ नई दिल्ली क्राइम ब्रांच के लिए बड़ी चुनाैती बन गई है। हाई कोर्ट रांची के आदेश पर मामले की जांच सीबीआइ कर रही है। सीबीआइ जांच के छह महीने होने को है। लेकिन सीबीआइ अब तक साजिश के तह तक नहीं पहुंच सकी है। इससे हाई कोर्ट रांची संतुष्ट नहीं है। प्रत्येक सप्ताह हाई कोर्ट सीबीआइ जांच की प्रगति की समीक्षा करता है। इस दाैरान हर सप्ताह सीबीआइ को फटकार लगती है। हाई कोर्ट द्वारा बार-बार जांच की प्रगति पर असंतोष जताने के बाद एक बार फिर से सीबीआइ ने घटनास्थल का रूख किया है। सीबीआइ की टीम ने बुधवार को धनबाद के रणधीर वर्मा चाैक पर साक्ष्य जुटाने के लिए काफी देर तक समय जाया किया। रणधी वर्मा चाैक पर ही 28 जुलाई, 2021 को एक आटो ने धनबाद के जज उत्तम आनंद को धक्का मार उड़ा किया था।

हाई कोर्ट ने खारिज की सीबीआइ की कहानी

सीबीआइ ने जज की माैत के लिए जो कहानी बताई है उससे हाई कोर्ट संतुष्ट नहीं है। सीबीआइ का कहना है कि मोबाइल छीनने के लिए आटो चालकों ने जज को धक्का मारा था। सीबीआइ ने यह रिपोर्ट नारको जांच के बाद तैयार की है। 22 जनवरी को हाइकोर्ट ने आरोपियों की नारको जांच की रिपोर्ट देख कर सीबीआइ की नयी कहानी सिरे से खारिज कर दी। हाई कोर्ट का कहना है कि जज की हत्या के पीछे मोबाइल छीनने का कोई मामला नहीं है, बल्कि यह हत्या का मामला है। हत्या के पीछे कोई बड़ा षड्यंत्र है, जिस तक सीबीआइ अब तक नहीं पहुंच पायी है। चीफ जस्टिस डॉ रवि रंजन और जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान सीबीआइ की ओर से उपस्थित एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया एसबी राजू से कई सवाल पूछे, जिसका संतोषजनक जवाब नहीं मिला। 

क्या थक गई है सीबीआइ 

हाई कोर्ट की खंडपीठ ने कहा कि अब तक की जांच को देखकर ऐसा लगता है कि सीबीआइ इस मामले से थक गयी है। अपना पीछा छुड़ाने के लिए नयी कहानी बना रही है, जिसमें कोई सत्यता नहीं है। खंडपीठ ने कहा कि जहां यह घटना हुई थी, वह कोयला क्षेत्र है। गैंगवार की घटनाएं होती हैं। झारखंड उग्रवाद प्रभावित राज्य रहा है, इसके बावजूद कभी भी न्यायिक पदाधिकारियों पर कोई आंच नहीं आयी है। यह पहली बार है, जब झारखंड के इतिहास में जज की हत्या की गयी है।  सुप्रीम कोर्ट ने भी मामले में स्वत: संज्ञान लिया है और जांच की मॉनिटरिंग की जिम्मेवारी झारखंड हाइकोर्ट को दी है। सीबीआइ की जांच में प्रोफेशनल मैनर्स नहीं दिख रहा है। खंडपीठ ने सीबीआइ से पूछा कि जब मामले में आरोपियों की ब्रेन मैपिंग व नारको टेस्ट पहले हो चुकी थी, तो चार माह बाद फिर से दोबारा नारको टेस्ट और ब्रेन मैपिंग क्यों करायी गयी?

जज की हत्या के पीछ बड़ा षड्यंत्र

नारको टेस्ट में आरोपी राहुल ने कहा कि लखन टेंपो चला रहा था। वह उसकी बायीं ओर बैठा था। जज साहब धीरे-धीरे भाग रहे थे। उनके हाथ में सफेद रंग का रुमाल था। बायीं तरफ से लखन ने उन्हें ऑटो से टक्कर मारी। खंडपीठ ने रिपोर्ट देखने के बाद कहा कि जज के हाथ में रुमाल था। कोई मोबाइल नहीं था। मोबाइल के लिए टक्कर नहीं मारी गयी है। इसके पीछे कोई बड़ा षड्यंत्र है।

हाई कोर्ट की फटकार के चार दिन बाद घटनास्थल पर पहुंची सीबीआइ टीम

हाई कोर्ट ने 22 जनवरी को सीबीआइ की जांच रिपोर्ट खारिज कर दी थी। इसके चार दिन बाद सीबीआइ नई दिल्ली क्राइम ब्रांच की टीम फिर से घटनास्थल पर पहुंची। मामले की जांच नई दिल्ली क्राइम ब्रांच टीम ही कर रही है। 

Edited By: Mritunjay