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मोमोज और मिठाइयों में चमड़ा रंगने वाले रंग का इस्तेमाल, होटलों में नकली पनीर; धनबाद में दुकानदारों को चेतावनी

Published: Sun, 25 Oct 2026 09:46 PM (IST)

धनबाद में खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच में सामने आया है कि बाजार में बिकने वाला लगभग 50% पनीर नकली या मिलावटी है, जिससे गंभीर स्वास्थ्य जोखिम हैं।

नकली पनीर जब्त करते फूड इंस्पेक्टर राजा कुमार और उनकी टीम। (जागरण)

नकली पनीर जब्त करते फूड इंस्पेक्टर राजा कुमार और उनकी टीम। (जागरण)

HighLights

  1. धनबाद में 50% पनीर नकली या मिलावटी पाया गया।

  2. आठ माह में 5000 किलो से अधिक पनीर जब्त।

  3. मिलावटी पनीर से कैंसर, लिवर, किडनी रोग का खतरा।

डॉ. मोहन, धनबाद। धनबाद में त्योहारों के सीजन के बीच मिलावटखोरों का एक बड़ा और खौफनाक नेटवर्क सामने आया है।

जिला खाद्य सुरक्षा विभाग की हालिया जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि धनबाद के बाजारों, होटलों और ढाबों में बिकने वाला लगभग 50 प्रतिशत पनीर नकली या मिलावटी है।

शाकाहारी लोगों के लिए प्रोटीन का सबसे बेहतर और पसंदीदा विकल्प माना जाने वाला पनीर अब लोगों को सेहत की जगह गंभीर बीमारियां बांट रहा है।

दुर्गा पूजा के बाद अब विभाग ने दीपावली को लेकर मिलावट के खिलाफ अपनी जंग (अभियान) को और तेज कर दिया है।

8 महीने में 5 हजार किलो पनीर जब्त और नष्ट

बाजार में पनीर की भारी मांग का फायदा उठाकर मिलावटखोर सिंथेटिक और नकली पनीर बनाने में जुटे हैं। इस पर नकेल कसने के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग लगातार छापेमारी कर रहा है।

मार्च से अक्टूबर (पिछले 8 महीनों) के भीतर ही विभाग ने 5000 किलोग्राम से अधिक नकली और मिलावटी पनीर जब्त कर नष्ट किया है।

315 सैंपलों की जांच, 150 दुकानदारों को चेतावनी

विभाग की ओर से पिछले 8 महीनों में कुल 315 अलग-अलग खाद्य पदार्थों के सैंपल की जांच की गई। इसमें से नियमों का पालन न करने वाले लगभग 150 छोटे दुकानदारों को कड़ी चेतावनी जारी की गई है।

वहीं, गंभीर रूप से खराब पाए गए 30 सैंपलों के मामले में संबंधित विक्रेताओं पर जुर्माना लगाया गया है। दुर्गा पूजा के दौरान विभाग ने मोबाइल (चलंत) लेबोरेटरी का इस्तेमाल कर ऑन-द-स्पॉट 200 से अधिक ठेला, गुपचुप (पानीपुरी) और मोमोज दुकानों की जांच की।

चमड़ा रंगने वाले रंग खाना में डाल रहे

फूड सेफ्टी विभाग ने दुकानदारों और ग्राहकों को चंपई रंग के इस्तेमाल को लेकर बेहद गंभीर चेतावनी दी है। सरकार द्वारा पूरी तरह प्रतिबंधित यह रंग असल में चमड़े को रंगने (टैनिंग) के काम आता है, लेकिन मिलावटखोर इसका धड़ल्ले से इस्तेमाल मिष्ठान, मोमोज, मंचूरियन और चाट में कर रहे हैं।

राजा कुमार के मुताबिक, यह प्रतिबंधित रंग शरीर के अंदर जाकर कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी का सबसे बड़ा कारण बन रहा है। विभाग इसके खिलाफ दुकानदारों को जागरूक भी कर रहा है।

घर पर भी जांचें, पनीर असली है या नकली

राजा कुमार ने बताया कि पनीर के एक टुकड़े को पानी में उबालें और फिर उसे ठंडा होने दें। इसके बाद उस पर आयोडीन टिंचर की 2-3 बूंदें डालें (यह मेडिकल स्टोर पर आसानी से मिल जाता है), अगर पनीर का रंग नीला, काला या गहरा बैंगनी हो जाता है, तो पनीर नकली है। अगर रंग नहीं बदलता तो पनीर असली है।

लिवरस किडनी और हृदय रोग की संभावना

सदर अस्पताल के चिकित्सक डॉ. राजीव कुमार सिंह बताते हैं कि नकली पनीर खाने से फूड पाइजनिंग, किडनी और लिवर की बीमारियां, हृदय रोग और कैंसर जैसी जानलेवा समस्याएं हो सकती हैं।

इसमें इस्तेमाल होने वाले यूरिया और डिटर्जेंट किडनी और लिवर को गंभीर नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे अंग फेल होने का खतरा रहता है।

खराब पाम आयल और ट्रांस फैट शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ाकर हार्ट अटैक और हाई ब्लड प्रेशर का कारण बनते हैं। इसके हानिकारक केमिकल पाचन तंत्र को बिगाड़कर डायरिया और फूड पाइजनिंग पैदा करते हैं।

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