जागरण संवाददाता, धनबाद। झारखंड के सिमडेगा में 11 साल की बच्ची की मौत का मामला अभी थमा भी नहीं कि धनबाद के झरिया में भी इसी तरह का मामला सामने आ गया। यहां भी 40 वर्षीय बैजनाथ रविदास की शुक्रवार रात मौत हो गई।

खास यह कि बैजनाथ बीमार था, चार साल से कार्यालयों का चक्कर लगाने के बाद भी उसका राशन कार्ड नहीं बना था, बच्चे मिड डे मील से अपनी भूख मिटाते थे। आखिरकार बैजनाथ ने दम तोड़ दिया।

परिजन जहां इसे भूख से मौत बता रहे हैं वहीं प्रशासन यहां भी मौत की वजह बीमारी बता रहा है। पत्नी पार्वती अपने पति बैजनाथ के शव से लिपटकर बार बार बस यही कह रही थी कि भूख मेरे पति को लील गई। चार साल से हमारे पास राशन कार्ड तक नहीं है।

हम लोग भटकते रहे पर राशन कार्ड नहीं बना। बैजनाथ की मौत से उसकी पत्नी पार्वती का संसार उजड़ गया है। बैजनाथ के तीन पुत्र रवि, सूरज व नीरज और दो पुत्री सुमन एवं सुलेखा हैं। इनकी जिम्मेदारी अब पत्नी केकंधे पर आ गई है।

रिक्शा चलाना बंद किया तो काल ने बढ़ाया हाथ

बैजनाथ रिक्शा चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण करता था। एक माह पहले वह बीमार हो गया। इसलिए रिक्शा चलाना बंद कर दिया। घर में कोई कमाऊ सदस्य नहीं था। इससे परिवार की आर्थिक स्थिति और खराब हो गई। तब पत्नी पार्वती ने पास के एक घर में चौका-बर्तन का काम शुरू किया। इसके बावजूद पति का इलाज नहीं हो सका। इस दौरान अक्सर घर में चूल्हा भी नहीं जलता था। पत्नी किसी प्रकार पास के एक मेडिकल स्टोर से दवा लेकर पति को देती थी।

सरकारी अस्पताल तक जाने को पैसे नहीं थे। कई दिनों से घर में खाने को अनाज तक नहीं था। पत्नी के अनुसार तीन दिन से घर में चूल्हा नहीं जला था। बीमारी की हालत में भूख के कारण बैजनाथ ने आखिरकार शुक्रवार रात को दम तोड़ दिया। - वहीं सीओ (अंचलाधिकारी) झरिया केदार नाथ ¨सह का कहना है कि बैजनाथ की भूख से नहीं बीमारी से मौत हुई है। उसकी बीमारी का इलाज सही तरीके से नहीं हो पाया।

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Posted By: Sachin Mishra

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