आशीष सिंह, धनबाद। आखिरकार लंबी जद्दोजहद के बाद महर्षि दयानंद सरस्वती का नाम यूजीसी नेट के पाठ्यक्रम में शामिल कर ही लिया गया। केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री डा. सुभाष सरकार ने महर्षि दयानंद सरस्वती का नाम यूजीसी की दार्शनिक सूची में शामिल करने का निर्देश जारी कर दिया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने इस आशय की जानकारी सीकर राजस्थान के सांसद स्वामी सुमेधानंद सरस्वती को दी है। उन्होंने यह भी कहा है कि यूजीसी नेट विषय के दर्शनशास्त्र के पाठ्यक्रम में यूनिट-5 के तहत स्वामी दयानंद सरस्वती को शामिल किया जा रहा है। यह पाठयक्रम स्वामी दयानंद सरस्वती : रीकंसीलेशन आफ द सिक्स सिस्टम आफ इंडियन फिलासफी त्रैतवेद (गोल्ड, सेल्फ एंड नेचर) होगा। इसे दिसंबर 2021 के यूजीसी-नेट के अद्यतन पाठ्यक्रम से लागू किया जा रहा है। दैनिक जागरण ने इसी वर्ष अपने दस जुलाई के अंक में दार्शनिकों की सूची में महर्षि दयानंद सरस्वती शामिल नहीं शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। दैनिक जागरण में समाचार प्रकाशित होने के बाद सीकर राजस्थान के सांसद स्वामी सुमेधानंद सरस्वती ने जुलाई के अंतिम सप्ताह में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से भी मुलाकात की थी। सार्वदेशिक आर्यप्रतिनिधि सभा के प्रधान स्वामी आर्यवेश ने भी पाठ्यक्रम के संशोधन के लिए केंद्रीय शिक्षा मंत्री और यूजीसी को इसी वर्ष 30 जून को ही पत्र दिया था। समाचार में यह बताया था कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की ओर से दर्शनशास्त्र के नेट के नए पाठ्यक्रम की इकाई-5 (ट) में 19 वीं एवं 20 वीं शताब्दी के दार्शनिकों की सूची में दयानंद सरस्वती का नाम शामिल नहीं है। जबकि इनके समकालीन स्वामी विवेकानंद, श्री अरङ्क्षवद, महात्मा गांधी, इकबाल सहित 15 लोगों के नाम हैं।

दार्शनिकों की सूची में इनके थे नाम

स्वामी विवेकानंद, श्री अरङ्क्षवद, इकबाल, केसी भट्टाचार्य, राधाकृष्णन, के कृष्णमृर्ति, महात्मा गांधी, भीमराव आंबेडकर, डीडी उपाध्याय, नारायण गुरु, तिरुवल्लूर, ज्योतिबा फूले, एमएन राव और मौलाना आजाद।

केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री का पत्र मिला है। इसमें बताया गया है कि महर्षि दयानंद सरस्वती जी का नाम दिसंबर के यूजीसी-नेट (दर्शनशास्त्र) के पाठ्यक्रम में शामिल किया जा रहा है। यह हम सभी की जीत है।

- सुमेधानंद सरस्वती, सांसद सीकर राजस्थान

महर्षि दयानंद सरस्वती का नाम पाठ्यक्रम में शामिल किए जाने का समाचार सुखद अनुभूति दे रहा है। स्वामी दयानंद समकालीन भारतीय दर्शन के शिखर पुरुष थे। समकालीन दार्शनिकों की सूची में उनका नाम शामिल न किया जाना सरासर गलत था। दयानंद सरस्वती ने सत्यार्थ प्रकाश एवं वेद भाष्य जैसी रचनाओं के जरिए अपनी विद्वता का परिचय दिया था।

- स्वामी आर्यवेश, प्रधान सार्वदेशिक आर्यप्रतिनिधि सभा

महर्षि दयानंद सरस्वती जी का नाम यूजीसी की दार्शनिक सूची में शामिल हो गया है। इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, स्वामी सुमेधानंद सरस्वती, स्वामी आर्यवेश और दैनिक जागरण समाचार का विशेष तौर आभार।

- हरहर आर्य, प्रदेश अध्यक्ष राजार्य सभा झारखंड

Edited By: Mritunjay