दीपक, धनबाद: धनबाद लोकसभा सीट जीतने के लिए कांग्रेस के प्रत्याशी कीर्ति आजाद झा ने पूरी ताकत लगा दी है। उन्हें महागठबंधन के दल झामुमो, झाविमो, मासस और राजद का साथ भी मिल रहा है, लेकिन चुनाव प्रचार में कांग्रेस प्रत्याशी आदर्श आचार संहिता को भूल गए।

दरअसल कीर्ति के पक्ष में लोकसभा क्षेत्र में बांटे जा रहे पंफ्लेट में मुद्रक और प्रकाशक का नाम ही अंकित नहीं है। इस तरह के दो पंफ्लेट बांटे जा रहे हैं, जिसमें एक में ईवीएम के चित्र पर कीर्ति आजाद का क्रम अंकित है तो दूसरे में उनके साथ उनकी पत्नी पूनम आजाद की तस्वीर है, जो कोइछा फैलाकर लोगों से वोट अपील करती दिख रही हैं। पंफ्लेट के निचले हिस्से में निवेदक में कांग्रेस, झामुमो, झाविमो, राजद और एमसीसी लिखा है।

क्या है नियम: मालूम हो कि आदर्श आचार संहिता 2019 के नियमों के तहत ऐसा कोई भी पोस्टर, इश्तेहार, पंफ्लेट या परिपत्र निकालना वर्जित है, जिसमें मुद्रक का नाम और पता अंकित ना हो।

नियम के उल्लंघन पर सजा का प्रावधान: चुनाव आयोग के इस नियम के उल्लंघन पर सजा का भी प्रावधान है। नियम का उल्लंघन करने पर दो हजार रुपये जुर्माना या छह माह का कारावास या एक साथ दोनों सजाएं भुगतनी पड़ सकती हैं।

क्यों जरूरी है पंफ्लेट पर मुद्रक-प्रकाशक का नाम होना: दरअसल चुनाव के दौरान प्रत्याशी द्वारा किए जाने वाले खर्च की अधिकतम सीमा 70 लाख रुपये निर्धारित है। इसकी देखरेख का जिम्मा व्यय कोषांग के हवाले है। पंफ्लेट पर मुद्रक और प्रकाशक का नाम होने से चुनाव आयोग यह पता कर सकता है कि इस मद में प्रत्याशी ने कितने रुपये खर्च किए।

आखिरी दौर में पंफ्लेट वार: गौरतलब है कि चुनाव के आखिरी दौर में धनबाद में पोस्टर वार छिड़ा है। प्रत्याशी अपने-अपने मुद्दों को लेकर पंफ्लेट के जरिए मतदाताओं से वोट की अपील कर रहे हैं। कीर्ति और उनकी पत्नी पूनम आजाद ने जहां एक ओर जनता से वोट के लिए इमोशनल अपील की है, वहीं सिंह मेंशन के नाम पर चुनाव लड़ रहे निर्दलीय प्रत्याशी सिद्धार्थ गौतम ने पंफ्लेट के जरिए धनबाद के लिए अपने विजन को बताया है।

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Posted By: Deepak Pandey

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