यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 27, 2019 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
प्राइवेट बैंकों को सीएमपीएफ बनाएगा फंड मैनेजर, ब्याज मिलेगा ज्यादा
सीएमपीएफ का फंड प्रबंधन का काम एसबीआइ समेत चार अन्य वित्तीय संस्थान कर रहे हैं। सीएमपीएफ के फंड में 90 हजार करोड़ रुपये हैं।

धनबाद, जेएनएन। कोल माइंस भविष्य निधि संगठन की करीब 90 हजार करोड़ की रकम का प्रबंधन रिलायंस निप्पन व आइसीआइसीआइ को देने की तैयारी हो रही है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने इस संबंध में गाइडलाइन जारी की है। पहले सरकारी बैंकों को ही फंड मैनेजर बनाया जाता था। अब कॉरपोरेट सेक्टर के बैंक भी शामिल किए गए हैं। सीएमपीएफ में करीब साढ़े नौ लाख पेंशनर व सदस्य हैं।
सीएमपीएफ बोर्ड ऑफ ट्रस्टी की सात माह बाद मंगलवार को नई दिल्ली में हुई बैठक में इस मामले में निर्णय ले लिया गया। अध्यक्षता कोल सचिव व बोर्ड चेयरमैन एस संमुतो ने की। बोर्ड के सचिव व प्रभारी आयुक्त अनिमेष भारती ने बताया कि सीएमपीएफ के वित्तीय खर्च के लिए बजट की मंजूरी भी बैठक में दे दी गई। रिजर्व बैंक की गाइडलाइन के तहत आइसीआइसीआइ व रिलायंस निप्पन को फंड मैनेजर बनाया जाएगा। इसके लिए निविदा निकालेंगे। अन्य मुद्दों पर फैसले नहीं हो सके क्योंकि लोकसभा चुनाव के कारण आचार संहिता लगी है। मालूम हो अभी सीएमपीएफ का फंड प्रबंधन का काम भारतीय स्टेट बैंक समेत चार अन्य वित्तीय संस्थान कर रहे हैं। बोर्ड सदस्य व सीटू नेता डीडी रामानंदन ने बताया कि सीएमपीएफ के फंड में 90 हजार करोड़ रुपये हैं। इनके प्रबंधन का जिम्मा आइसीआइसीआइ व रिलायंस निप्पन को देने की तैयारी है। बैठक में कोल मंत्रालय के संयुक्त सचिव, वित्त मंत्रालय के सचिव, कोल इंडिया डीपी आरपी श्रीवास्तव, बीसीसीएल डीपी आरएस महापात्रा, ईसीएल डीपी विनय रंजन, डब्ल्यूसीएल डीपी डॉ. संजय कुमार, एटक के रमेंद्र कुमार, सीटू से डीडी रामानंदन, एचएमएस से राजेश कुमार आदि थे। बैठक में पीएफ ब्याज दर, सीएमपीएफ स्कीम में संशोधन, फंड वृद्धि पर कोल कंपनियों से विमर्श हुआ।
रिजर्व बैंक ने जो गाइडलाइन दी है उस आधार पर फंड का इस्तेमाल किया जाएगा। बोर्ड की बैठक सहमति दे दी गई है।
- रमेंद्र कुमार, एटक अध्यक्ष व बोर्ड सदस्य