धनबाद : लोक आस्था का महापर्व रविवार को नहाय-खाय के साथ आरंभ हो रहा है। छठ पूजा के चार दिवसीय अनुष्ठान के पहले दिन नहाय-खाय, दूसरे दिन खरना और तीसरे दिन डूबते हुए सूर्य देव और चौथे दिन उगते हुए सूर्य देव को अ‌र्घ्य अर्पण किया जाएगा। रविवार को नहाय-खाय, सोमवार 12 नवंबर को खरना, मंगलवार 13 नवंबर को सांझ का अ‌र्घ्य और बुधवार 14 नवंबर को सुबह का अ‌र्घ्य अर्पण पड़ रहा है। ज्योतिषाचार्यो के अनुसार इस बार छठ में सिद्धि योग, अमृत योग व छत्रयोग का संयोग बन रहा है। रविवार को नहाय-खाय पर सिद्धि योग का संयोग बन रहा है। 13 नवंबर को संध्याकालीन अ‌र्घ्य के दिन अमृत योग और 14 नंवबर को सुबह के अ‌र्घ्य में छत्र योग का संयोग बन रहा है।

रविवार को छठ महापर्व के पहले दिन व्रतियां नहाय खाय मनाएंगी। नहाय-खाय के दिन कद्दू-भात ग्रहण करने की परंपरा है। छठ व्रतियां स्थानीय तालाब, नदी, पोखर और घरों में स्नान कर अरवा चावल का भात, चना दाल व कद्दू की सब्जी बनाएंगी और स्वयं व अपने परिजनों के साथ ग्रहण करेंगी। नहाय-खाय को लेकर शनिवार को बाजार में कद्दू का डिमांड बढ़ा रहा। लोगों ने बाजार जाकर कद्दू की खरीदारी की। शहर में पुराना बाजार, हीरापुर हटिया बाजार, बेकारबांध, बरटांड़, पुलिस लाइन व स्टीलगेट में कद्दू 25 से 40 रुपये किलो बिका। वहीं मंसूरी अरवा चावल 28 से 30 किलो और चना दाल 64 से 70 रुपये के बीच बिका।

सूर्योपासना में अ‌र्घ्य दान का विधान

पंडित रमाशंकर तिवारी बताते हैं, हमारे सनातन धर्म में सूर्य को देवता की संज्ञा दी गई है। सूर्यदेव में भगवान विष्णु की वेद त्रयी वैष्णवी शक्तिया स्थित है, जो उनको इस ब्रह्माण्ड में सर्व शक्तिमान बना दी हैं। ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को ग्रहों का अधिपति माना गया है। सभी ग्रह सूर्य की ही परिक्रमा करते हैं। सूर्य ग्रह दिव्य शक्ति, आत्म बल, आत्मज्ञान, विजय, यश-प्रतिष्ठा, नेत्र, हृदय, मस्तिष्क, धन वैभव, पुरुषार्थ व सफलता, पिता का सुख एवं आरोग्य का कारक ग्रह है। अत: सूर्य की अनुकूलता से जातक को मनोवांछित फल की प्राप्ति संभव है। सूर्योपासना के क्रम में नित्य प्रात: सूर्य दर्शन, सूर्य नमस्कार व अ‌र्घ्य दान करने का विधान है। शुक्लपक्ष की सप्तमी तिथि सूर्य की तिथि है। सूर्य देव के विशेष पूजन के निमित्त कार्तिक शुक्ल षष्ठी को व्रत पूजन व अस्ताचल गामी सूर्य तथा सप्तमी को उदीयमान सूर्यदेव को विधिवतं अ‌र्घ्यदान किया जाता है। इस पावन पर्व को सूर्यषष्ठी व्रत या छठ व्रत कहते हैं। आस्था विश्वास व शुचिता का पर्व छठ चार दिनों का है। प्रथम दिन नहाय खाय, दूसरे दिन खरना, खरना के उपरांत व्रत रखते हुए तीसरे दिन अस्ताचलगामी सूर्यदेव को प्रथम अ‌र्घ्य व पुन: अगले दिन प्रात: काल में द्वितीय अ‌र्घ्यदान किया जाता है।

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