जागरण संवाददाता, लोदना : बनियाहीर सात नंबर निवासी लोदना कोलियरी में पंप खलासी के पद पर कार्यरत बीसीसीएल कर्मी 56 वर्षीय मदन बाउरी की केंद्रीय अस्पताल धनबाद में इलाज के दौरान गुरुवार मौत हो गई थी। प्रोविशनल नियोजन को लेकर शव को कोलियरी कार्यालय के समीप रख दिया। शनिवार को मृतक के पुत्र गौतम बाउरी को प्रोविशनल नियोजन मिलने पर तीसरे दिन करीब 48 घंटे के बाद शव उठा।

गुरुवार की शाम से ही मृतक के स्वजन और संयुक्त मोर्चा के लोग आश्रित को नियोजन देने की मांग को लेकर कोलियरी कार्यालय के समक्ष शव को रखकर विरोध जता रहे थे। शनिवार को पाकर राज्य के पूर्व मंत्री चंदनकियारी के विधायक अमर कुमार बाउरी, पुर्व मेयर चंद्रशेखर अग्रवाल, योगेन्द्र यादव, महावीर पासवान समेत कई भाजपा नेता लोदना कोलियरी कार्यालय पहुंचे। घटना के बारे में मृतक के स्वजनों से जानकारी ली। इसके बाद प्रबंधन से बात कर मृतक कोल कर्मी मदन बाउरी के आश्रित को जल्द नियोजन देने की। यूनियन के लोगों ने कहा कि प्रबंधन नियोजन देने में ढुलमुल रवैया अपना रहा है। हर रोज नए नए कानून बनाए जा रहे है। मेडिकल के नाम पर प्रबंधन पर परेशान करने का आरोप लगाया। कहा कि तीन दिनों से शव रखा है। मृतक कर्मी का हाल बेहाल है। प्रबंधन को अपने कर्मी के प्रति कोई संवेदना नही रह गया। मौके पर संजीत सिंह, बिहारी लाल चौहान, सबूर गोराई, ललन पासवान, संजय यादव, शिवबालक पासवान, सुरेश पासवान, संजीत सिंह, भोला यादव, रबिन्द्र प्रसाद, रामाश्रय पाल, सुभाष उपाध्याय, प्रजा पासवान, नौशाद अंसारी, बिनोद पासवान, बीके तिवारी, आशिष पासवान, अजय निषाद, धर्मबीर पासवान, बालकरण रविदास, विद्यासागर पासवान, मुनिलाल राम, बीके तिवारी, अशोक पांडे, शिवराम सिंह, धमेन्द्र राय, संतोष रजक, सलाउद्दीन अंसारी, शिवकुमार सिंह, मंटू बाउरी, शिव पासवान थे।

बीना नियोजन दिलाए जाएंगे नही : अमर

- मृतक के पत्नी कल्पना देवी ने पूर्व मंत्री अमर बाउरी को अपना दुखड़ा सुना कर रोने लगी। कहा कि तीन पहले पति का देहांत हो गया। शव पड़ा है। पति के शव के पास तीन से रहना बहुत मुश्किल है। इतना सुनते ही अमर बाउरी भावुक हो गए। कहा कि जब तक मृतक के पुत्र को नियोजन नही मिल जाता है। वह यहां से नही जाऐगें। पूर्व मंत्री के लोदना पहुंचने के जानकारी पाकर मेयर समेत कई भाजपा नेता लोदना पहुंचे। नियोजन पत्र मिलने के बाद पुर्व मंत्री व अन्य लौट वहां से निकले।

 

प्रबंधन हुआ रेस, आश्रित का मेडिकल करवाने पहुंचे सीएचडी

- कर्मी के मौत के बाद पुत्र गौतम को नियोजन पत्नी ने प्रबंधन को लिखित आवेदन दिया। पर गौतम का नोमिनी फार्म में नाम नही होने से प्रबंधन ने कोर्ट से बांड बनाने की बात कही। शुक्रवार को बांड बन गया तो मेडिकल के लिए गौतम को सेन्ट्रल अस्पताल भेजा गया। पर रात तक मेडिकल नही हो पाया। उसके बाद से संयुक्त मोर्चा के लोग आक्रोशित हो गए। शनिवार को उग्र आंदोलन करने की चेतावनी प्रबंधन को दिया। सुबह से लोग लोदना कोलियरी पहुंचने लगे। उसके बाद पूर्व मंत्री भी मौके पर पहुंचे। इसके बाद प्रबंधन रेस हुआ। क्षेत्रिय कार्मिक प्रबंधक डीके भगत, पीओ एम कुंडू, पीएम टी रजक सेन्ट्रल अस्पताल धनबाद पहुंचे। करीब तीन बजे मृतक के पुत्र का मेडिकल करा कर वापस लौटे। उसके बाद प्रबंधक व यूनियन प्रतिनिध ने एक समझौता पत्र हस्ताक्षर के बाद प्रोविशनल नियोजन का पत्र पुत्र को दिया। उसके बाद शव को अंतिम संस्कार के लिए दामोदर मुक्ति धाम ले जाया गया।

पुत्र का हाजिरी बना पर दाह संस्कार के लिए नही मिला राशि

गौतम को नियोजन मिलने के बाद लोदना कोलियरी में शनिवार को उसका हाजिरी बना। पिता के अंतिम संस्कार के लिए 15 दिनों के छुट्टी का आवेदन दिया। पर कर्मी के मौत के बाद दाह व अंतिम संस्कार के लिए मिलने वाला करीब 50 हजार रूपए नही मिल पाया। प्रबंधन ने बताया कि राशि मृतक के पत्नी के खाते में भेजा जाता है। पर पत्नी के नाम से बैंक खाता नही है। सोमवार को खाता ओपन कर राशि भेज दिया जाएगा। लोगों ने नगद राशि देने की मांग की। प्रबंधक ने कहा कि राशि को आरटीजीएस ही किया जा सकता है। यूनियन के लोगों ने इस संबंध में कई कठिनाई होने की बात कही। यूनियन व परिजनों ने मृतक के शव पर माल्यापर्ण कर दो मिनट का मौन रख आत्मा के शांति के लिए प्रार्थना किया।

 

पीओ पर भड़के जमसं नेता

- शनिवार के सुबह से आंदोलन तेज करने को लेकर युनियन के लोग अपना अपना तर्क दे रहे थे। कुछ लोगों का कहना था कि प्रबंधक जानबुझ कर देर कर रहा है। शव को क्षेत्रिय कार्यालय में जाकर रखा जाय। कुछ का कहना जब प्रबंधक अपने स्तर से मेडिकल का काम रहा ही रहा है तो कुछ देर इंतार करना चाहिए। करीब तीन बजे प्रबंधक मृतक के पुत्र गौतम करा कर वापस लौटा। प्रबंधक पूर्व मंत्री व मेयर के पास जानकारी देने पहुंचे। उसके बाद जब शव के पास पीओ एम कुंडू पहुंचे तो जमसं नेता संजीत सिंह उनपर भड़क गए। एक खास यूनियन के तहरीज देने की बात कही। लोगों ने किसी प्रकार मामले को संभाला।

वर्जन

इस तरह की घटना प्रबंधन की संवेदनहीनता को दर्शाता है। जब इस तरह के मौत पर नियोजन देने का प्रावधान व नियम बना है तो फिर संयुक्त मोर्चा आंदाेलन करने की नौबत क्यो नहीआई। जो व्यवस्था है उसके तहत काम किया जाय तो दोनों में संबंध बना रहेगा। संयुक्त मोर्चा के आंदोलन के कारण एक परिवार को नियोजन मिल रहा है। आगे से किसी के साथ ऐसा नही प्रबंधन को इस दिशा में बेहतर काम करना होगा।

- अमर बाउरी, पूर्व मंत्री सह चंदनक्यारी विधायक

 

ऐसे मामले में बीसीसीएल प्रबंधक को प्राथमिकता के आधार पर काम करना होगा। जिस श्रमिक के बल पर बीसीसीएल चल रहा है। उसके मौत के बाद ऐसा वर्ताब अमानवनीय है। ऐसे में श्रमिक-प्रबंधक का आपसी विश्वास कमजोड़ होता है। उसका खामियाजा प्रबंधन को ही भुगतना पड़ता है।

चंद्रशेखर अग्रवाल, पूर्व मेयर, धनबाद

प्रबंधक जानबुझ कर मजदूरों व उसके परिजनों को परेशान कर रहा है। जब कर्मी के मौत के बाद प्राेविशनल नियोजन का प्रावधान है तो फिर उसे देने में देर नही होनी चाहिए। आगे से ऐसी घटना की पूर्नावृति नही हो वरीय अधिकारियों से बात किया जाएगा।

- योगेन्द्र यादव, केन्द्रीय उपाध्यज्ञ, कोयला इस्पात मजदूर पंयायत

Edited By: Atul Singh