धनबाद, जेएनएन: छोटे-छोटे निजी विद्यालय अब भुखमरी की कगार पर पहुंच गए है। किराए के भवनों में चल रहे स्कूल के हालात ऐसे हैं कि किराया नहीं दे पाने के कारण अब स्कूल बंद होने की नौबत आ गई है। निजी स्कूलों के संचालक और कर्मियों की कोई सुधि नही ले रहा है।

बुधवार को आयोजित झारखंड प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के प्रदेश स्तरीय वर्चुअल बैठक में प्रदेश महासचिव राम रंजन कुमार सिंह तथा सचिव इरफान खान ने कही। उन्होंने सरकार के खिलाफ नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि स्कूल चलाने के लिए आमदनी के सारे रास्ते बंद है। पिछले 15 महीने से छोटे-छोटे निजी विद्यालयों में ना ही नामांकन हो रहा है और ना ही मासिक शुल्क अभिभावकों के द्वारा जमा किया जा रहा है।

ऐसे में उन स्कूलों की स्थिति आर्थिक दयनीय हो गई है। किराए के भवन में चल रहे हैं हर महीने स्कूल प्रशासन को हजारों रुपए किराया देना पड़ रहा है। इससे आर्थिक रूप से स्कूल की स्थिति आर्थिक दयनीय हो गई है। एसोसिएशन ने कई बार शिक्षक और कर्मियों के राहत पैकेज की मांग सरकारी से की परंतु झारखंड सरकार के द्वारा अभी तक किसी भी तरह का राहत पैकेज शिक्षक और कर्मियों को नहीं दी गई।

सिर्फ धनबाद जिले में 500 से ज्यादा गैर मान्यता प्राप्त निजी विद्यालय है। इन स्कूलों की आमदनी लगभग बंद है। विद्यालय की ओर से ऑनलाइन क्लास कराया जा रहा है। बावजूद अभिभावक द्वारा मासिक शुल्क नहीं जमा होने से विद्यालय का किराया देना और शिक्षक कर्मियों का वेतन देना मुश्किल हो गया है। प्रदेश महासचिव राम रंजन कुमार सिंह ने कहा कि अगर झारखंड सरकार निजी विद्यालयों के शिक्षक और कर्मियों की सुध नहीं लेंगे तो कई विद्यालय बंद हो जाएंगे और बहुत सारे शिक्षक और कर्मियों के समक्ष अब कोई चारा नहीं बचेगा और आत्महत्या करने पर मजबूर हो जाएंगे। क्योंकि लॉकडाउन में नया एडमिशन और कक्षाएं नहीं चलने से आर्थिक परेशानी से जूझ रहे हैं। सभी छोटे छोटे निजी विद्यालय बहुत सारे निजी विद्यालय भवन का किराया, बिजली बिल, बैंक का लोन, गाड़ी की किस्त दे पाने में अब असमर्थ हो गए हैं। इसलिए एसोसिएशन सरकार से मांग करती है कि गैर मान्यता प्राप्त निजी विद्यालय के शिक्षक व कर्मियों को यू डाइस कोड के आधार पर राहत पैकेज देकर सभी को भुखमरी और आत्महत्या करने से भी बचाया जाए।