धनबाद, जेएनएन: इसमें विश्व वन दिवस पर पीएमसीएच के ईएनटी विभाग में 70 लोगों की बहरेपन की जांच की गई। इससे पहले शिविर की शुरुआत विभागाध्यक्ष डॉ एके ठाकुर, डॉक्टर जितेंद्र चौरसिया, ऑडियोलॉजिस्ट  गणेश चक्रवर्ती ने किया।  शिविर में काफी संख्या में लोग पहुंचे। डॉ ठाकुर ने बताया कि धनबाद में बहरेपन के मरीजों की संख्या बढ़ रही है।

पहले इसके कारण प्रदूषण और तेज ध्वनि होती थी। लेकिन अब मोबाइल पर ज्यादा हेडफोन ईयर फोन के माध्यम से गाना सुनने वाले लोग शिकार हो रहे हैं। इसमें युवाओं की संख्या ज्यादा है। उन्होंने बताया कि हमारे कान की सुनने की क्षमता 80 डेसीबल से ज्यादा नहीं हो पाती है। इससे ज्यादा की आवाज कानों के लिए बेहद हानिकारक है। यही वजह है कि लगातार म्यूजिक सुनने वाले लोग शिकार हो रहे हैं। 


मरीजों को दी गई दवा, जरूरतमंदों का बनेगा मेडिकल

बहरेपन के शिकार से ग्रसित मरीजों के लिए निशुल्क दवा उपलब्ध कराई गई। इसके साथ ही जो मरीज बहरेपन के लिए दिव्यांग प्रमाण पत्र बनाना चाहते हैं, उन्हें इसकी प्रक्रिया बताई गई। ऐसे मरीज को ऑडियोलॉजी मशीन से अपने कानों की जांच करानी है। इसके बाद रिपोर्ट को सिविल सर्जन कार्यालय में जमा कराया जाएगा। इसके बाद सिविल सर्जन कार्यालय में मेडिकल बोर्ड इसकी जांच करेगा। 40 फीसदी से ऊपर इस निशक्तता पाए जाने के बाद संबंधित व्यक्ति को दिव्यांग माना जाएगा और उसका प्रमाण पत्र बनाया जाएगा। प्रमाण पत्र के बाद दिव्यांग से जुड़ी तमाम सुविधाएं मिल पाएंगे।

ओपीडी में हर दिन मरीजों की जांच

ऑडियोलॉजिस्ट गणेश चक्रवर्ती ने बताया कि बहरेपन की जांच के लिए अस्पताल में ऑडियोमेट्री सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इसे कानों में बहरेपन की अस्पष्टता जांच हो जाती है। ओपीडी में हर दिन लगभग 50 के आसपास मरीज आ रहे हैं।

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