जागरण संवाददाता, धनबाद : शहरी क्षेत्र के सभी सार्वजनिक जलाशय, सैरात, जलागार और कुएं पर नगर निगम का एकाधिकार होगा। इसकी देखरेख से लेकर संरक्षण, बंदोबस्ती, इस्तेमाल, आमदनी सब कुछ की देखरेख नगर निगम करेगा। झारखंड नगरपालिका अधिनियम 2011 में इसका प्रावधान किया गया है। इसीलिए एक दिन पहले ही नगर निगम ने मत्स्य विभाग से तालाबों की सूची तलब की है। नगर निगम के पांचों अंचल धनबाद, छाताटांड़, झरिया, सिदरी और कतरास में सबसे अधिक तालाब मत्स्य विभाग के अंतर्गत है। तालाबों की बंदोबस्ती करने का अधिकार तो निगम को दिया गया है, लेकिन अधिकार सीमित कर दिया है। नगर निगम के पास दो लाख रुपये वार्षिक जमा यानी राजस्व वाले तालाबों की ही बंदोबस्ती करने का अधिकार होगा। इससे अधिक राशि होने पर उपायुक्त की देखरेख में बंदोबस्ती होगी। तालाब बंदोबस्ती के लिए दो तरह की समिति होगी गठित :

दो लाख रुपये तक वार्षिक जमा वाले तालाबों की बंदोबस्ती दर का निर्धारण निकाय स्तर पर नगर आयुक्त, कार्यपालक पदाधिकारी या विशेष पदाधिकारी की अध्यक्षता में गठित समिति करेगी। इससे ऊपर दर का निर्धारण उपायुक्त की अध्यक्षता में गठित कमेटी करेगी। निकाय स्तर पर नगर आयुक्त, कार्यपालक पदाधिकारी या विशेष पदाधिकारी अध्यक्ष होंगे। इनके साथ तीन सदस्य सरकार से मनोनीत मत्स्यजीवी सहयोग समिति के प्रतिनिधि, मत्स्य पालक के प्रतिनिधि और निदेशक मत्स्य के नामित प्रतिनिधि होंगे। इसी तरह उपायुक्त की अध्यक्षता में गठित समिति के अध्यक्ष उपायुक्त होंगे। इनके अलावा चार सदस्य सरकार से मनोनीत मत्स्यजीवी सहयोग समिति के प्रतिनिधि, मत्स्य पालक के प्रतिनिधि, निदेशक मत्स्य के प्रतिनिधि और नगर आयुक्त, कार्यपालक पदाधिकारी या विशेष पदाधिकारी शामिल होंगे। ये सभी तालाब की वार्षिक बंदोबस्ती दर तय करेंगे। इसमें तालाब की भौतिक स्थिति, पिछले वर्षों में प्राप्त उत्पादन एवं आय, जल एवं मिट्टी की उत्पादकता से संबंधित आंकड़े और पिछले वर्षों में किए गए विकास कार्य और इस पर किए गए खर्च को ध्यान में रखते हुए दर निर्धारण करेंगे। तालाब का वार्षिक सुरक्षित जमा निर्धारण उनकी वार्षिक उत्पादकता के मूल्य के आधार पर होगा।

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