धनबाद, जेएनएन। कॉमर्शियल माइनिंग के विरोध में 2 से 4 जुलाई तक तीन दिवसीय हड़ताल को टालने की केंद्रीय कोयला मंत्री प्रहलाद जोशी की अंतिम कोशिश सफल नहीं हुई है। जोशी ने बुधवार को ट्रेड यूनियनों के केंद्रीय नेताओं के साथ वर्चुअल मीटिंग की। इसका कोई लाभ नहीं हुआ। ट्रेड यूनियन नेता अपनी बात पर अड़े रहे। इसके साथ ही तय हो गया है कि गुरुवार से कोल इंडिया में हड़ताल होगी। मजदूर संगठनों के जिद पर अड़ जाने के बाद कोयला मंत्री ने कोल इंडिया के श्रमिक संगठनों से अपील की है कि वे राष्ट्रहित में दो से चार जुलाई तक प्रस्तावित हड़ताल वापस ले लें। बुधवार को कोल इंडिया के 04 केंद्रीय श्रमिक संगठनों बीएमएस, एचएमएस, एटक और सीटू के शीर्ष पदाधिकारियों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये आहूत बैठक में उन्होंने यह अपील की।

कॉमर्शियल माइनिंग से कोल इंडिया का दूर-दूर तक संबंध नहीं

मंत्री ने कहा कि कॉमर्शियल माइनिंग के मामले में श्रमिक संगठनों की आशंकाएं निराधार हैं। देश को कोयला उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में किए जा रहे प्रयासों को सशक्त करने की अपील की। जोशी ने कोल इंडिया पररवार को आश्वस्त किया कि कॉमर्शियल माइनिंग से कोल इंडिया का दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं है। कोल इंडिया देश में कोयला उत्पादन की सबसे बड़ी कंपनी थी, है और रहेगी। हड़ताल से कोयला कामगारों का, कंपनी का और सबसे ऊपर देश का नुकसान होगा।

कोयला रहते हुए बाहर से मंगाना पाप से कम नहीं
उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत के लिए राष्ट्र को बिजली चाहिए। यह पर्याप्त कोयले के बिना संभव नहीं है। कोल इंडिया पर दे को गर्व है, जो देश ही नहीं, बल्कि दुनिया की सबसे बड़ी कोयला उत्पादक कंपनी है। अकेले देश का 80 फीसद से अधिक कोयला निकाल रही है। फिर भी देश को सालाना लगभग 250 मिलियन कोयले का आयात करना पड़ता है। अपने देश में पर्याप्त कोयला रहते हुए कोयले का आयात किसी पाप से कम नहीं है। कोयले की इसी मांग एवं आपूर्ति के अंतर को कम करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में कोयले की कॉमर्शियल माइनिंग के लिए ऑक्शन की प्रकिया शुरू की गई है।

चीन तीसरा रिजर्व होकर भी उत्पादन में पहला देश है

हमारा पड़ोसी देश चीन सालाना 3,500 मिलियन टन कोयला निकालकर अपने विकास को नई रफ्तार दे रहा है। दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कोयला रिजर्व रख कर भी चीन आज सबसे बड़ा कोयला उत्पादक एवं उपभोक्ता देश है। विकास की दौड़ में चीन को टक्कर देते हुए उससे आगे निकलने के लिए भी यह बेहद जरूरी है कि हम अपने देश में मौजूद विशाल कोयला रिजर्व का जल्द से जल्द दोहन करें।

हड़ताल टालने की अंतिम कोशिश भी विफल रही
कॉमर्शियल माइनिंग के खिलाफ कोयला उद्योग में गुरुवार को पहली पाली से हड़ताल रहेगी। हड़ताल टालने की अंतिम कोशिश भी विफल रही। बुधवार अपराह्न तीन से 4:20 बजे तक सभी ट्रेड यूनियनों के केंद्रीय नेताओं के साथ कोयला मंत्री की वर्चुअल मीटिंग हुई। हालांकि इसका कोई लाभ नहीं हुआ। ट्रेड यूनियन नेता अपनी बात पर अड़े रहे।


वार्ता में भारत सरकार की ओर से कोयला मंत्री प्रहलाद जोशी, कोयला सचिव अनिल जैन, कोल इंडिया के चेयरमैन प्रमोद अग्रवाल, कार्मिक निदेशक आरपी श्रीवास्तव और कोयला मंत्रालय के अन्य अधिकारी उपस्थित थे। वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए भारतीय मजदूर संघ के डॉ. बीके राय, एचएमएस के नाथूलाल पांडेय, सीटू के डीडी रामानंदन व एटक के रामेंद्र कुमार भी बैठक में शामिल हुए। बैठक में कोयला मंत्री ने कहा कि सरकार की नीति कोल इंडिया को मजबूत करने की है। देश में कोयले की जरूरत को पूरा करने और आयात कम करने के लिए सरकार ने कॉमर्शियल माइनिंग की नीति अपनाई है। मंत्री ने अनुरोध किया कि कोरोना संकट और देश की खराब आर्थिक हालत को देखते हुए हड़ताल वापस ली जानी चाहिए।

कॉमर्शियल माइनिंग वापस लेने पर अड़े मजदूर नेता

ट्रेड यूनियनों की ओर से कहा गया कि सरकार कोयला उद्योग को फिर से राष्ट्रीयकृत के पहले की स्थिति में ले जाना चाहती है। यह कोयला मजदूरों को मंजूर नहीं। जब तक सरकार कॉमर्शियल माइनिंग की नीति को वापस नहीं लेती हड़ताल वापस नहीं होगी। यह भी कहा कि प्रमाणित हो गया है कि कॉमर्शियल माइनिंग से देश में कोयले का उत्पादन नहीं बढ़ाया जा सकता। ट्रेड यूनियनों की ओर से यह तर्क दिया गया कि 2015 से अबतक 112 कोल ब्लॉक सरकार आवंटित कर चुकी है। ये सभी ब्लॉक मिलकर अबतक केवल लगभग 35 मिलियन टन का उत्पादन कर पा रहे हैं। कोयला मजदूर कॉमर्शियल माइनिंग की नीति के खिलाफ  आक्रोशित हैं। इसके साथ ही वार्ता समाप्त हो गई। सभी श्रमिक नेताओं ने कोयला मजदूरों से तीन दिन की हड़ताल को ऐतिहासिक रूप से सफल बनाने का आह्वान किया है।

Posted By: Mritunjay

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