धनबाद, जेएनएन। दो साल पहले जिन कम्युनिटी डॉक्टरों को आइएमए ने अयोग्य करार दिया था, उन्हीं हाथों से सरकार मरीजों का इलाज कराने जा रही है। मंगलवार को 12 कम्युनिटी डॉक्टर की ज्वाइनिंग भी करा दी गई। हैरानी की बात तो यह है कि अब आइएमए भी न जाने किस मजबूरी में स्वास्थ्य जैसे मसले पर शांत है।

फिलहाल, बता दें कि जिले में 51 कम्युनिटी डॉक्टरों की तैनाती सरकार ने की है। शहरी इलाकों में यह वेलनेस सेंटर पर सेवा देंगे। स्वास्थ्य केंद्रों पर एमबीबीएस डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए सिविल सर्जन ने 36 कम्युनिटी डॉक्टर मांगे थे। इसके बाद मुख्यालय ने 51 कम्यूनिटी डॉक्टरों की लिस्ट भेज दी है। धनबाद के 55 स्वास्थ्य केंद्रों (अब वेलनेस सेंटर) में कम्युनिटी डॉक्टर सेवाएं देंगे। 

आइएमए ने कहा था नहीं कर सकते हैं इलाज

सनद रहे कम्युनिटी डॉक्टरों को लेकर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आइएमए)ने कई बार सरकार का विरोध किया था। आइएमए का कहना कि इंटर पढऩे के बाद बीएससी (कम्यूनिटी मेडिसिन) करा कर सरकार डॉक्टर बना रही है। ऐसे लोग मरीजों का इलाज नहीं कर सकते हैं। इसे लेकर काफी हंगामा भी हुआ था। हालांकि सरकार का मानना है कि यह कम्यूनिटी डॉक्टर को प्राथमिक इलाज का प्रशिक्षण दिया गया है। इसके बाद यह मरीजों को बड़े सरकारी अस्पताल रेफर कर देंगे। 

डॉक्टरों की कमी पूरा करना की योजना 

कम्युनिटी डॉक्टर के पीछे सरकार डॉक्टरों की कमी बता रही है। कई स्वास्थ्य केंद्र ऐसे हैं, जो लंबे समय से डॉक्टरों के इंतजार में बंद है। ऐसे चिकित्सकों के आने के बाद सेवा बहाल हो पायेगी। 

मरीजों की जान लेने का काम कर रही सरकार : आइएमए 

आइएमए के सचिव डॉ सुशील कुमार कहते हैं ब्रिज कोर्स (कम्यूनिटी मेडिसिन) करवा कर सरकार गरीब मरीजों की जान लेने का काम कर रही है। एमबीबीएस की पढ़ाई साढ़े पांच वर्ष की होती है। लेकिन बीएससी कम्युनिटी मेडिसिन तीन वर्ष में पूरी हो जाती है। सरकार को चाहिए कि ब्रिज कोर्स करने वाले इन लोगों के एमबीबीएस की कोर्स करवा दी जाये। 

Posted By: Mritunjay

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