देवघर : बाबा बैद्यनाथ की नगरी देवघर में हर समय भक्तों की चहलकदमी होते रहती है। अब जबकि ठंड धीरे-धीरे परवान चढ़ने लगा है तो लोगों के चाय की तलब भी बढ़ गई है। शनिवार को मानसरोवर स्थित पांडेय टी स्टॉल पर सुबह की ठंडी हवा व गुनगुनी धूप के बीच चाय का मजा लेते कई लोग चुनावी चर्चा में मशगूल थे। यहां चाय की घुट अंदर करते हुए ऋषभ चौरसिया कहते हैं कि देवघर की मुख्य समस्या पेयजल है, पांच साल में कोई ठोस व्यवस्था नहीं हो सका। पेयजल संकट से निपटना किसी की बस की बात नहीं लग रही है। जनप्रतिनिधि सिर्फ आश्वासन देते हैं, आज तक कोई ठोस व्यवस्था नहीं हो सका। वैसे जनप्रतिनिधि को चुनना जरूरी है, जो इस समस्या को लेकर गंभीर हो। पास में खड़े जयदेव मिश्र कहते हैं कि देवघर का समग्र विकास करने वाले प्रत्याशी को अहमियत दिया जाना चाहिए। तभी चर्चा के बीच में पवन कुमार टपक जाते हैं और कहते हैं कि चुनाव में मतदान काफी सोच समझकर देना होगा। दलगत भावना के अलावा स्थानीय व क्षेत्रीय परिस्थितियां भी बहुत मायने रखती हैं। दलगत राजनीति से ऊपर उठकर विकास की सोच रखने वाला जनप्रतिनिधि ही सबके साथ न्याय कर सकता है। अवधेश केसरी कहते हैं कि वह देवघर के मतदाता तो नहीं हैं, लेकिन अक्सर देवघर आना-जाना करते हैं। इस चुनाव से बहुत सारी उम्मीदें हैं। चेहरा के बजाय काम को प्राथमिकता दिया जाना चाहिए। सनातन मिश्र कहते हैं कि चुनाव से पहले सभी नेता वादा तो करते हैं मगर पूरा नहीं कर पाते हैं। ऐसे नेताओं को जनता पहचान गई हैं और इस चुनाव में उनको अपने वोट से जवाब जरूर देंगी। इधर बहस की गर्मी इस कदर बढ़ चली की समय की सुई कब आगे बढ़ गई किसी को पता भी नहीं चला। अचानक घड़ी पर निगाह पड़ते ही शिवम कुमार कहते हैं काकी अब चलते हैं, अपने-अपने काम पर चलिए। बातों ही बातों में बहुत समय बीत गया।

Posted By: Jagran

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