देवघर : फर्जी सर्टिफिकेट के सहारे मरीजों का आर्थिक दोहन करने वाले चिकित्सक डॉ. दिवाकर प्रसाद के खिलाफ प्राथमिकी कराने का निर्देश सिविल सर्जन डॉ. कृष्ण कुमार ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जसीडीह के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को दिया है। सीएस ने अपने आदेश में चिकित्सा प्रभारी को पत्र प्राप्ति के 24 घंटे के अंदर संबंधित थाना में प्राथमिकी दर्ज कराने का निर्देश दिया है।

सीएस ने पत्र में कहा है कि जसीडीह निवासी नीरज कुमार दुबे व अन्य का हस्ताक्षरयुक्त आवेदन विभाग को मिला था। इसमें कहा गया कि डॉ. प्रसाद फर्जी सर्टिफिकेट पर अवैध रूप से मरीजों का इलाज कर रहा है। इलाज के नाम पर डॉ. प्रसाद मरीजों का आर्थिक दोहन कर रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए सीएस ने दो सदस्यीय जांच टीम बनाई। इसमें जिला कुष्ठ निवारण पदाधिकारी डॉ. रंजन सिन्हा व प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, जसीडीह डॉ. अवधेश कुमार ¨सह को शामिल किया गया। जांच टीम को डॉ. प्रसाद के सर्टिफिकेट की जांच करने का निर्देश दिया गया। क्या है जांच रिपोर्ट में : टीम द्वारा जसीडीह स्थित शिव मेडिकल स्थित डॉ. प्रसाद की क्लीनिक की जांच की। जांच रिपोर्ट के अनुसार इस क्लीनिक में डॉ. दिवाकर प्रसाद एमबीबीएस (एवाई) व एमडी (सीएम) लिखा था। टीम ने शिव मेडिकल स्थित क्लिनिक को क्लीनिकल इस्टैब्लिशमेंट एक्ट 2010 में रजिस्टर्ड नहीं पाया गया। वहीं सर्टिफिकेट की जांच करने पर टीम ने एमसीआइ एक्ट 1956 में वर्णित मान्यताप्राप्त योग्यता की श्रेणी में नहीं पाया। डॉ. प्रसाद की योग्यता गैर मान्यताप्राप्त संस्था डॉ. बीसी रॉय मेमोरियल मेडिकल रिसर्च सेंटर द्वारा निर्गत एमबीबीएस (एएम) है, जो मान्यता प्राप्त नहीं है। डॉ. प्रसाद के पिछले तीन माह से क्लीनिक में नहीं बैठने की जानकारी टीम को मिली। आसपास के लोगों से पूछताछ में डॉ. प्रसाद द्वारा इलाज करने व मरीजों का आर्थिक दोहन करने की बात की जानकारी टीम को मिली। टीम ने जांच रिपोर्ट में डॉ. प्रसाद पर कार्रवाई की अनुशंसा की थी। इसके आधार पर कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है।

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