चट्टानें काटकर बिछाई पटरियां: जसीडीह रेल बाईपास उद्घाटन को तैयार, कोलकाता रूट की ट्रेनों को मिलेगी रफ्तार
जसीडीह रेल बाईपास का रेल सुरक्षा आयुक्त द्वारा निरीक्षण पूरा हो गया है, जिसमें कोई कमी नहीं पाई गई है। ...और पढ़ें

जसीडीह रेल बाईपास का सीआरएस निरीक्षण संपन्न, जल्द होगा उद्घाटन (AI Generated Image)
HighLights
जसीडीह रेल बाईपास का रेल सुरक्षा आयुक्त ने किया निरीक्षण।
निरीक्षण में कोई कमी नहीं मिली, जल्द मिलेगी एनओसी।
नई लाइन से ट्रेनों का परिचालन समय डेढ़ घंटा बचेगा।
जागरण संवाददाता, देवघर। पटना-हावड़ा रेलखंड पर जसीडीह रेल बाईपास का काम पूरा हो चुका है। लगभग पांच किमी के नए रेल लाइन का गुरूवार को रेल सुरक्षा आयुक्त गुरू प्रकाश ने अपनी पूरी टीम के साथ कुमराबाद रोहिणी से देवघर लिंक केबिन तक मोटर ट्राली से निरीक्षण किया। केबिन के निकट गेज की भी मापी कराया। जगह-जगह ट्राली से उतर कर कार्यों को देखा और परखा।
इसके बाद देवघर लिंक केबिन से रोहिणी के बीच स्पीड ट्रायल भी हुआ, लेकिन उसमें कोई कमियां नहीं पायी गयी है। उनके साथ पूर्व रेलवे के मुख्य प्रशासनिक पदाधिकारी कंस्ट्रक्शन मनोज खां और डीआरएम संघर्ष मौर्य मुख्य रूप से थे।
सीआरएस से एक-दो दिन में एनओसी मिलने के बाद उदघाटन की तारीख तय होगी। मुख्य प्रशासनिक पदाधिकारी कंस्ट्रक्शन मनोज खां ने बताया कि सीआरएस ने निरीक्षण कर निर्माण कार्य की गुणवत्ता और कार्य की सराहना की। कहा कि एक दो दिन में सीआरएस का रिपोर्ट आ जाने की पूरी उम्मीद है।
बताया गया कि परियोजना के निर्माण के दौरान लगभग तीन सौ पेड़ों की कटाई करनी पड़ी थी। इसके एवज में रेलवे द्वारा राज्य सरकार को पांच गुणा पौधा लगाने के लिए राशि का भुगतान किया गया है, ताकि निर्धारित संख्या से पांच गुणा पौधा लगाने का काम किया गया है। इसके अलावा रेलवे की ओर से भी करीब 1500 पौधे लगा रहे हैं।
मुख्य प्रशासनिक पदाधिकारी ने बताया कि नई रेल लाइन के निर्माण में सबसे बड़ी चुनौती चट्टानों को काटना था। सामान्य मशीनों से पत्थरों को काटना संभव नहीं हो पा रहा था, जिसके बाद विशेष केमिकल तकनीक की मदद से चट्टानों को काटकर हटाया गया।
इसके अलावा कंक्रीट की मजबूत दीवार का निर्माण भी चुनौतीपूर्ण था, जिसे रेलवे के इंजीनियरों ने बेहतर तरीके से पूरा किया।
जानकारी हो कि बाईपास लाइन के चालू होने से ट्रेनों के परिचालन में काफी सुविधा होगी। वर्तमान में कोलकाता सहित अन्य प्रमुख स्थानों से आने वाली ट्रेनों को जसीडीह में इंजन बदलने में करीब एक से डेढ़ घंटे तक का समय लग जाता है।
नई लाइन शुरू होने के बाद इंजन बदलने की आवश्यकता नहीं होगी, जिससे ट्रेनों के परिचालन समय में सुधार होगा और यात्रियों को लंबे समय तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा। निरीक्षण के दौरान रेलवे के दर्जनों अधिकारी एवं अभियंता मौजूद थे।
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