संवाद सहयोगी, सारठ (देवघर) : कृषि पशुपालन एवं सहकारिता विभाग (गव्य विकास) द्वारा गांव से गरीबी दूर करने के लिए प्रत्येक पंचायत में गरीब परिवारों को दुधारू मवेशी दिया गया था। लेकिन विभागीय पदाधिकारियों की निष्क्रियता के कारण यह योजना कृषि मंत्री के क्षेत्र में ही दम तोड़ रही है। कागज पर यह योजना जितनी कागगर दिख रही, वास्तविकता वैसी नहीं है।

योजना में हो रही गड़बड़ी पर मंगलवार को दैनिक जागरण में खबर प्रकाशित होने के बाद क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। ¨डडाकोली पंचायत में योजनाओं की पड़ताल की गई तो स्थिति भयावह दिखी। परत दर परत खामियां सामने आने लगी।

इस पंचायत के दलित टोला चरकमारा में 2017 में 31 गाय का वितरण किया गया। अब पांच घर को छोड़ किसी के घर में गाय नहीं है। चार के अलावा किसी लाभुक ने पशुशाला भी नहीं बनाया है। दो लाभुक ने कहा कि गाय रखने में दिक्कत हो रही थी तो संबंधी के घर भेज दिया। अधिकांश ने कहा कि तीन महीने के भीतर ही गाय मर गई। सवाल यह कि सभी गायों का बीमा होता है। इसके बदले 4460 रुपये का प्रीमियम सरकार देती है। अगर गाय मर गई तो बीमा कंपनी, लाभुक एवं सरकारी तंत्र में किसी ने दिलचस्पी क्यों नहीं दिखायी। पंचायत में इस बात की चर्चा है अधिकांश गाय मरी नहीं बल्कि बेच दी गयी है। दरअसल बेचने की ही शिकायत कृषि मंत्री के पास पहुंची थी। इसके बाद मामला गरमा गया। मंत्री ने मामले की जांच कराने का आदेश दे दिया है। हैरानी इस बात की है कि एक कविता देवी के बदले दूसरी कविता को शेड की राशि मिल गई, जिसका आज तक निपटारा नहीं हो सका।

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केस स्टडी -एक

देवकी देवी पति नरेश दास ने बताया कि एक साल पूर्व एक गाय मिली था। लेकिन तीन माह बाद ही बीमारी से गाय मर गयी। एचडीएफसी बैक खाता में शेड व खाद्य सामग्री के लिए नौ हजार रुपये आये थे। ¨डडाकोली के मुखिया पति का सीएसपी सारठ में संचालित है वहीं से पैसा उठाये थे। संजय मंडल ने छह हजार रुपये ही दिया। कागज पर अंगूठा भी लगवाया। शेष राशि की मांग करने पर कहा कि इतना खर्चा पानी लगेगा। देवकी ने बताया कि शेड का निर्माण नहीं करा पाए हैं।

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केस स्टडी दो

लाभुक अंजू देवी पति ठाकुर दास ने बताया कि उन्हें एक साल पहले एक गाय मिला था। लेकिन कुछ दिन के बाद गाय की मौत बीमारी से हो गई। शेड निर्माण का भुगतान सीएसपी से हुआ है। जिसमें नौ हजार के जगह पर सात हजार ही दिया गया।

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केस स्टडी-तीन

कविता देवी के घर गाय दिखी, लेकिन शेड नहीं था। कहा गया कि पैसा नहीं मिला। वार्ड सदस्य कारू दास जब जांच करवाया तो पता चला कि उसके बगल के कविता देवी पति प्रमोद दास के खाते में गलती से राशि भेज दी गई है। इसको लेकर कविता ने कई बार मुखिया व अधिकारियों के पास चक्कर लगाया। तकनीकी पदाधिकारी त्रिशुल ¨सह एवं डीडीओ से भी शिकायत करने पर केवल आश्वासन मिला।

केस स्टडी-चार

राधिका देवी ने बताया कि गाय तो मिला था लेकिन बीमारी से मौत हो गई। एसबीआइ से शेड एवं खाद्य सामग्री के एवज में नौ हजार मिला था। किसी का नाम लिये बिना कहा कि बार-बार मांगने पर एक हजार रूपया खर्चा के नाम पर दिये है। शेड का निर्माण नहीं कराए हैं। केस स्टडी-पांच

लाभुक पातो देव्या की बहू ललिता देवी ने बताया कि उनकी सास बेटी के घर गई है। उसने बताया कि एक वर्ष पहले एक गाय योजना से मिली थी। सास ने अपनी बेटी के घर गाय को भेज दिया है। शेड नहीं बनवाए हैं।

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केस स्टडी -छह

बिमला देवी के घर में गाय बंधी थी। वह भी योजना के तहत मिले राशि से बनी शेड में। मितन दास ने बताया कि उनसे भी पैसा मांगा जा रहा था, लेकिन उसने किसी को भी एक पैसा नहीं दिया है।

केस स्टडी -सात

लाभुक सविता देवी ने बताया कि दिसंबर में ही गाय मर गयी थी। शेड के लिए सीएसपी से पैसा की निकासी की थी। इसमें बिचौलिया ने तीन हजार रुपये ले लिया, ईंट तो मंगवाए हैं, लेकिन अभी तक शेड नहीं बनवाए हैं।

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केस स्टडी-आठ

विनिता देवी ने बताया कि योजना के तहत उन्हें गाय मिली थी। लेकिन बीमारी से मर गई। शेड का पैसा 9 हजार सीएसपी से मिला। दो हजार की मांग की जा रहा थी। कहा गया कि सबसे ले रहे हैं। लेकिन, जब कहा कि मंत्री जी को फोन लगाते हैं तब जाकर चुप हुआ। शेड का भी निर्माण कराया गया है।

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आरोपों को गलत बताया : इस संबंध में मुखिया पति सह सीएसपी संचालक संजय मंडल का कहना है कि किसी से भी एक पैसा नहीं लिया है। लाभुक बेवजह आरोप लगा रहे हैं। शिकायत मिली थी कि कुछ बिचौलिया उनके नाम पर अवैध वसूली कर रहा है। लाभुकों को इसके लिए आगाह भी किया गया था। शेड क्यों नहीं बना इसकी जांच कर विभाग करवाई करे।

Posted By: Jagran