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अमेरिका में चमके देवघर के हर्षित, IEEE CICC-2026 में मिला आउटस्टैंडिंग स्टूडेंट पेपर अवार्ड

Published: Mon, 14 Sep 2026 04:06 PM (IST)

देवघर के हर्षित नमन को ब्रेन-कंप्यूटर तकनीक पर उनके शोध के लिए प्रतिष्ठित IEEE पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

हर्षित नमन। (फाइल फोटो)

हर्षित नमन। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. हर्षित नमन को प्रतिष्ठित IEEE पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

  2. ब्रेन-कंप्यूटर तकनीक पर कम ऊर्जा वाली चिप विकसित की।

  3. यह शोध न्यूरल इम्प्लांट और चिकित्सा उपकरणों में सहायक।

जागरण संवाददाता, देवघर। देवघर की प्रतिभा अब ना केवल राष्ट्रीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच में साबित कर रही है। कुछ ऐसा ही कर दिखा देवघर के लाल हर्षित नमन ने। 

प्रतिभा के धनी नमन को उनके ब्रेन-कंप्यूटर तकनीक पर किए गए शोध के लिए प्रतिष्ठित आइईईई पुरस्कार से सम्मानित किया गया। अंतरराष्ट्रीय पटल पर सम्मानित होकर ना केवल जिला बल्कि झारखंड राज्य को भी गौरवान्वित कराया है।

पर्ड्यू यूनिवर्सिटी इलेक्ट्रिकल एंड कंप्यूटर इंजीनियरिंग के पीएचडी शोधार्थी हर्षित को बेहद कम ऊर्जा में मस्तिष्क से हाई-स्पीड डेटा भेजने वाली चिप आइईईई सीआइसीसी (कस्टम इंटीग्रेटेड सर्किट्स कॉन्फ्रेंस) -2026 के लिए उन्हें आउटस्टैंडिंग स्टूडेंट पेपर अवार्ड से सम्मानित किया गया।

सीआइसीसी इंटीग्रेटेड सर्किट और चिप डिजाइन के क्षेत्र के प्रमुख अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में शामिल है। हर्षित ने शोध पर्ड्यू यूनिवर्सिटी की स्पार्क लैब में प्रोफेसर श्रेयास सेन के मार्गदर्शन में कर रहे हैं।

ब्रेन इम्प्लांट व न्यूरो-टेक्नोलॉजी के लिए शोध का होगा उपयोग

हर्षित और उनकी टीम ने अत्यंत कम ऊर्जा खपत वाली चिप विकसित की है। यह चिप मस्तिष्क के भीतर से बड़ी मात्रा में डेटा को तेज गति से बाहर भेजने में मदद कर सकती है।

यह तकनीक भविष्य में ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस, न्यूरल इम्प्लांट और अन्य चिकित्सा उपकरणों को अधिक सक्षम बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। इस शोध की खासियत मस्तिष्क के भीतर सिग्नल के व्यवहार को अलग तरीके से समझने में है।

शोधकर्ताओं ने पाया कि मस्तिष्क के ऊतक से गुजरते समय विद्युत संकेत की ताकत काफी कम हो सकती है, लेकिन संकेत का टाइमिंग या समय संबंधी पैटर्न लगभग सुरक्षित रहता है।

इसी विशेषता का लाभ उठाते हुए हर्षित और उनकी टीम ने परंपरागत तरीके से वोल्टेज के स्तर पर सूचना भेजने के बजाय पल्स के समय और अवधि में सूचना को एनकोड करने वाला रिसीवर तैयार किया।

जिससे मस्तिष्क सिग्नल की आवाज को बहुत धीमा कर देता है। लेकिन उसकी लय को लगभग बरकरार रखता है। नई चिप इसी लय को पढ़कर डेटा को पहचानती है।

सिर्फ 53.6 माइक्रो वाट बिजली में 80 एमबीपीएस की रफ्तार

यह चिप अत्याधुनिक 16 नैनो मीटर फिनफेट तकनीक पर बनाई गई है। परीक्षण के दौरान करीब 10 सेंटीमीटर के टिश्यू माडल के पार भी रिसीवर ने 80 मेगा बीट प्रति सेकंड की डेटा दर हासिल की।

जबकि इसकी ऊर्जा खपत केवल 53.6 माइक्रो वाट रही। इसकी ऊर्जा दक्षता 0.67 पिको-जूल प्रति बीट दर्ज की गई। पर्ड्यू के अनुसार, यह मस्तिष्क या शरीर के माध्यम से हाई-स्पीड कम्युनिकेशन के लिए रिपोर्ट किए गए सबसे ऊर्जा-कुशल परिणामों में अग्रणी है।

इसका कम ऊर्जा में काम करना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि शरीर या मस्तिष्क में लगाए जाने वाले इलेक्ट्रानिक इम्प्लांट में अधिक बिजली की खपत से गर्मी उत्पन्न होने का खतरा रहता है।

ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस के लिए खुल सकते हैं नए रास्ते

वर्तमान समय में वैज्ञानिक ऐसी तकनीकों पर काम कर रहे है। जिनमें मस्तिष्क में लगाए गए छोटे इलेक्ट्रानिक उपकरण न्यूरान्स से डेटा रिकॉर्ड कर सकें। लेकिन अधिक डेटा रिकार्ड को शरीर के बाहर भेजना बड़ी चुनौती है।

शोध इसी समस्या का समाधान खोजने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। भविष्य में ऐसी तकनीक का इस्तेमाल बोलने या चलने-फिरने में सहायता देने वाले न्यूरो-प्रोस्थेटिक उपकरण, मस्तिष्क संबंधी शोध सहित पार्किंसंस व एपिलेप्सी (मस्तिष्क व तंत्रिका तंत्र ) से जुड़ी बीमारियों के लिए विकसित की जा रही । इसे क्लोजड-लूप नूरोमाड्यूलाइजेशन प्रणालियों में किया जा सकता है।

बीआइटी मेसरा से की है बीटेक की पढ़ाई

हर्षित ने वर्ष 2022 में बीआइटी मेसरा से इलेक्ट्रानिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में बीटेक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद वह पर्ड्यू यूनिवर्सिटी में उच्च शिक्षा और शोध के लिए अमेरिका गए।

वर्तमान में उनका शोध मुख्य रूप से एनालाग एवं मिक्स्ड-सिग्नल इंटीग्रेटेड सर्किट, ऊर्जा-कुशल कंप्यूटिंग और बायोमेडिकल कम्युनिकेशन सिस्टम पर केंद्रित है।

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