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झारखंड में मजदूर का बेटा बना साइबर ठगों का गुरु, करोड़ों की लग्जरी लाइफ; कई शहरों में संपत्ति

Published: Wed, 02 Sep 2026 02:20 PM (IST)

देवघर साइबर पुलिस ने छह साइबर ठगों को गिरफ्तार किया है, जिसमें मजदूर का बेटा मनीष कुमार भी शामिल है, जो साइबर ठगी का गुरु बन गया था।

मजदूर का बेटा बन बैठा साइबर ठगों का गुरु, BPL परिवार से करोड़ों की लग्जरी लाइफ (AI Generated Image)

मजदूर का बेटा बन बैठा साइबर ठगों का गुरु, BPL परिवार से करोड़ों की लग्जरी लाइफ (AI Generated Image)

HighLights

  1. देवघर पुलिस ने छह साइबर ठगों को किया गिरफ्तार।

  2. मजदूर का बेटा मनीष बना साइबर ठगी का गुरु।

  3. फर्जी एपीके फाइल से करता था लोगों को ठगी।

कंचन सौरभ मिश्रा, देवघर। साइबर थाना की पुलिस ने मंगलवार को आधा दर्जन साइबर ठगी के आरोपितों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। इन आरोपितों में जिले के सारठ थाना क्षेत्र के पथरड्डा ओपी क्षेत्र के उबिया गांव निवासी मनीष कुमार भी शामिल है। मनीष के बारे में पुलिस के अनुसंधान व सूत्रों से मिली जानकारी हैरान करने वाली है।

मिली जानकारी के अनुसार, पहले उसके पिता मजदूरी करते थे। खेती के लिए उनके पास बहुत कम जमीन थी। किसी तरह परिवार का गुजर बसर चलता था। उसका परिवार बीपीएल की श्रेणी में आता था।

इसके बाद मनीष ने करीब सात-आठ वर्ष पहले साइबर ठगी के धंधे में अपना पांव रखा। उसके बाद देखते ही देखते मजदूर का बेटा मनीष साइबर ठगों का गुरु बन बैठा।

आज उसके पास काफी संपत्ति है। गांव में अच्छा घर है। उसमें सुख सुविधा का सारा संसाधन उपलब्ध है। सूत्रों के मुताबिक देवघर, दुमका, दुर्गापुर, कोलकाता में उसकी संपत्ति है। उसके पास चार चक्का व दो चक्का वाहन है। आज वह खाकपति से करोड़पति बन बैठा है। वह अपना जीवन किसी राजा की तरह जीने लगा है।

फर्जी एपीके फाइल बनाने का है एक्सपर्ट

मनीष के बारे में बताया जाता है कि वह फर्जी एपीके फाइल बनाने का एक्सपर्ट है। उसने पहले खुद एपीके फाइल बनाने का गुर सीखा। उसके बाद उसने अपने साथ और युवाओं को जोड़ने का काम किया। उसके साथ 60 से अधिक युवा जुड़े हुए हैं।

ये युवक जिले के सारठ, पथरड्डा, पथरौल, मधुपुर थाना क्षेत्र के विभिन्न गांव के रहने वाले हैं। मनीष उन लोगों को फर्जी एपीके फाइल व आम लोगों का मोबाइल नंबर का लिस्ट उपलब्ध कराता है। उसके शागिर्द उन नंबरों पर फर्जी एपीके फाइल भेजकर लोगों का मोबाइल फोन हैक कर ठगी करते हैं।

मनीष को ठगी की कमाई का एक हिस्सा इन युवकों से कमिशन के तौर पर मिलता है। इस तरह से अपने चेलों के साथ मिलकर मनीष दिनों दिन मालामाल होता चला गया।

बड़े शहरों के हाेटल में बैठकर चलाता है धंधा

सूत्रों के मुताबिक, मनीष गांव व इलाके में बहुत कम नजर आता था। वह और उसके साथी कोलकाता व अन्य बड़े शहरों के महंगे होटलों के कमरे में बैठकर साइबर ठगी का धंधा संचालित करते हैं। पुलिस को उसके उपर काफी दिनों से नजर थी, लेकिन वह अब तक पुलिस को चकमा देता आ रहा था।

पता चला है कि वह पहले इलाके के युवाओं के पीछे पैसा खर्च करता है। उसके बाद उन्हें बैठे-बैठे आसानी से पैसा कमाने के लिए प्रेरित करता है। युवक जब उसकी जाल में फंस जाते हैं तो उन्हें साइबर ठगी का गुर सिखाता है। उसके बाद उन युवकों से अपने लिए काम करता है।

ऐसे में उसकी गिरफ्तारी से पुलिस को एक बड़े साइबर ठगी गिरोह के नेटवर्क को तोड़ने में मदद मिलेगी। पुलिस को उसके नेटवर्क में शामिल अन्य युवकों की भी तलाश है।

अनजान लिंक पर न करें क्लिक

साइबर थाना की पुलिस लगातार लोगों से आग्रह की रही है कि लोग अपने मोबाइल फोन के इस्तेमाल के दौरान सतर्क रहें। अपने बैंक खाता और ओटीपी किसी अनजान व्यक्ति से साझा नहीं करें।

वहीं, अगर कोई अनजान लिंक आता है तो उसपर क्लिक न करें। उसे खोलने पर उनका मोबाइल फोन हैक हो सकता है।

मोबाइल फोन हैक करने के बाद साइबर ठग उनके बैंक खाता और ओटीपी की जानकारी हासिल कर लेंगे। उसके बाद खाता से पैसे की अवैध निकासी कर ली जाएगी।

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