जामताड़ा के बाद अब देवघर बना साइबर ठगों का गढ़, गांव-गांव फैला ठगी का धंधा; बंगाल पुलिस ने 11 को दबोचा
Deoghar अब जामताड़ा की तरह साइबर ठगी का गढ़ बन गया है, जहां युवा आसानी से पैसा कमाने के लिए इस धंधे में शामिल हो रहे हैं।

देवघर में साइबर अपराधियों की जांच करती पश्चिम बंगाल पुलिस। (प्रतीकात्मक फोटो)
कंचन सौरभ मिश्रा, देवघर। यूं तो झारखंड के देवघर की पहचान बाबा बैद्यनाथ मंदिर से है। इसके पड़ोस में जामताड़ा है। हम सब जानते हैं कि जामताड़ा की पहचान देश में किस लिए है। इसकी पहचान साइबर क्राइम से है। जब भी कहीं साइबर क्राइम होता है तो सबसे पहले ध्यान जामताड़ा पर जाता है। हालांकि, अब देवघर भी साइबर ठगों का गढ़ बन चुका है।
जामताड़ा से प्रभावित होकर देवघर में साइबर ठगी का धंधा गांव-गांव फैल चुका है। आसानी से पैसा कमाने के चक्कर में यहां के युवा व किशोर इस अवैध धंधे के दलदल में धंसते जा रहे हैं। देवघर पुलिस तो लगातार कार्रवाई कर रही है, दूसरे प्रदेश की पुलिस टीम भी इन साइबर ठगों की तलाश में देवघर पहुंच रही है।
इस क्रम में पिछले दिनों बंगाल की पुलिस टीम यहां पहुंची थी। यह टीम साइबर ठग गिरोह के सरगना अहमद अंसारी व उसके साथियों की तलाश में आई थी। बंगाल पुलिस से पता चला कि यहां के साइबर ठग वहां के होटलों में रहकर साइबर ठगी का धंधा संचालित करते हैं।
इसी क्रम में वहां एक होटल से पुलिस ने 11 साइबर ठगी के आरोपितों को पकड़ा था। उनकी निशानदेही पर आगे छापेमारी की जा रही है। बंगाल पुलिस की जांच में पता चला है कि अहमद साइबर ठगी गिरोह का सरगना है। वह आइटी का काफी जानकार है। वह फर्जी एपीके फाइल बनाने का एक्सपर्ट है। उसके साथ कई और युवक काम करते हैं।
अहमद इन युवकों को साइबर ठगी के लिए एपीके फाइल उपलब्ध कराता है। वहीं उन्हें फोन करने के लिए लोगों का फोन नंबर भी उपलब्ध कराता है। ठगी के पैसे का एक हिस्सा उसे मिलता है।
जानकार बताते हैं कि देवघर पुलिस ने जब यहां के साइबर ठगों पर अपनी दबिश बना दी तो ये साइबर ठग यहां से बाहर रांची, धनबाद, बंगाल में जाकर होटल व किराए पर मकान लेकर साइबर ठगी का अवैध धंधा संचालित करने लगे। इन्हीं में से कुछ साइबर ठग बंगाल के होटल से पकड़े गए हैं।
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बंगाल के बाद छत्तीसगढ़ राज्य की चार सदस्यीय पुलिस टीम सारठ थाना पहुंची और सुखजोरा गांव निवासी पंकज रवानी व प्रमोद कुमार रवानी का संपत्ति का ब्योरा सारठ सीओ से मांगा है। बताया जाता है कि ये टीम लाखों की साइबर ठगी के मामले की जांच के लिए पहुंची है।
संपत्ति का पता लगाने के साथ ही दोनों की तलाश भी की जा रही है। बताया जाता है कि साइबर ठगी के धंधे से इन लोगों ने अकूत संपत्ति जमा की है। इसकी भनक छत्तीशगढ़ की पुलिस को लगी है और इसी सिलसिले में इन दाेनों की तलाश की जा रही है। साथ ही उनकी संपत्ति की भी जांच की जा रही है।
सुखजोरा गांव सुर्खियों में रहा है। कई राज्य की पुलिस यहां पहले भी छापेमारी कर चुकी है। इस गांव में साइबर ठगों को गिरफ्तार करने गयी पुलिस पर हमला भी हो चुका है। यहां के एक दर्जन युवक साइबर ठगी के धंधे में गिरफ्तार होकर जेल भी जा चुके हैं।
सुखजोरा गांव पुलिस के साइबर ठगी के नक्शे में अहम स्थान रखता है। यहां के कुछ ग्रामीण दबे जुबान कहते हैं कि पहले इस गांव की जो छवि थी उसे इन साइबर ठगों ने धूमिल कर दिया है।
