जागरण संवाददाता, देवघर : शिक्षकों के ई-सेवा पुस्तिका के अद्यतन के नाम पर अवैध वसूली को लेकर झारखंड प्रगतिशील शिक्षक संघ में रोष व्याप्त है। इसको लेकर शनिवार को संघ का एक प्रतिनिधिमंडल उपायुक्त से मिलने कार्यालय पहुंचा। संघ की ओर से अवैध वसूली करने वाले कर्मी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई।

ज्ञापन में संघ का कहना है कि ई-सेवा पुस्तिका के अद्यतन को लेकर शिक्षकों की जबावदेही नहीं है, बावजूद डीएसई कार्यालय की ओर से मनमाना रवैया अपनाते हुए सोहराय, मकर संक्रांति व कोविड काल के दौरान शिक्षकों को वेतन से वंचित कर दिया गया है। जो अनुचित है। शिक्षा सचिव ने भी समीक्षा बैठक के दौरान शिक्षकों को समय पर वेतन दिए जाने का आदेश दिया था। लेकिन, डीएसई कार्यालय सचिव के आदेश की भी कोई परवाह नहीं है। तत्कालीन उपायुक्त नैंनी सहाय ने भी ई-पुस्तिका अद्यतन के लिए अंचल व प्रखंड कार्यालय के कंप्यूटर आपरेटर से कराने का निर्देश दिया था। साथ ही इस काम को साइबर कैफे से नहीं कराने का निर्देश दिया था। लेकिन आदेश की अनदेखी की गई।

ई-पुस्तिका के अद्यतन के नाम पर शिक्षकों से अवैध वसूली की जा रही है। वेतन भुगतान पर रोक दिए जाने पर शिक्षक विवश होकर रिश्वत देने को बाध्य हो रहे हैं। संघ का कहना है कि डीएसई कार्यालय का कर्मी नहीं होने पर भी उसे गुप्त वेरिफिकेशन कोड उपलब्ध कराया गया है। राजा बगिचा से अवैध वसूली कर ई-सेवा पुस्तिका सहित पेंशन आनलाइन व अन्य विभिन्न कार्यों का संपादन किया जा रहा है। ई-सेवा पुस्तिका का अद्यतन नहीं करने के पीछे लगभग दो हजार शिक्षकों से अवैध वसूली करना मुख्य उद्देश्य है। संघ ने ज्ञापन के माध्यम से उपायुक्त से अवैध वसूली में लिप्त कर्मी के खिलाफ कार्रवाई करने व शिक्षकों का वेतन भुगतान कराए जाने की मांग की है।

प्रतिनिधिमंडल में शामिल संघ के अध्यक्ष स्कंद कुमार, उपाध्यक्ष राजेश तिवारी, सिकंदर दास, चंदन कुमार दास, कोषाध्यक्ष उमेश प्रसाद यादव, सचिव प्रभु दयाल महतो, प्रदीप कुमार, अलखनाथ विश्वकर्मा, महादेव गुप्ता, दिलीप सिंह, चंद्रकांत वरनवाल शामिल थे।

Edited By: Jagran