प्रदीप सिंह, देवघर : बाबा मंदिर के आसपास की गलियों जिन्हें लेन के नाम जाना जाता है, पर गौर करें तो शायद बृज बिहारी लेन इन सभी गलियों में सबसे अलग है।

तकरीबन 15 फीट चौड़े सड़क के किनारे बसा यह लेन निश्चित रूप से यह बताने के लिए पर्याप्त है कि इसे बसाने वाला तत्कालीन नगरपालिका में किसी अच्छे ओहदे पर होगा। ब्रिटिश हुकूमत में भी यह गली काफी विकसित थी। आज वीआईपी को पूजा कराने के लिए टावर से जलसार रोड होते हुए प्रशासनिक भवन ले जाया जाता है, लेकिन एक समय था कि वीआईपी को बाबा मंदिर ले जाने के लिए बृज बिहारी लेन का प्रयोग होता था और इसे वीआईपी गली के नाम से जाना जाता था। पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंदिरा गांधी ने भी इसी गली से बाबा मंदिर का सफर तय कर पूजा की थी। बाबा मंदिर के पूरब दरवाजे से इस गली की दूरी महज तीन सौ मीटर जबकि शिवगंगा से चार सौ मीटर है। इस गली में वर्तमान में तकरीबन सौ परिवारों का बसोवास है तथा इस गली का उपयोग पूरी तरह से व्यवसायिक रूप में हो रहा है। बड़े-बड़े होटल व दुकान भी इस गली में है। यहां के रहने वाले मनोज कुमार परिहस्त बताते है कि वर्ष 1935-37 में इस गली को बृज बिहारी प्रसाद ने बसाया था। वह मूल रूप से बिहार के खैरा स्टेट के रहने वाले थे तथा उनके भाई खैरा स्टेट में मैनेजर थे। बृज बिहारी प्रसाद तत्कालीन देवघर नगर पालिका में कार्यपालक पदाधिकारी के पद पर कार्यरत थे, जिसकी हनक इस गली में देखने को मिलती है। मनोज परिहस्त, बृज बिहारी प्रसाद के मकान में ही रहते हैं, जिसे उनके पूर्वजों ने खरीदा था। हालांकि अब बृज बिहारी प्रसाद की कोई भी पीढ़ी यहां रहती हैं। खैरा व गिद्धौर के राजा को यहीं के पंडा पूजा कराते थे।

मनोज परिहस्त के बचपन में इस गली में रोड था। 1980 में पीसीसी हुआ और अब तो पेबर्स लग गए हैं। तत्कालीन गिद्धौर नरेश रामेश्वर सिंह बराबर बाबा मंदिर में पूजा करने आते थे। गिद्धौर से देवघर आने के क्रम में वह दो घोड़ा बदलते थे और यहां पहुंचने के बाद राजा बगीचा में उनका घोड़ा खड़ा रहता था। इस गली के रहने वाले तरुण कुमार चटर्जी बताते हैं कि बुजुर्गो से सुनने को मिलता है कि इस गली को वीआइपी गली के रूप में जाना जाता था। तमाम मंत्री, प्रशासनिक पदाधिकारी सहित अन्य वीआईपी बाबा मंदिर जाने के लिए इसी गली का उपयोग करते थे। बड़े-बुजुर्ग यह भी बताते हैं कि पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंदिरा गांधी भी इसी गली से होकर बाबा मंदिर गई थी। शायद उस समय बाबा मंदिर जाने के लिए एकमात्र गली था कि जिसकी स्थिति अपेक्षाकृत ठीक थी। कन्हैया प्रसाद बताते हैं उनके बचपन में इस गली में इस कदर आबादी नहीं थी, लेकिन जो भी मकान थे पक्के थे। शुरू से रोड की स्थिति अच्छी थी, लेकिन अभी एकमात्र चापाकल के कारण पानी के लिए थोड़ी दिक्कत हो रही है। उन्होंने बताया कि इस चापाकल में नाला का गंदा पानी भी जाता है। सुबह पांच-छह डिब्बा पानी निकालने के बाद यह साफ होता है। वर्तमान में यह चापाकल खराब हो गया है, जिसके कारण पानी के लिए दूर में दूसरे चापाकल पर निर्भर रहना पड़ता है। मुरारी केशरी ने कहा कि यह गली पूर्व से विकसित थी और देवघर नगर निगम बनने के बाद इसका और भी विकास हुआ है। नियमित रूप से जलापूर्ति होती है। हर जगह वेपर लाइट लगा हुआ है। विद्युत तार को भी व्यस्थित तरीके से लगाया गया है।

Posted By: Jagran

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