चतरावासियों की वर्षों पुरानी मांग पूरी, भौराज नदी पर बनेगा ₹3.13 करोड़ का पुल; हेमंत सरकार ने दी मंजूरी
चतरा के भौराज नदी पर पुल निर्माण की वर्षों पुरानी मांग पूरी होने जा रही है, जिसके लिए झारखंड सरकार ...और पढ़ें

भौराज नदी पर बनेगा ₹3.13 करोड़ का पुल (एआई जेनरेटेड तस्वीर)
HighLights
भौराज नदी पर 3.12 करोड़ रुपये के पुल को मंजूरी मिली।
मुख्यमंत्री ग्राम सेतु योजना के तहत 2026-27 में निर्माण होगा।
चतरा के ग्रामीणों की आवागमन की समस्या अब होगी दूर।
संवाद सहयोगी, प्रतापपुर (चतरा)। प्रखंड के हुमाजांग पंचायत अंतर्गत भौराज गांव के समीप भौराज नदी पर पुल निर्माण की वर्षों पुरानी मांग आखिरकार पूरी होने की दिशा में आगे बढ़ गई है। ग्रामीणों की लंबे समय से चली आ रही इस मांग पर झारखंड सरकार के ग्रामीण कार्य विभाग ने गंभीरता दिखाते हुए 68.48 मीटर लंबे पुल के निर्माण के लिए 3 करोड़ 12 लाख 97 हजार रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान कर दी है।
मुख्यमंत्री ग्राम सेतु योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 में इस पुल का निर्माण कराया जाएगा।ग्रामीण कार्य विभाग के सचिव मनोज कुमार द्वारा 16 सितंबर 2026 को जारी स्वीकृति आदेश के अनुसार पुल निर्माण की अनुशंसा चतरा विधायक जनार्दन पासवान ने 10 जून 2026 को की थी।
विधायक की अनुशंसा के बाद विभागीय स्तर पर योजना के विस्तृत प्राक्कलन एवं तकनीकी पहलुओं की जांच के उपरांत प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है।भौराज नदी पर पुल नहीं होने के कारण क्षेत्र के ग्रामीणों को लंबे समय से आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ता रहा है।
नदी का जलस्तर बढ़ने पर आवागमन प्रभावित
विशेषकर बरसात के दिनों में नदी का जलस्तर बढ़ने पर आवागमन प्रभावित होने से ग्रामीणों की परेशानी और बढ़ जाती थी। पुल निर्माण की मांग को लेकर ग्रामीण लंबे समय से जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभाग के समक्ष आवाज उठाते रहे हैं।विभागीय आदेश में पुल निर्माण से पूर्व दोनों ओर पहुंच पथ के लिए जमीन की उपलब्धता सुनिश्चित करने, निर्माण स्थल की जियो-टैग फोटोग्राफी कराने तथा कार्य की गुणवत्ता बनाए रखने सहित कई आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं।
विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि योजना का क्रियान्वयन पीएमजीएसवाई अथवा किसी अन्य योजना के तहत पहले से संचालित कार्य के रूप में नहीं किया जाएगा।प्रशासनिक स्वीकृति मिलने से वर्षों से पुल की प्रतीक्षा कर रहे भौराज सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन की स्थायी सुविधा उपलब्ध होने की उम्मीद जगी है।
