चतरा, जुलकर नैन: वन विभाग ने अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त पर्यटन स्थल कौलेश्वरी पर्वत को सजाने और संवारने में जुट गया है। इसके तहत उसने पर्वत की घाटी और उसकी तलहटी को आकर्षक बनाने का कार्य प्रारंभ कर दिया है।

राज्य सरकार ने इसके लिए पांच करोड़ रुपये का आवंटन दिया है। 55 एकड़ भूमि की घेराबंदी की जा रही है, जिसमें आरोग्य वन के साथ-साथ औषधीय पेड़-पौधे लगाए जाएंगे।

तलहटी में भव्य तालाब का निर्माण कराया जाएगा] जिसमें नौका-विहार की व्यवस्था की जाएगी। जगह-जगह झरने, सुंदर चिल्ड्रन पार्क, पेड़ों के नीचे चबूतरा निर्माण होगा, पहाड़ से गिरने वाले पानी से जलापूर्ति की व्यवस्था की जाएगी।

वन विभाग के पास है ज्‍यादातर जमीन

पर्वत और तलहटी में ज्यादातर जमीन वन विभाग की है। पर्यटन विकास को ध्यान में रखकर इसे स्वच्छ, सुंदर, पर्यावरण से भरपूर और सैलानियों को आकृष्ट करने वाले स्थल के रूप में विकसित करने की योजना है।

वन अधिकारी उसी योजना के तहत प्रथम चरण में पांच करोड़ रुपये की राशि से आकर्षक बनाने का प्रयास कर रहे हैं, ताकि यहां आने वाले पर्यटकों को शांति, सुकून और आनंद की अनुभूति हो। इसके लिए तलहटी में एक 250 फीट चौड़े, 350 फीट लंबे और 12 फीट गहरे तालाब का निर्माण कराया जाएगा।

उसकी सीढ़ियों को पक्का और खूबसूरत बनाया जाएगा और तालाब की घेराबंदी की जाएगी। साथ ही इसके किनारे सैलानियों के लिए बेंच बनाए जाएंगे। तालाब में पहाड़ से गिरने वाले पानी को संग्रहित किया जाएगा।

तालाब की सफाई के लिए की जाएगी व्‍यवस्‍था 

जरूरत से ज्यादा पानी संग्रहित होने पर अथवा तालाब की सफाई के लिए जल निकासी की व्यवस्था होगी। बाद में तालाब को बहुपयोगी बनाने की योजना है। मछली पालन और बोटिंग की व्यवस्था कर उसे सैलानियों के आकर्षण का केंद्र बनाया जाएगा। पार्क को घेराबंदी कर संरक्षित किया जाएगा।

तलहटी में करीब 55 एकड़ वनभूमि की घेराबंदी कर वन आरोग्य पार्क का निर्माण कराया जा रहा है। उसमें पेड़ों के नीचे सैलानियों के बैठने की खातिर चबूतरा बनाए जाएंगे।

नालों का झरनों में किया जाएगा तब्दील

पहाड़ से गिरने वाले नालों को खूबसूरत झरने में तब्दील किया जाएगा। उसके किनारे बैठने की व्यवस्था होगी। उसके पानी को जगह-जगह टंकी में संग्रहित कर सैलानियों के इस्तेमाल योग्य बनाया जाएगा। जगह-जगह पर वॉच टॉवर बनाए जाएंगे।

झारखंड में यह अलग किस्म का आरोग्य वन होगा। 55 एकड़ भू-खंड में ढेर सारी सुविधाएं बहाल की जा रही है। औषधीय गुणों से युक्त पौधे एवं फूल के नर्सरी बनाएं जाएंगे। जल संरक्षण पर फोकस किया गया है। बंबू शेड, चिल्ड्रेन पार्क, पक्षियों के जल क्रीड़ा के लिए टब आदि व्यवस्था की जाएगी। इस पूरे प्रोजेक्ट पर प्रथम चरण में पांच करोड़ रुपये का खर्च आएगा। निर्माण कार्य प्रारंभ हो गया है। - राहुल मीणा, उत्तरी वन प्रमंडल पदाधिकारी, चतरा।

Edited By: Prateek Jain