इटखोरी (चतरा) : इटखोरी महोत्सव की नींव वैसे तो क्षेत्र में पर्यटन विकास के उद्देश्य से रखी गई थी, लेकिन महोत्सव कराने का संकल्प एक नक्सली विस्फोट से उपज कर बाहर आया था। आज इस महोत्सव ने विस्फोट के बदनुमा दाग को तो मिटा ही दिया है, महोत्सव अब हर वर्ष उत्सव व विकास की छटा बिखेर रहा हैं। दरअसल लोकसभा का चुनाव जीतने के बाद चतरा के सांसद सुनील कुमार ¨सह मां भद्रकाली के दरबार में भक्ति तथा लोक संस्कृति पर आधारित कोई कार्यक्रम कराना चाह रहे थे। इसके लिए उस वक्त सांसद ने बसंत पंचमी का दिन निर्धारित कर रखा था। कार्यक्रम की तैयारियां धीरे-धीरे साकार रूप ले ही रही थी। इसी बीच वर्ष 2014 के दिसंबर माह में विधानसभा के चुनाव की मतगणना के ठीक दूसरे दिन मां भद्रकाली मंदिर के पथ में नक्सलियों ने क्षेत्र में अशांति तथा भय का माहौल कायम करने के उद्देश्य से बारूदी सुरंग का विस्फोट कर दिया था। बारूदी सुरंग विस्फोट की घटना के दूसरे दिन सांसद घटना से अवगत होने के लिए इटखोरी थाना आए हुए थे। थाना में ही उनकी मुलाकात चतरा के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक सुरेंद्र कुमार झा से हुई थी। घटना की जानकारी लेने के बाद सांसद संध्या के वक्त मां भद्रकाली का दर्शन करने मंदिर जाना चाहते थे। लेकिन तत्कालीन पुलिस अधीक्षक ने सुरक्षा का हवाला देते हुए सांसद को शाम के वक्त मंदिर नहीं जाने का आग्रह किया था। एक जनप्रतिनिधि होने के नाते सांसद ने पुलिस अधीक्षक के सलाह को मान लिया और ब्लॉक मोड़ में स्थित मां भद्रकाली मंदिर के प्रथम प्रवेश द्वार के पास शीश नवाकर लौट गए थे। लेकिन मंदिर नहीं जा पाने का मलाल सांसद को बहुत अधिक हुआ था। उसी वक्त उन्होंने यह संकल्प ले लिया था कि माता के दरबार में ऐसे कार्यक्रम का आगाज होगा, जिससे आधी रात में भी तीन धर्मों का यह संगम स्थल भक्तों की भीड़ से गुलजार रहेगा। अपने इस संकल्प को उस वक्त सांसद ने चतरा के तत्कालीन उपायुक्त अमित कुमार के साथ साझा किया था। सांसद ने उपायुक्त से कहा था कि नक्सली विस्फोट की घटना से भक्तों की आस्था को जो चोट पहुंची है, उसका उपचार मां भद्रकाली मंदिर परिसर में एक भव्य महोत्सव के आयोजन से ही हो सकता है। आज मां भद्रकाली मंदिर परिसर में चौथे महोत्सव का आयोजन होने जा रहा है।

Posted By: Jagran