झारखंड में नई रेल लाइन के लिए 3583 करोड़ की स्वीकृति, चतरा में 101 KM की परैया-चतरा और चतरा-पत्थलगडा परियोजना
चतरा में 101 किलोमीटर लंबी परैया-चतरा और चतरा-पत्थलगडा रेल परियोजनाओं की मिट्टी जांच पूरी हो गई है, जिससे दशकों से ...और पढ़ें

परैया-चतरा रेल लाइन के लिए 3583.31 करोड़ की स्वीकृति।
HighLights
101 किमी रेल परियोजना की मिट्टी जांच पूरी।
चतरा में व्यापार, रोजगार, पर्यटन को बढ़ावा।
परैया-चतरा, चतरा-पत्थलगडा लाइनें होंगी विकसित।
जागरण संवाददाता, चतरा। झारखंड गठन के समय जिले की रोड कनेक्टिविटी बदतर स्थिति में थी। रेल कनेक्टिविटी दूर-दूर तक नहीं थी। पूरे जिले में रेल लाइन नहीं थी। परंतु परिस्थिति अब बदल रही है। टंडवा, सिमरिया, पत्थलगडा और गिद्धौर तक रेल लाइन आ चुकी है।
यह दीगर बात है कि फिलहाल कोयले का परिवहन हो रहा है। लेकिन भविष्य में यात्री रेल की संभावना निश्चित है। लाइन का विस्तार भी निश्चित है। विकास की लंबी प्रतीक्षा और रेल संपर्क की अधूरी उम्मीदों के बीच नई सुबह की आहट सुनाई देने लगी है।
कभी सड़क मार्ग और सीमित परिवहन सुविधाओं के भरोसे अपनी विकास यात्रा तय करने वाला चतरा अब रेल मानचित्र पर अपनी मजबूत पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। परैया-चतरा और चतरा-पत्थलगडा नई रेल लाइन परियोजना की सायल टेस्टिंग शुरू होना इसी बदलाव की महत्वपूर्ण कड़ी है।
करीब 101 किलोमीटर लंबी दोनों रेल परियोजनाओं के धरातल पर उतरने की उम्मीद अब पहले से अधिक मजबूत हुई है। चतरा लंबे समय से रेल सुविधा से वंचित रहा है। जिले के लोगों को दूसरे शहरों तक पहुंचने के लिए मुख्य रूप से सड़क मार्ग पर निर्भर रहना पड़ता है। विद्यार्थियों, मरीजों, नौकरीपेशा लोगों, व्यापारियों और किसानों के लिए लंबी दूरी की यात्रा हमेशा चुनौतीपूर्ण रही है।
रेल संपर्क नहीं होने का असर केवल आवागमन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि व्यापार, कृषि उत्पादों की ढुलाई, औद्योगिक निवेश और पर्यटन की संभावनाएं भी अपेक्षित गति नहीं पकड़ सकीं। जिले के लोगों की वर्षों पुरानी मांग रही है कि चतरा को भी रेल नेटवर्क से जोड़ा जाए, ताकि विकास की मुख्यधारा में इसकी भागीदारी मजबूत हो सके।
अब इस दिशा में सकारात्मक पहल दिखाई देने लगी है। परैया-चतरा रेल लाइन परियोजना के लिए 3583.31 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति मिल चुकी है। वहीं, चतरा-पत्थलगडा रेल लाइन की प्राक्कलित राशि 755.92 करोड़ रुपये है।
इस परियोजना की प्रशासनिक स्वीकृति की प्रक्रिया अंतिम चरण में बताई जा रही है। दोनों परियोजनाओं की मिट्टी जांच की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। नदी, नालों, ओवरब्रिज और अंडरपास वाले संभावित स्थलों पर विशेष रूप से की गई है।
परैया-चतरा रेलखंड की लंबाई करीब 75.1 किलोमीटर और चतरा-पत्थलगडा रेलखंड की लंबाई 25.23 किलोमीटर है। इस प्रकार दोनों परियोजनाओं की कुल लंबाई लगभग 100.33 किलोमीटर होगी। चतरा-पत्थलगडा रेल लाइन के माध्यम से क्षेत्र को टोरी-शिवपुर रेल लाइन से जोड़ने की योजना है।
रोजगार, व्यापार और पर्यटन को मिलेगी गति
नई रेल लाइन का निर्माण चतरा के विकास की दिशा बदलने वाला साबित हो सकता है। रेल संपर्क स्थापित होने से किसानों को अपनी उपज बड़े बाजारों तक पहुंचाने में सहूलियत होगी। व्यापारियों को माल ढुलाई के बेहतर विकल्प मिलेंगे।
औद्योगिक गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलेगा और निवेश की नई संभावनाएं विकसित होंगी। वहीं, मां भद्रकाली मंदिर, कौलेश्वरी पर्वत और जिले के अन्य पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होने से पर्यटन कारोबार को भी बढ़ावा मिल सकता है।
निर्माण के दौरान स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे। भविष्य में नियमित रेल परिचालन शुरू होने से विद्यार्थियों, मरीजों और नौकरीपेशा लोगों को भी बड़ी राहत मिलेगी।
क्या कहते हैं सांसद
परैया-चतरा और चतरा-पत्थलगडा दोनों रेल परियोजनाओं की सायल टेस्टिंग हो चुकी है। दोनों परियोजनाओं का निर्माण कार्य जल्द ही एक साथ शुरू होगा। इससे क्षेत्रीय कनेक्टिविटी मजबूत होगी और रोजगार, व्यापार, पर्यटन तथा औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। जिलेवासियों की वर्षों पुरानी मांग पूरी होने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम है।
-कालीचरण सिंह, सांसद, चतरा।
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