बोकारो में सिंगारी जोरिया का होगा कायाकल्प, सड़क और पुलिया निर्माण के लिए टेंडर जारी
सिंगारी जोरिया, जो कभी नदी थी, अब अतिक्रमण और उपेक्षा के कारण नाले में बदल गई है, जिसके जीर्णोद्धार की पहल शुरू हुई है।

सिंगारी जोरिया का होगा कायाकल्प। (जागरण)
HighLights
सिंगारी जोरिया के जीर्णोद्धार और विकास की पहल शुरू।
सड़क निर्माण विभाग ने डीपीआर तैयार करने को निविदा जारी।
अतिक्रमणकारियों पर कार्रवाई की संभावना, जमीन मापी होगी।
जागरण संवाददाता, बोकारो। कभी नदी की तरह कलकल बहने वाली सिंगारी जोरिया का दिन बदलने की उम्मीद जगी है। समय के साथ अतिक्रमण और उपेक्षा के कारण जोरिया का अस्तित्व सिमटता चला गया और आज यह नाले के रूप में नजर आती है।
अब इसके विकास और कायाकल्प की दिशा में पहल शुरू हुई है। सड़क निर्माण विभाग की ओर से सिंगारी जोरिया के किनारे सड़क निर्माण एवं पुलिया निर्माण सहित अन्य कार्यों के लिए विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) तैयार कराने को लेकर निविदा आमंत्रित की गई है।
इस प्रक्रिया में जोरिया की जमीन की मापी और उपलब्ध भूमि का ब्योरा भी महत्वपूर्ण होगा। इससे वर्षों से जोरिया की जमीन पर कब्जा जमाए लोगों की परेशानी बढ़ सकती है।
सिंगारी जोरिया कभी क्षेत्र के प्राकृतिक जलनिकास का महत्वपूर्ण माध्यम रही होगी, लेकिन समय के साथ इसके किनारों पर बढ़ते निर्माण और जमीन के उपयोग में बदलाव ने इसकी स्थिति प्रभावित की है।
जोरिया का मूल स्वरूप बचाने, जलनिकासी व्यवस्था को दुरुस्त करने और प्रस्तावित निर्माण को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने के लिए जमीन की सही पहचान जरूरी होगी।
अनुभवी संवेदकों से मांगा प्रस्ताव
झारखंड सरकार के सड़क निर्माण विभाग के अंतर्गत मृदा अन्वेषण प्रमंडल, अग्रिम योजना शाखा ने डीपीआर तैयार करने के लिए परामर्शी सेवा की निविदा जारी की है।
इसमें सिंगारी जोरिया पर चास के केएम मेमोरियल अस्पताल के पास से फाल मंडी पुल महावीर चौक तक लगभग एक किलोमीटर लंबाई तक जोरिया का जीर्णोद्धार एवं पुलिया निर्माण की योजना शामिल है।
इसके अलावा सिंगारी जोरिया, फाल मंडी महावीर चौक से चिरा चास तक लगभग चार किलोमीटर लंबाई तक जोरिया का जीर्णोद्धार एवं पुलिया निर्माण के लिए भी डीपीआर तैयार किया जाना है।
निविदा में पहुंच पथ, भूमि अधिग्रहण प्रस्ताव, स्वामित्व संबंधी विवरण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन, वन संबंधी प्रस्ताव और उपयोगिता सेवाओं के स्थानांतरण जैसे बिंदुओं को शामिल किया गया है।
जोरिया की जमीन का सामने आएगा वास्तविक स्वरूप
डीपीआर तैयार करने की प्रक्रिया में जमीन की उपलब्धता और स्वामित्व का विवरण जुटाया जाएगा। ऐसे में जोरिया की वास्तविक चौड़ाई, उसके बहाव क्षेत्र और आसपास की जमीन की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
जिन रैयतों की निजी जमीन परियोजना के लिए अधिग्रहित की जाएगी, उन्हें नियमानुसार मुआवजा मिलने का प्रावधान होगा। वहीं, यदि जांच और मापी में सरकारी या जोरिया की जमीन पर अवैध कब्जा सामने आता है, तो संबंधित अतिक्रमणकारियों को उस जमीन से हाथ धोना पड़ सकता है।
हालांकि, अतिक्रमण हटाने और मुआवजे का निर्णय जमीन के स्वामित्व, राजस्व अभिलेखों तथा सक्षम प्राधिकार के नियमों के आधार पर होगा।
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