SAIL में जीएम से सीजीएम पदोन्नति पर गरमाया विवाद, सेफी ने लगाए गंभीर आरोप
सेल में महाप्रबंधक से मुख्य महाप्रबंधक पद पर पदोन्नति में भेदभाव का आरोप लगा है। सेफी ने पांच साल से ...और पढ़ें

स्टील अथारिटी आफ इंडिया लिमिटेड। (फाइल फोटो)
HighLights
सेल में जीएम से सीजीएम पदोन्नति पर विवाद।
सेफी ने भेदभाव का आरोप लगाकर पारदर्शिता मांगी।
पांच साल से कम अवधि वाले अधिकारी को सीजीएम न बनाएं।
जागरण संवाददाता, बोकारो। स्टील अथारिटी आफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) में महाप्रबंधक से मुख्य महाप्रबंधक पद पर पदोन्नति का मामला गरमा गया है। पदोन्नति की प्रक्रिया में भेदभाव करने का आरोप लगा कर इसे पारदर्शी रूप से लागू करने की मांग सेफी ने की है।
सेफी की ओर से कहा गया है की सेल के माइंस इकाई सहित अलग अलग संयंत्र के हॉट जोन या संवेदनशील विभाग में कई अधिकारी जीएम के पद पर विगत पांच सात साल से काम कर रहे है। ऐसे में सीजीएम पद के लिए पहली प्राथमिकता इन्हें दी जानी चाहिए।
सेफी की ओर से सेल मुख्यालय को दिए गए पत्र में स्पष्ट कहा गया है की कंपनी के किसी भी इकाई में पांच साल से कम अवधि वाले अधिकारी को जीएम से सीजीएम नही बनाया जाए।
यदि किसी अधिकारी को मात्र तीन चार साल की अवधि में जीएम से सीजीएम पद पर प्रोन्नति दे दी जाती है तो इसका प्रतिकूल असर दूसरे अधिकारियों के मनोबल पर पड़ेगा। इससे कंपनी का विकास व उत्पादन भी प्रभावित होगा।
प्रभावशाली अधिकारियों को पदोन्नति देने की हो रही कोशिश
सेल में कतिपय अधिकारियों को प्रमोशन देने के लिए लॉबिंग होने की चर्चा है। इसके लिए उनके कुछ वर्षों से उनके सर्विस रिकार्ड में आउट स्टैडिंग मार्किंग दिया जा रहा है। इस बाबत सेफी के पूर्व महासचिव विमल कुमार विशी ने कहा कि ऐसे किसी भी प्रयास का फेडरेशन विरोध करेगा।
कहा कि चर्चा है कि जल्द ही 2026 की रिक्तियों के विरूद्ध पदोन्नति की जा सकती है। उन्होंने बताया कि अगस्त माह में हुई पदोन्नति में काफी भेदभाव हुआ है।
भिलाई इस्पात संयंत्र से नव प्रोन्नत सीजीएम में किसी भी अधिकारी का तबादला दूसरे इकाई में नही किया गया। जो कि पदोन्नति के परंपरा के विपरीत है। जबकि सेल के राउरकेला, दुर्गापुर, बोकारो, बर्नपुर आदि इकाई में कई सीजीएम को पदोन्नति देने के बाद उनका तबादला दूसरी इकाई में कर दिया गया।
