बोकारो: सरकारी व गैर सरकारी स्तर पर गरगा नदी को स्वच्छ रहने की दिशा में काम किया जा रहा है। गरगा नदी के जल को प्रदूषण से मुक्त करने का दावा किया जाता है। लेकिन सच्चाई इससे अलग है। आज भी इस नदी में नाले का दूषित जल जहर घोल रहा है। गरगा नदी का जल प्रदूषित हो रहा है। इससे जलीय जीवों को नुकसान हो रहा है, वहीं चास व इसके आसपास रहने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। किसी जनप्रतिनिधि ने नदी को प्रदूषण मुक्त करने के लिए सकारात्मक पहल नहीं किया। उनका काम केवल वायदों तक ही सिमट कर रह गया है।

-गरगा में प्रवाहित किया जा रहा नाले का पानी

चास नगर निगम की ओर से 56 नाले को चिह्नित किया गया है। इसके माध्यम से दूषित जल निरंतर गरगा नदी में प्रवाहित होता रहता है। इससे नदी का जल प्रदूषित हो रहा है। इस पर विभागीय स्तर पर रोक नहीं लगाया जा सका है। नाले के दूषित जल को री साइकिल करने का प्रयास नहीं किया जा रहा है। इसके लिए अब तक सकारात्मक पहल नहीं की गई है। जानकारों का मानना है कि अगर चास नगर के विभिन्न मुहल्ले से निकलने वाले दूषित जल को री साइकिल कर इसका प्रयोग किया गया तो काफी हद तक जल की कमी से बचा जा सकता है। साथ ही भूमिगत जल के स्तर को भी बेहतर किया जा रहा है। लेकिन अब तक ऐसा संभव नहीं हो सका है। इसके लिए न तो जनप्रतिनिधि रुचि दिखा रहे हैं और न ही गरगा के अस्तित्व को बचाने के लिए सार्थक पहल कर रहे हैं।

--क्या कहते हें अधिकारी

चास नगर निगम के अपर नगर आयुक्त शशि प्रकाश झा ने कहा कि नाले के दूषित जल से गरगा नदी प्रदूषित हो रही है। इसलिए सभी नाले के पानी को रोकने की योजना पर काम चलेगा। इसके लिए प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।

Posted By: Jagran

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