जागरण संवाददाता, बोकारो: पीएम केयर्स फंड से स्थापित होने वाले आक्सीजन प्लांट ने सोमवार से बोकारो सदर अस्पताल में काम करना प्रारंभ कर दिया है। 1000 लीटर प्रति मिनट आक्सीजन उत्पादन करने वाले इस आक्सीजन प्लांट को निजी क्षेत्र की कंपनी लार्सन एंड टर्बो ने स्थापित किया है, जबकि आक्सीजन प्लांट का डिजाइन रक्षा शोध एवं विकास संस्थान (डीआरडीओ) ने डेवलप किया है। राज्य के 24 जिलों में से 9 जिलों में पीएसए आक्सीजन प्लांट को स्थापित करने का काम लार्सन एंड टर्बो को दिया गया है। कंपनी के अभियंता राजेश सिन्हा ने अपनी उपस्थिति में सोमवार को प्लांट को चालू कर पूरी प्रक्रिया की जांच की। इस दौरान सदर अस्पताल के चिकित्सक और तकनीशियन उपलब्ध थे। संभावना है कि इसका विधिवत उद्घाटन आने वाले एक दो दिनों में हो जा। उसके बाद मरीजों को इस प्लांट की सुविधा मिलने लगेगी।

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स्वचालित है ऑक्सीजन प्लांट: अब तक इस बात को लेकर भ्रम था कि यदि 1000 लीटर क्षमता का यह आक्सीजन प्लांट चलता है तो बिजली की काफी खपत होगी और बन रहा आक्सीजन बेकार होगा, पर डीआरडीओ के डिजाइन में सबसे बड़ी खास बात यह है कि यह ऑक्सीजन प्लांट उतना ही आक्सीजन का उत्पादन करेगा, जितने की जरूरत होगी। उदाहरण के तौर पर, यदि सदर अस्पताल में 10 मरीज आक्सीजन सपोर्टेड बेड के सहारे भर्ती हैं तो उनकी खपत के अनुसार ही आक्सीजन का उत्पादन होगा। यदि किसी भी बेड पर आक्सीजन की जरूरत नहीं हो रही है तो मशीन स्वत: एनर्जी सेवर मोड में चली जाएगी। इससे जहां एक ओर ऊर्जा की बचत होगी तो वहीं प्लांट को चलाने में किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं होगी। अगले डेढ़ वर्षो तक लार्सन एंड टर्बो के तकनीशियन इस आक्सीजन प्लांट का देखरेख करेंगे। संचालन का प्रशिक्षण सदर अस्पताल के तकनीशियन को दिया जाएगा। डेढ़ वर्ष के बाद यदि जिला प्रशासन चाहे तो मशीन के अनुरक्षण का काम लार्सन एंड टर्बो या अन्य किसी कंपनी को दे सकता है।

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राज्य सरकार की मदद से बन रहा है 500 लीटर का अलग आक्सीजन प्लांट: खास बात यह है कि सदर अस्पताल में दो आक्सीजन प्लांट स्थापित होना है। एक 1000 लीटर का जो कि पीएम केयर्स फंड से बन गया है, जबकि दूसरा 500 लीटर का प्लांट राज्य सरकार के निर्देश पर स्थापित हो रहा है। मतलब कि सदर अस्पताल में आक्सीजन का भी बैकअप उपलब्ध होगा, ताकि किसी भी हालत में किसी भी मरीज की जान आक्सीजन के अभाव में नहीं जाए।

Edited By: Jagran