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बोकारो स्टील प्लांट गेट जाम: छुट्टी के दिन बैठा झारखंड हाई कोर्ट, उपायुक्त ने दिया सामान्य स्थिति का आश्वासन

Published: Mon, 19 Oct 2026 07:29 AM (IST)

Bokaro Steel Plant Gate Blockade Case: बोकारो स्टील प्लांट के गेट जाम मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने विशेष सुनवाई की, ...और पढ़ें

झारखंड हाई कोर्ट और बोकारो स्टील प्लांट। (फाइल फोटो)

झारखंड हाई कोर्ट और बोकारो स्टील प्लांट। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. हाईकोर्ट ने बोकारो स्टील प्लांट गेट जाम मामले पर विशेष सुनवाई की।

  2. उपायुक्त ने अदालत को सभी 11 गेट खुलने का आश्वासन दिया।

  3. मामले की अगली सुनवाई 28 अक्टूबर को, शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश।

जागरण संवाददाता, बोकारो। Bokaro Steel Plant Gate Blockade Case: बोकारो स्टील प्लांट (बीएसएल) के गेट जाम किए जाने और कर्मचारियों की आवाजाही बाधित होने के मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने रविवार को पूजा अवकाश के दौरान विशेष सुनवाई की। न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की अदालत में हुई सुनवाई के दौरान बोकारो के उपायुक्त अजय नाथ झा और पुलिस अधीक्षक नाथू सिंह मीणा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित हुए।

उपायुक्त ने अदालत को आश्वस्त किया कि प्लांट में कर्मचारियों और अधिकारियों के प्रवेश तथा निकास में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न नहीं होने दी जाएगी। उन्होंने बताया कि प्रदर्शनकारियों को समझाकर सभी 11 गेट खुलवा दिए गए हैं और स्थिति सामान्य हो गई है। अदालत ने उपायुक्त के आश्वासन पर फिलहाल गृह सचिव को तलब नहीं किया।

मामले की अगली सुनवाई 28 अक्टूबर को होगी। अदालत ने उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक को अपने आश्वासन के संबंध में शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है।

कर्मचारियों की आवाजाही बाधित होने पर दायर हुई थी याचिका

स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) की ओर से दायर याचिका में आरोप लगाया गया था कि स्थानीय विधायक श्वेता सिंह और विस्थापित अप्रेंटिस संघ के आंदोलनकारियों ने बोकारो स्टील प्लांट के अधिकांश गेट बंद कर दिए थे।

इससे कर्मचारियों, अधिकारियों, रखरखाव कर्मियों और आवश्यक कच्चे माल की आवाजाही प्रभावित हो रही थी। कंपनी ने 15 अक्टूबर को जिला प्रशासन को आवेदन देकर हस्तक्षेप की मांग की थी। इसके बावजूद 16 अक्टूबर की सुबह से प्लांट के गेटों पर अवरोध उत्पन्न होने का आरोप लगाया गया।

याचिका में आशंका जताई गई थी कि सभी गेट बंद होने से प्लांट का संचालन प्रभावित हो सकता है और गंभीर औद्योगिक दुर्घटना का खतरा पैदा हो सकता है। कंपनी के अनुसार, बोकारो स्टील प्लांट एक सतत उत्पादन प्रक्रिया वाला औद्योगिक प्रतिष्ठान है, जहां भट्टियों, गैस पाइपलाइनों और अन्य संवेदनशील प्रतिष्ठानों का लगातार संचालन एवं रखरखाव जरूरी है।

करीब 3500 कर्मचारियों के फंसे होने की हुई बात

याचिका में दावा किया गया था कि गेट बंद होने के कारण प्लांट के भीतर करीब 3500 कर्मचारी और श्रमिक फंस गए थे। शिफ्ट बदलने, भोजन-पानी की आपूर्ति और आवश्यक दवाइयों की उपलब्धता बाधित होने की बात भी कही गई थी। कंपनी ने आशंका जताई थी कि लंबे समय तक आवाजाही बंद रहने से कर्मचारियों की सुरक्षा और प्लांट की संवेदनशील इकाइयों के संचालन पर गंभीर असर पड़ सकता है।

सुनवाई के दौरान उपायुक्त ने अदालत को बताया कि प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को समझाने और प्लांट का संचालन निर्बाध बनाए रखने के लिए प्रभावी कदम उठाए हैं। उनके अनुसार, मुख्य गेट संख्या-1 खोल दिया गया था और प्लांट के भीतर फंसे कर्मचारियों को बाहर निकलने दिया गया। बाद में उन्होंने अन्य 10 गेट भी खुल जाने की जानकारी दी।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा ने भी निर्देश प्राप्त करने के बाद अदालत को बताया कि सभी गेट खुल गए हैं और कर्मचारियों व अधिकारियों की आवाजाही सामान्य रूप से चल रही है। हालांकि, उन्होंने आशंका जताई कि प्रशासन ने समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की तो भविष्य में दोबारा ऐसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

इस पर उपायुक्त ने अदालत को भरोसा दिलाया कि कर्मचारियों और अधिकारियों को ड्यूटी पर आने-जाने में किसी प्रकार की परेशानी नहीं होने दी जाएगी। अदालत ने उनके आश्वासन पर भरोसा जताते हुए मामले को 28 अक्टूबर तक के लिए स्थगित कर दिया।

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