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बेंगलुरु में मजदूर की मौत, 15 घंटे बाद भी अस्पताल में पड़ा शव; असहाय पत्नी और मासूम बच्चे की मदद को कोई आगे नहीं

By Rahul Sahegal Edited By: Mritunjay Pathak
Published: Tue, 13 Jan 2026 08:37 AM (IST)

Bokaro Youth Dies in Bangalore: पेटरवार के नंदकिशोर सिंह की बेंगलुरु के अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। ...और पढ़ें

बोकारो के युवक की बेंगलुरू के अस्पताल में मौत।

बोकारो के युवक की बेंगलुरू के अस्पताल में मौत।

HighLights

  1. बेंगलुरु में बोकारो के नंदकिशोर सिंह की मौत।

  2. परिजनों ने शव लाने और सहायता की गुहार लगाई।

  3. कंपनी पर सहयोग न करने का आरोप, परिवार बेसहारा।

जागरण संवाददाता, पेटरवार (बोकारो)। रोजगार की तलाश में घर से सैकड़ों किलोमीटर दूर गए एक युवा मजदूर की मौत ने पूरे परिवार को गहरे संकट में डाल दिया है। झारखंड के बोकारो जिले के पेटरवार थाना क्षेत्र के चांदो गांव निवासी 27 वर्षीय नंदकिशोर सिंह की बंगलौर स्थित ईस्ट प्वाइंट हॉस्पिटल में इलाज के दौरान मौत हो गई, लेकिन दुखद पहलू यह है कि मौत के 24 घंटे बाद भी उसका शव अस्पताल में ही पड़ा हुआ है।

नंदकिशोर सिंह फोर्स सिक्यूरिटी एंड एलाइड सर्विसेस नामक निजी कंपनी में सिक्यूरिटी गार्ड के रूप में कार्यरत था। करीब छह माह पहले वह बेहतर भविष्य की उम्मीद लेकर बंगलौर गया था। 10 जनवरी को अचानक उसकी तबीयत बिगड़ी, लेकिन परिजनों का आरोप है कि कंपनी ने इलाज के लिए कोई मदद नहीं की। मजबूर होकर नंदकिशोर ने खुद अस्पताल में भर्ती होकर इलाज शुरू कराया, जहां सोमवार सुबह उसने दम तोड़ दिया।

मृतक अपनी पत्नी और डेढ़ साल के बच्चे के साथ बंगलौर में रह रहा था। पत्नी की एक आंख से रोशनी नहीं है। पति की मौत के बाद वह अकेली, असहाय और आर्थिक रूप से कमजोर स्थिति में है। छोटे बच्चे को गोद में लेकर वह शव को गांव तक लाने के लिए संघर्ष कर रही है, लेकिन न कंपनी मदद कर रही है और न ही कोई अन्य सहयोग मिल रहा है।

उधर, गांव में रह रहे मृतक के पिता अवधेश सिंह मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। उनकी आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर है कि वे बंगलौर जाकर बेटे का शव लाने में असमर्थ हैं। उन्होंने प्रवासी नियंत्रण कक्ष और श्रम विभाग रांची को पत्र भेजकर शव को झारखंड लाने और परिवार को सहायता दिलाने की गुहार लगाई है।

परिजनों ने प्रशासन से अविलंब हस्तक्षेप कर शव को पैतृक गांव पहुंचाने और पीड़ित परिवार को आर्थिक व सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की है। यह घटना प्रवासी मजदूरों की बदहाल स्थिति और निजी कंपनियों की उदासीनता को उजागर करती है।