मुकदमा मुक्त होगा झारखंड का यह गांव, आपसी विवादों को सुलझाने के लिए बोकारो में 15 समुदाय मध्यस्थ नियुक्त
बोकारो में गांवों को मुकदमेबाजी मुक्त बनाने के लिए सामुदायिक मध्यस्थता की पहल शुरू हुई है। इसके तहत 15 चयनित ...और पढ़ें

नालसा व झालसा के निर्देश पर पीडीजे ने शुरू कराया प्रशिक्षण।
HighLights
बोकारो में गांवों को मुकदमेबाजी मुक्त बनाने की पहल।
15 सामुदायिक मध्यस्थों का तीन दिवसीय प्रशिक्षण प्रारंभ।
छोटे विवादों को आपसी बातचीत से सुलझाने का लक्ष्य।
अरविंद, बोकारो। राष्ट्रीय व राज्य विधिक सेवा प्राधिकार के निर्देश पर अब गांवों को मुकदमेबाजी मुक्त बनाने की सोच को धरातल पर उतारने की पहल शुरू कर दी गई है। इसके तहत गांवों में होने वाले छोटे-मोटे विवादों को अदालत तक पहुंचने से पहले ही आपसी बातचीत और समझौते के माध्यम से सुलझाने का प्रयास किया जाएगा।
इसके लिए कम्यूनिटी मध्यस्थ की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। ये मध्यस्थ गांव या पंचायत में बने सामुदायिक मध्यस्थता केंद्र में पक्षकारों के बीच संवाद कराकर विवादों का शांतिपूर्ण समाधान तलाशने में मदद करेंगे।
इसी सोच को धरातल पर उतारने के लिए मंगलवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बोकारो की ओर से 15 चयनित समुदाय मध्यस्थों का तीन दिवसीय प्रशिक्षण शुरू किया गया। यह प्रशिक्षण डालसा अध्यक्ष सह प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनिल कुमार मिश्रा के निर्देश में न्याय सदन में शुरू हुआ।
जिले के अलग-अलग प्रखंडों से चयनित मध्यस्थों को पायलट प्रोजेक्ट के तहत प्रशिक्षित किया जा रहा है। तीन दिवसीय प्रशिक्षण की शुरुआत मंगलवार को न्याय सदन में हुई। कार्यक्रम को अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी सह सिविल जज सीनियर डिवीजन प्रथम अनुज कुमार, डालसा सचिव अरुण कुमार दुबे, वरिष्ठ मध्यस्थ अशोक कुमार राय ने दीप प्रज्ज्वलित कर दिया।
इन्हें मध्यस्थ वरुण कुमार पांडेय सहित अन्य लोग भी प्रशिक्षण देंगे। प्रशिक्षण के दौरान अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी सह सिविल जज सीनियर डिवीजन प्रथम अनुज कुमार ने मध्यस्थों को विवादों की पहचान, पक्षकारों से संवाद, मध्यस्थता की प्रक्रिया, समझौते की शर्तों और दस्तावेजीकरण की जानकारी दी।
उन्होंने मध्यस्थों को बताया कि रास्ता, पानी, पड़ोसी, पारिवारिक मतभेद और छोटे सामुदायिक विवाद जैसे मामलों में दोनों पक्षों की सहमति से समाधान कराने का प्रयास करना है। समुदाय मध्यस्थ किसी मामले में न्यायाधीश की तरह फैसला नहीं सुनाएंगे और न ही किसी पक्ष पर समझौता थोपेंगे।
मध्यस्थता की प्रक्रिया स्वैच्छिक, निष्पक्ष और गोपनीय होगी। वहीं हत्या, दुष्कर्म, गंभीर मारपीट जैसे गंभीर आपराधिक मामलों अथवा ऐसे मामलों में, जहां न्यायिक हस्तक्षेप जरूरी है, मध्यस्थता नहीं कराई जाएगी। इस पहल का उद्देश्य विवादों को शुरुआती स्तर पर ही सुलझाकर ग्रामीणों को अनावश्यक मुकदमेबाजी, समय और खर्च से बचाना तथा गांव में संवाद और सामाजिक सद्भाव की संस्कृति को मजबूत करना है।
उन्होंने बताया कि इसके तहत किसान, मजदूर, वंचित वर्ग से लेकर अन्य को उनके निवास स्थान पर विवादों का निपटारा कराने की पहल है। मध्यस्थता की प्रक्रिया स्वैच्छिक, निष्पक्ष और गोपनीय होगी। विवाद के शुरुआती चरण में ही दोनों पक्षों को बातचीत के लिए एक मंच उपलब्ध कराना है।
मध्यस्थ दोनों पक्षों की बात अलग-अलग और संयुक्त रूप से सुनकर विवाद की वास्तविक वजह समझेंगे। इसके बाद ऐसा समाधान तलाशने का प्रयास करेंगे जिसे दोनों पक्ष अपनी इच्छा से स्वीकार कर सकें।
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