'अस्पताल पहुंचने तक बात कर रही थी नन्हीं तक्षिका...' पिता ने बयां किए आखिरी पल; उधमपुर हादसे ने उजाड़े दो परिवार
उधमपुर के रामनगर में हुए दर्दनाक सड़क हादसे में चार वर्षीय बच्ची तक्षिका और 24 वर्षीय सुनीता देवी की मौत ...और पढ़ें

उधमपुर सड़क हादसे ने छीनी दो परिवारों की खुशियां।
HighLights
रामनगर हादसे में बच्ची-महिला की मौत, दो परिवार सदमे में।
बदहाल सड़क के कारण अस्पताल पहुंचने में लगे तीन घंटे।
दो परिवारों की खुशियां छिनी, मासूम बच्चे ने खोई मां।
शेर सिंह, उधमपुर। रामनगर के पंचौड़ में हुए दर्दनाक सड़क हादसे ने दो परिवारों को कभी न भरने वाला जख्म दिया है। हादसे में चार वर्षीय तक्षिका और 24 वर्षीय सुनीता देवी की मौत हो गई। एक परिवार की चहकती बच्ची हमेशा के लिए खामोश हो गई, तो दूसरे परिवार के दो वर्षीय मासूम के सिर से मां का साया उठ गया। हादसे के बाद दोनों परिवार गहरे सदमे में हैं। घरों में पसरा मातम और अपनों को खोने का दर्द दुर्घटना की भयावहता बयां कर रहा है।
चार वर्षीय तक्षिका के पिता राकेश कुमार अस्पताल के बाहर अपनी लाडली को याद कर फूट-फूटकर रो रहे थे। छत्तराड़ी निवासी राकेश की आंखों में बेटी को खोने का दर्द साफ झलक रहा था। बेटी के शव के पास पहुंचकर वह बार-बार उसे उठने के लिए कह रहे थे। जिस बच्ची को अपनी आंखों के सामने बड़ा होते देखने के सपने उन्होंने संजोए थे, उसके हमेशा के लिए बिछुड़ जाने से वह भीतर तक टूट गए। उनकी बेबसी देखकर वहां मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं।
राकेश कुमार ने रुंधे गले से बताया कि हादसे के बाद अस्पताल पहुंचने से पहले रास्ते में उनकी बेटी उनसे बातें कर रही थी। परिवार को उम्मीद थी कि समय पर उपचार मिल जाए तो बच्ची की जान बच सकती है। लेकिन अस्पताल पहुंचने तक उनकी आस टूट गई। बेटी को बचा लेने की उम्मीद और उसे हमेशा के लिए खो देने का दर्द उनके चेहरे पर साफ दिखाई दे रहा था।
बदहाल सड़क ने बढ़ाई मुश्किलें
राकेश कुमार ने दूरदराज के इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उनके अनुसार घटनास्थल से रामनगर अस्पताल तक पहुंचने में करीब तीन घंटे का सफर तय करना पड़ा। जब हर पल कीमती था और परिवार बच्ची की जिंदगी बचने की उम्मीद लगाए बैठा था, तब लंबी दूरी ने उनकी परेशानी और बढ़ा दी। बच्ची सहित पांच लोगों को रामनगर अस्पताल पहुंचाने वाले शादी लाल ने भी बदहाल सड़क को लेकर प्रशासन पर सवाल उठाए।
उन्होंने बताया कि बच्ची रास्ते में अच्छी तरह बात कर रही थी और बार-बार पीने के लिए पानी मांग रही थी। उनके अनुसार, जो सफर एक घंटे से भी कम समय में पूरा हो जाना चाहिए था, उसे तय करने में तीन घंटे लग गए। शादी लाल का कहना था कि सड़क ठीक होती और बच्ची समय पर अस्पताल पहुंचती तो वह आज जीवित होती। हालांकि, हादसे और बच्ची की मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
बच्चे को बचाया, खुद नहीं बच सकी मां
पंचौड़ हादसे में 24 वर्षीय सुनीता देवी की मौत ने भी एक परिवार को कभी न भरने वाला दुख दिया है। सुनीता अपने दो वर्षीय बच्चे के साथ थी। हादसे में बच्चा बच गया, लेकिन सुनीता की जान नहीं बच सकी। बच्चे के सिर पर चोटें आईं, हालांकि उसे सुरक्षित बताया गया है। रामनगर अस्पताल में मासूम बच्चे को देखकर कई लोगों की आंखें नम हो गईं।
जिस उम्र में बच्चे को मां की गोद, उसकी आवाज और उसके स्पर्श की सबसे अधिक जरूरत होती है, उसी उम्र में उसका मां से बिछुड़ जाना परिवार के लिए असहनीय पीड़ा है। अभी वह शायद यह भी नहीं समझ सकता कि उसकी मां अब उसे गोद में उठाने, प्यार करने और सीने से लगाने के लिए कभी वापस नहीं आएगी।
परिवार के सदस्य बच्चे को संभालने की कोशिश करेंगे, लेकिन मां की कमी की भरपाई कोई नहीं कर सकता। सुनीता की मौत के बाद यह मासूम मां के स्नेह से वंचित हो गया है। हादसे ने एक ओर परिवार से मां छीन ली, तो दूसरी ओर तक्षिका के परिवार को अपनी लाडली के बिछुड़ने का असहनीय दुख दे दिया।
