संवाद सहयोगी, कटड़ा : दिव्य ज्योति जागृति संस्थान द्वारा रघुनाथ मंदिर में जारी श्रीमद् देवी भागवत कथा के दूसरे दिन साध्वी भारती ने कहा कि हर युग में ईश्वरीय सत्ता धरा पर धर्म की स्थापना करने के लिए अवतरित होती है। स्वामी विवेकानंद जी कहते हैं धर्म से भाग है ईश्वर का साक्षात्कार करना। धर्म ईश्वर दर्शन से प्रारंभ होकर ईश्वर प्राप्ति का मार्ग है। गोस्वामी तुलसीदास जी रामचरितमानस में कहते हैं कि जब तक ईश्वर को जान नहीं लेते तब तक विश्वास अधूरा है। ईश्वर पर विश्वास के बिना प्रेम नहीं किया जा सकता है। बिना प्रेम के भक्ति में दृढ़ता प्राप्त नहीं हो सकती है और बिना भक्ति के इंसान कर्म बंधनों से मुक्त नहीं हो सकता है। अत: भक्ति मार्ग का प्रथम चरण है ईश्वर को जानना। वहीं कथा के दौरान श्रद्धालु पूरी तरह से भक्ति में लीन नजर आए।

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