संवाद सहयोगी, रियासी : श्री दुर्गा नाटक मंडली द्वारा प्रथम नवरात्र को स्थानीय ओपन एयर थिएटर में रामलीला का 130वा आगाज किया गया। इस मौके पर मंडली के प्रधान संजीव खजुरिया और विशेष अतिथि पार्षद अमित शर्मा की उपस्थिति में बतौर मुख्य अतिथि नगर परिषद प्रधान सुदेश पुरी ने दीप प्रज्ज्वलित कर रामलीला का उद्घाटन किया। प्रथम दिन दो झाकियों की प्रस्तुति की गई। मंच के पीछे से शास्त्री सूरज कौशल ने रामायण के श्लोक सुना कर इन झाकियों का वर्णन किया।

सबसे पहले भगवान श्री गणेश जी की वंदना में भगवान गणेश जी और रामायण के रचयिता महíष बाल्मीकि की झाकी दिखाई गई। दूसरी झाकी सशक्त प्रसंग कैलाश तलहटी की प्रस्तुत की गई, जिसमें दर्शाया गया कि अभिमान और बल के घमंड में चूर रावण कैलाश पर्वत को उठाने का प्रयास करता है तो उसके दोनों हाथ पर्वत की तलहटी के नीचे दब जाते हैं। जिस पर वह भगवान श्री शकर से क्षमा याचना करते हुए उनकी स्तुति करता है। आखिर में भगवान शकर ना केवल उसे क्षमा कर देते हैं बल्कि उसे चंद्रहास नामक तलवार भी उपहार में भेंट करते हैं। ऐसा करते समय भगवान शिव के किरदार में राजेश केसर ने जब संवाद बोले तो पूरा पंडाल पंडाल तालियों से गूंज उठा। यह प्रसंग भले ही मुख्य तौर पर झाकी के रूप में दिखाया गया, लेकिन इसमें रावण के किरदार में अरुण वर्मा के माथे के बल और तरेरती सुर्ख आखें उनका अभिनय बयान कर गई। स्वास्तिक ने नंदी और ऋषभ ने मारीच का किरदार निभाया। रामलीला देखने आए दर्शकों ने पंडाल में स्थापित मा ज्वाला जी की ज्योति के भी दर्शन किए।

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