जागरण संवाददाता, ऊधमपुर : ऊधमपुर में अगले तीन दिनों तक पानी का संकट रहेगा। पहले ही पानी की समस्या से जूझ रहे शहर में पीएचई के अस्थायी कर्मचारियों की 72 घंटे की हड़ताल लोगों के साथ विभाग की परेशानियों में इजाफा करेगी। हालांकि विभाग अपने नियमित स्टाफ से जलापूर्ति बहाल रखने की योजना बना चुका है, मगर शहरी इलाके में 50 फीसद और ग्रामीण इलाकों में 25 फीसद तक जलापूर्ति प्रभावित रहने की आशंका है।

ऊधमपुर में शुक्रवार को आयोजित प्रेसवार्ता में पीएचई वाटर वर्कर्स एसोसिएशन के वरिष्ठ नेता सोमनाथ ने शुक्रवार रात 8 बजे से 72 घंटे की कामछोड़ हड़ताल का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि अस्थायी कर्मचारियों की समस्या को लेकर केंद्रशासित प्रदेश प्रशासन गंभीर नहीं है। अस्थायी कर्मचारियों का 56 से 60 माह का वेतन बकाया है, जिसे लेकर विभाग के उच्चाधिकारियों से लेकर उपराज्यपाल व अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को अनेक बार अवगत कराया जा चुका है। इसके बावजूद आज तक अस्थायी कर्मचारियों को वेतन देने और उनकी लंबित मांगों को पूरा करने के लिए कुछ नहीं किया गया है। सरकार और विभाग के ऐसे रवैये के कारण एसोसिएशन ने शुक्रवार रात आठ बजे से अगले 72 घंटे तक कामछोड़ हड़ताल का ऐलान किया है। इस 72 घंटे की हड़ताल के कारण जलापूर्ति प्रभावित होगी।

सोमनाथ ने कहा कि पिछले 20-25 वर्षो से विभाग में काम कर रहे अस्थायी कर्मचारियों को नियमित करने के लिए कुछ नहीं किया गया है। इसलिए जलशक्ति विभाग में अर्से से कार्यरत इन अस्थायी कर्मचारियों को प्राथमिकता के आधार पर नियमित करने की नीति तैयार की जाए, जिससे उनका भविष्य सुरक्षित हो सके। इसके साथ ही पिछले 56 से 60 महीने से वेतन के बिना काम कर रहे अस्थायी कर्मचारी व उनके परिवार भुखमरी के कगार पर हैं। उधार लेकर वर्षो से गुजारा कर रहे इन लोगों को अब तो दुकानदारों, रिश्तेदारों और पहचान वाले लोगों ने भी उधार देना बंद कर दिया है।

उन्होंने लोगों के साथ प्रांत के पीएचई कर्मचारियों से उनकी कामछोड़ हड़ताल का समर्थन करने की अपील की। इस अवसर पर विजय शर्मा, दिनेश केसर, कुलभूषण भट्ट, संजय कुमार, अमित दूबे व मोहन लाल सहित अन्य मौजूद थे।

वहीं, अस्थायी कर्मचारियों की इस कामछोड़ हड़ताल की वजह से शहर में अगले तीन दिनों तक जल संकट से लोगों को जूझना पड़ेगा। हालांकि जलशक्ति विभाग नियमित कर्मचारियों की मदद से जलापूर्ति करने की तैयारी कर चुका है। विभाग के एक्सईएन ताज चौधरी ने कहा कि विभाग के पास करीब 350 स्थायी कर्मचारी हैं। इनकी मदद से जिले में जलापूर्ति बहाल रखी जाएगी। मगर नियमित आपूर्ति से कम सप्लाई लोगों को मिल सकती है। ज्यादा समस्या शहरी क्षेत्र में होगी। क्योंकि लिफ्ट परियोजनाओं की वजह से इनको संचालित कर जलापूर्ति करना होगा। ऐसे में शहरी इलाकों में लोगों को अगले तीन दिनों तक पहले से 50 फीसद तक कम आपूर्ति मिल सकती है। जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में ग्रैविटी वाली योजनाएं हैं। जिनको पंचायत प्रतिनिधियों की मदद से संचालित किया जाएगा। ऐसे में यहां पर 15 से 25 फीसद तक ही जलापूर्ति प्रभावित होगी। अस्थायी कर्मियों की प्रमुख मांगें

कर्मचारियों का बकाया वेतन जल्द जारी किया जाए

पुराने अस्थायी कर्मचारियों को नियमित किया जाए

विभाग में स्टाफ की कमी को दूर किया जाए

कर्मचारियों के काम के मुताबिक पदनाम दिया जाए

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