संवाद सहयोगी, किश्तवाड़ : 25 जुलाई से शुरू हुई मचैल यात्रा का आंकड़ा 90 हजार पार कर गया है। बड़ी संख्या में यात्री पैदल चलकर ही माता के दरबार पहुंच रहे हैं। कुछ यात्री हेलीकॉप्टर के जरिए भी अपनी यात्रा कर रहे हैं। यात्रा के दौरान सफाई एवं शौचालयों की व्यवस्था बेहद खराब है। यात्रियों की सुविधा के लिए किश्तवाड़ से लेकर मचैल तक दो दर्जन के करीब लंगर एवं भंडारे लगे हैं, जिनमें यात्री प्रसाद ग्रहण कर रहे हैं।

हालांकि पिछले दो दिन से रुक-रुक कर बारिश हो रही है, लेकिन यात्रियों का माता के दरबार पहुंचने के लिए उत्साह कम नहीं हो पा रहा है। यात्री हाथों में झंडे लिए एवं माता के जयकारे लगाते हुए माता के दरबार पहुंच रहे हैं। हालांकि माता के दरबार में यात्रियों के ठहरने की जो व्यवस्था है वह कम पड़ रही है। प्रशासन द्वारा जो दावे यात्रियों के बंदोबस्त के लिए किए गए थे वे खोखले नजर आ रहे हैं। सिवाय सुरक्षा व्यवस्था के पूरी यात्रा में प्रशासन द्वारा कोई खास बंदोबस्त नजर नहीं आ रहा है। हालांकि किश्तवाड़ जिला प्रशासन ने सफाई व्यवस्था के लिए साढ़े आठ लाख रुपये का ठेका दिया था, लेकिन पूरी यात्रा के रास्ते में व मचैल में कहीं भी कोई खास सफाई व्यवस्था नजर नहीं आ रही है।

यात्रियों के लिए शौचालयों आदि के भी कोई खास प्रबंध देखने को नहीं मिले। मचैल संस्था द्वारा बनाए गए शौचालयों से ही लोग काम चला रहे हैं। ग्रामीण विकास विभाग के लोग जो शौचालयों का दावा कर रहे थे वह पूरी यात्रा में खोखला साबित हुआ।

इस बारे में बीडीओ पाडर मनोज कुमार का कहना है कि सारे गांव में हमने शौचालय बनवाने का काम शुरू करवाया है, जो जल्द पूरा हो जाएगा।

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