संवाद सहयोगी, रियासी : रियासी में लोहड़ी के पर्व में फिर से नई उमंग भरने के लिए श्री दुर्गा नाटक मंडली ने शुक्रवार को अपनी सभी तैयारियां लगभग पूरी कर ली। अब मंडली के सदस्य लोहड़ी के दिन धमाल करने को बेताब है। मंडली के पूरे प्रयास हैं कि इस बार नई पीढ़ी को हिरन नाच की परंपरा से भी रूबरू कराया जा सके।

मंडली के प्रधान संजीव खजूरिया ने बताया की लोहड़ी पर्व को धूमधाम और उत्साह से मनाने के लिए लगभग दो दशक पहले रियासी की विशेष पहचान थी लेकिन समय के साथ-साथ इस पर्व के रंग फीके पढ़ने लगे। पहले तो रियासी कस्बे में छोटे और बड़ों की दर्जनों टोलियां छज्जे बनाकर लोगों के घरों में ढोल की थाप पर नाचते थे और लोहड़ी मांगते थे और शाम को हिरन नाच होते थे, लेकिन व्यस्तता और रुचि कम होने से छज्जे बनाने और हिरन नाच की परंपरा लगभग लुप्त सी हो गई। इसे फिर से जीवित करने के लिए श्री दुर्गा नाटक मंडली द्वारा पिछले वर्ष पारंपरिक छज्जा बनाकर रियासी में लोगों के घरों में लोहड़ी मांगी गई थी। नई पीढ़ी मे कई ने उन्हें बताया था कि उन्होंने हिरण नाच के बारे में सुना है लेकिन कभी उसे देखा नहीं खजूरिया ने बताया कि हिरण नाच को इस बार लोहड़ी पर्व पर रियासी में दिखाने के लिए भरसक प्रयास जारी हैं। इस बारे में विभिन्न जगह कि कुछ मंडलियों से बातचीत चल रही है अगर सब ठीक रहा तो लोहड़ी पर्व पर हिरण नाच भी होगा और मंडली के सदस्य ढोल की थाप पर लोगों के घरों में धमाल मचाकर कर लोहड़ी मांगेगी उन्होंने कहा कि मंडली का उद्देश्य इस पर्व मे फिर से पहले की तरह रंग भरना है। ताकि यह सब देख कर नई पीढ़ी भी पारंपरिक तरीके से लोहड़ी पर्व की परंपरा को बनाए रखें। उन्होंने बताया कि लोहड़ी के दिन सुबह 10 बजे मंडली के सदस्य कस्बे के मुख्य बाजार में स्थित भगवान श्री गणेश जी के मंदिर मे प्रसाद चढ़ा कर और माथा टेककर लोहड़ी मांगने की शुरुआत करेंगे।

Posted By: Jagran