ऊधमपुर, जागरण संवाददाता: शहर में हुए सिलसिलेवार दो आइइडी धमाकों से लग रहा है कि छह माह पहले ऊधमपुर के सलाथिया चौक में हुए आइइडी विस्फोट और कटड़ा के कड़माल में बस में विस्फोट ट्रायल थे। सलाथिया चौक और कड़माल में हुए विस्फोट दोनों में काफी कुछ मिलता जुलता है।

बता दें कि छह माह पूर्व नौ मार्च को ऊधमपुर के व्यस्त सलाथिया चौक पर विस्फोट हुआ था। यह भी एक ब्लाइंड आइईडी ब्लास्ट था, जिसमें आइईडी का ही प्रयोग किया गया था, मगर यह लो इंस्टेसिटी वाला था। इसके बावजूद इस विस्फोट में एक की मौत और एक दूधमूंहे बच्चे सहित 13 लोग घायल हो गए थे। कई लोगों के तो कान के पर्दे फट गए थे और उनकी सुनने की क्षमता चली गई थी। बाद में पुलिस जांच में इस विस्फोट में भी स्टिकी बम का प्रयोग होने की जानकारी सामने आई।

सलाथिया चौक में विस्फोट के करीब दो माह के बाद 13 मई को कटड़ा के कड़माल इलाके में विस्फोट हुआ। उसके बाद बस में आग लग गई। इसमें कई लोगों की मौत हो गई और कई घायल हो गए थे। बाद में आतंकी संगठन जम्मू कश्मीर फ्रीडम फाइटर्स (जेकेएफएफ) ने कटड़ा और ऊधमपुर विस्फोट की जिम्मेदारी ली।

हालांकि इसके एक माह के बाद पुलिस ने जून माह में ऊधमपुर विस्फोट को अंजाम देने वाले आतंकी को दबोच लिया। ऊधमपुर और कटड़ा में हुए विस्फोट के बाद बुधवार रात और वीरवार सुबह हुए दो विस्फोटों से लग रहा है कि पूर्व में सलाथिया चौक और कड़माल में हुए हादसे ट्रायल के दौर पर ही थे।

सलाथिया चौक में हुए विस्फोट के ट्रायल होने की आशंका दैनिक जागरण पहले ही जता दिया था। अब दो बसों में डबल ब्लास्ट की घटना से लग रहा है कि आतंकियों ने इस बार बड़ी घटना को अंजाम देने की योजना बनाई थी। जिसके लिए पहले मारका जांची गई और फिर उसका कटड़ा क्षेत्र की बस में प्रयोग किया गया। शायद इस बार टाइमर सेट करने में हुई गलती की वजह से आतंकी बड़ी घटना को अंजाम देने से चूक गए।

ऊधमपुर की घटना न केवल ऊधमपुर में पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों बल्कि पूरे जम्मू कश्मीर में सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय है। इसलिए इन घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए ठोस कदम उठाने की जरूरत है। जिससे की आतंकी बसों और यात्री वाहनों में ऐसी और घटनाओं को अंजाम न दे सकें।

ऊधमपुर से कटड़ा के लिए रोज चलती हैं 30 बसें

राज्य और देश के लोगों की आस्था का केंद्र मां वैष्णो देवी के आधार शिविर कटड़ा के लिए ऊधमपुर बस स्टैंड से रोज 30 बसें चलती हैं। इस समय शारदीय नवरात्र जारी है ऐसे में कटड़ा जाने वाली बसों में भी खासी भीड़ रहती है।

बस स्टैंड यूनियन के अध्यक्ष रामदेव सिंह के मुताबिक ऊधमपुर से रोजाना तीस बसें चलती है। हर 25 से 30 मिनट एक बस कटड़ा रवाना होती है। कटड़ा जाने वाले सभी बसें फुल होती हैं। इस हिसाब से प्रतिदिन डेढ़ हजार के करीब लोग कटड़ा जाने वाली बसों में सफल करते हैं। जिसमें से दो सौ से तीन सौ लोग ऐसे होते हैं जो ट्रेन से ऊधमपुर आते हैं। पत्नीटाप और श्रीनगर घुमने के बाद ऊधमपुर पहुंच कर मां वैष्णो के दर्शन के लिए जाते हैं।

ऐसे में यदि कटड़ा जाने वाले किसी बस में भी आतंकी स्टिकी बम प्लांट करते तो भी बड़ा हादसा होता। ऊधमपुर के सलाथिया चौक विस्फोट के बाद कटड़ा में श्रद्धालुओं से भरी बस में आतंकी स्टिकी बम का विस्फोट कर चुके हैं। इस विस्फोट के बाद बस में लगी आग से कई श्रद्धालुओं की जान चली गई थी और कई घायल हो गए थे।

सीटों के ऊपर सामान रखने वाली जगह पर रखे गए थे बम

ऊधमपुर, जागरण संवाददाता: शहर में बुधवार रात और वीरवार तड़के दो बसों में सिलसिलेवार धमाकों में काफी समानताएं है। दोनों ही बसों में विस्फोटक यात्रियों के बैठने वाली सीटों के ऊपर बनी सामान रखने वाले जगह में रखे गए बताए जाते हैं। दोनों बसों को जिस तरह से क्षति पहुंची है वह भी इस बात की पुष्टी करती है।

पेट्रोल पंप पर खड़ी जिस बस मे धमका हुआ, उसमें विस्फोटक अगले दरवाजे के बाद सीटों के ऊपर बनी सामान रखने की जगह पर रखा गया होने की बात कही जा रही है। जबकि बस स्टैंड पर जिस बस में विस्फोट हुआ उसमें भी विस्फोटक सीट के ऊपर सामान रखने वाली जगह पर रखा गया था। दोनों ही बसों में विस्फोटक दरवाजों के पास रखे गए थे। यह भी मेगनेटिक व टाइमर युक्त स्टिकी बम की संभावना को प्रबल बनाता है। क्योंकि स्टिकी यानी चिपकने वाले बम में शक्तिशाली चुंबक होता है। जो कहीं पर भी आसानी से मगर मजबूती से चिपक जाता है।

हालांकि पहले सीटों के नीचे विस्फोटक लगाने की बात कही जा रही थी, मगर सीटों की दशा और निचले हिस्से को देख कर माना जा रहा है कि बम उपरी हिस्से में था और अंदर की तरफ था। क्योंकि दोनों ही बसों में विस्फोट का प्रभाव छत पर अंदर की तरफ से पड़ा है। जबकि सीटों भी उपरी तरफ से क्षतिग्रस्त हुई हैं। इसके साथ ही दोनों बसों में सामान रखने वाली जगह जहां पर बनी होती है वहां से बसे क्षतिग्रस्त है और वहां लगे एंगल व लोहा बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हुआ है।

रामनगर रूट की बसें क्यों चुनी, कहां प्लांट हुआ था बम

दोनों ही बम रामनगर रूट की बसों में लगे होने का कारण जानने का सुरक्षा एजेंसियां प्रयास कर रही हैं। एक बस रामनगर से बसंतगढ़ भी जाती है। जिला के बसंतगढ़ इलाका आतंकवाद में खासा सक्रिय रहा है। बसंतगढ़ में आतंकियों ने सामूहिक नरसंहार को भी अंजाम दिया था। कठुआ से होकर बसंतगढ़ होते हुए डोडा किश्तवाड़, भद्रवाह के रास्ते घाटी जाने का आतंकियों का यह पुराना रूट भी रहा है। यह भी हो सकता है कि विस्फोटक पाक सीमा से सटे कठुआ जिला के रास्ते बसंतगढ़ और वहां से रामनगर आए हो। यह भी हो सकता है कि दोनों बसों में बसंतगढ़ या रामनगर में ही स्टिकी बम प्लांट किए गए हो।

रामनगर रूट के दोनों बसों के होने की वजह से सुरक्षा एजेंसियां इस पहलु से भी जांच कर रही है। रामनगर रूट की ही बसों को चुनने का कारण और इसमें बम कहां पर प्लांट किए गए पुलिस व सुरक्षा एजेंसियां इसकी जांच कर रही है। बस स्टैंड के एक सीसीटीवी का डीवीआर पुलिस ने कब्जे में लिया पेट्रोल पंप के सीसीटीवी के बाद पुलिस बस स्टैंड पर भी लगे एक सीसीटीवी के डीवीआर को अपने कब्जे में ले लिया।

हालांकि यह सीसीटीवी घटना स्थल से करीब 150 मीटर की दूरी पर लगा है। संभव है कि यह विस्फोट से जुड़ा कोई अहम सुराग जांच एजेंसियों को उपलब्ध कराने में सहायक हो। वहीं घटना स्थल के पास ही प्रेम होटल है, मगर उसके अंदर सीसीटीवी कैमरे लगे होने की जानकारी दी जा रही है।

विस्फोट की इस घटना के बाद बस स्टैंड और शहर में सीसीटीवी कैमरों की कमी पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को खली है। वहीं बस स्टैंड सहित शहर में प्रमुख स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने की मांग फिर से उठने लगी है।

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