संवाद सहयोगी, रियासी : जम्मू संभाग के रियासी जिले की ठाकरा कोट तहसील की बंधार पंचायत के खैरल कोट गाव में धार्मिक आयोजन में दूषित खाना-खाने के बाद करीब 50 ग्रामीणों की तबीयत बिगड़ गई। इनमें 30 मरीजों को जिला अस्पताल रियासी में भर्ती कराया गया है। जबकि 20 मरीजों का गांव में ही डॉक्टरों की देखरेख में उपचार चल रहा है। इसके अलावा कुछ और लोग भी बीमार हुए हैं जो अस्पताल नहीं पहुंच पाए हैं। इनमें महिलाएं व बच्चे भी शामिल हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने रियासी, कटड़ा, पौनी और अरनास पीएचई से एंबुलेंस तथा डॉक्टरों की टीमों को खैरल कोट गांव भेज दिया है। मौके पर पहुंची डॉक्टरों की टीमें घर-घर जाकर बीमार लोगों के स्वास्थ्य की जांच कर रही हैं।

जानकारी के अनुसार बंधार पंचायत के खैरल कोट गाव में बुधवार को स्थानीय निवासी एक व्यक्ति ने अपने घर मे यज्ञ भंडारे का आयोजन किया था। इसमें बिरादरी के अलावा अन्य ग्रामीण भी आमंत्रित थे। उन्होंने भंडारे मे चावल, दाल, खीर आदि खाई थी। खाने के कुछ समय बाद ही कुछ लोगों की तबीयत बिगड़ने लगी। कई लोगों को उल्टी दस्त तो कई लोगों का सिर चकराने के साथ ही मन खराब होने लगा। इनमें से कुछ लोग उपचार के लिए स्थानीय प्राइमरी हेल्थ सेंटर पहुंचे। कुछ मरीज घरेलू नुक्से अजमाने लगे। लेकिन अधिकतर मरीज तबीयत खुद ही ठीक होने की उम्मीद में घरों में ही पड़े रहे। इससे उनकी तबीयत बिगड़ती चली गई। भंडारे का दूषित खाना खाने के तीसरे दिन शुक्रवार को मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ तो स्थानीय सरपंच ने इसकी जानकारी जिला प्रशासन रियासी और चीफ मेडिकल ऑफिसर डॉ. पीएस ठाकुर को दी। उसके बाद रियासी से डॉक्टरों की दो टीमें दो एंबुलेंस लेकर मौके की तरफ रवाना हो गई। इसी बीच कटड़ा, पौनी व अरनास से भी एंबुलेंस के साथ मेडिकल की एक-एक टीम मौके पर पहुंच गई। टीमों में शामिल डॉक्टरो ने स्थानीय प्राइमरी हेल्थ सेंटर के अलावा गाव में जगह-जगह कैंप लगाकर मरीजों का उपचार शुरू कर दिया। इस दौरान 50 मरीज सामने आए, इनमें 30 मरीजों को जिला अस्पताल रियासी रेफर कर दिया गया। जबकि 20 मरीजों का उपचार डॉक्टरों की देखरेख में गांव में ही चल रहा है।

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घर-घर जाकर जांच कर रही डॉक्टरों की टीमें

भंडारे में दूषित खाना खाने से बीमार होने वाले ऐसे कई लोग हैं, जो न तो प्राइमरी हेल्थ सेंटर में और न ही गांव में लगे चिकित्सा कैंप में पहुंचे हैं। ऐसे में डॉक्टरों की टीमें घर, घर जाकर लोगों की जांच कर रही हैं। जाच पूरी होने के बाद ही मरीजों की सही संख्या सामने आएगी। स्थानीय नायब सरपंच बशीर अहमद के अनुसार भंडारे में करीब ढाई सौ लोगों ने खाना खाया था। इनमें कुछ ऐसे लोग भी शामिल होंगे, जिन्होंने भंडारे में वह दूषित चीज नहीं खाई होगी। जिसकी वजह से लोग बीमार पड़े। एक सप्ताह तक घोल कर रखा जाता है कोदरा का आटा

स्थानीय लोगों के अनुसार खैरल कोट गाव में आयोजित धार्मिक आयोजन को बसंत यज्ञ कहा जाता है। इसमें दाल चावल और खीर के अलावा प्रसाद के रूप में खीरनुमा एक विशेष व्यंजन बगनी बनाई गई थी। बगनी व्यंजन को कोदरा के आटे और पानी से बनाया जाता है, जो करीब एक सप्ताह का बासी होता है। ग्रामीणों के अनुसार बाजरे जैसा कोदरा के आटे को पानी में उबालकर इसे एक सप्ताह तक रखा जाता है, जिसे बीच-बीच में हिलाना पड़ता है। एक सप्ताह रखने के बाद इसमें मिठास और स्वाद आने के साथ ही यह खाने के लिए तैयार हो जाता है। भंडारे में दूषित खान पान के मामले में अधिकतर लोगों के शक की सुई बगनी पर ही ठहर रही है। जबकि शनिवार को फूड सेफ्टी की टीम के मौके पर पहुंचकर जाच करने के बाद ही सच्चाई सामने आएगी। मरीजों का पता लगाने में जुटी हैं टीमें : बीएमओ पौनी

खैरल कोट गाव में पहुंचे पौनी के बीएमओ डॉ. कंबल ने बताया कि गाव में दूर-दूर घर हैं। जहा चिकित्सकों की टीमे पैदल सफर कर मरीजों का पता लगाने में जुटी हैं। फिलहाल 50 मरीज सामने आए हैं। इनमें 20 मरीजों का उपचार गाव में ही चल रहा है। जबकि 30 मरीजों को जिला अस्पताल रियासी रेफर कर दिया गया है। उन्होंने सभी मरीजों की हालत स्थिर बताई है।

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अलग-अलग जगहों से चिकित्सकों की टीमें जरूरी दवाइयों के साथ मौके पर भेजी गई हैं। उपजिला अस्पताल कटड़ा से एक फिजिशियन स्पेशलिस्ट भी मौके पर मौजूद हैं। रियासी से चिकित्सकों की एक और टीम शनिवार सुबह प्रभावित गाव में पहुंच जाएगी। किस दूषित खाना से लोग बीमार पड़े। इसकी जाच के लिए शनिवार को फूड सेफ्टी की विशेष टीम भी मौके पर जाएगी।

डॉ. पीएस ठाकुर, चीफ मेडिकल ऑफिसर, जिला अस्पताल रियासी

Posted By: Jagran

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