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मां वैष्णो देवी के भक्तों के लिए अच्छी खबर! नवरात्रों में पहली बार होगी त्रिकूट पर्वत की 108 KM लंबी परिक्रमा; जानें पूरा रूट

Published: Mon, 05 Oct 2026 04:10 PM (IST)

आगामी 11 अक्टूबर से शारदीय नवरात्रों के दौरान मां वैष्णो देवी के त्रिकूट पर्वत की पहली बार परिक्रमा का आयोजन किया जा रहा है।

शारदीय नवरात्रों में पहली बार होगी मां वैष्णो देवी के त्रिकूट पर्वत की परिक्रमा।

शारदीय नवरात्रों में पहली बार होगी मां वैष्णो देवी के त्रिकूट पर्वत की परिक्रमा।

HighLights

  1. शारदीय नवरात्रों में 11 अक्टूबर से मां वैष्णो देवी त्रिकूट पर्वत की पहली परिक्रमा

  2. सनातन धर्म सभा कटड़ा-रियासी द्वारा 108 किमी लंबी यात्रा का आयोजन

  3. यह यात्रा धार्मिक पर्यटन और भामाग क्षेत्र के विकास को बढ़ावा देगी

राकेश शर्मा, कटड़ा। आगामी 11 अक्टूबर से शुरू हो रहे पवित्र शारदीय नवरात्रों को लेकर मां वैष्णो देवी के आधार शिविर कटड़ा से लेकर भवन तक धार्मिक आयोजनों की तैयारियां तेज हो गई हैं।

इसी कड़ी में सनातन धर्म सभा कटड़ा और सनातन धर्म सभा रियासी के संयुक्त प्रयास से इस बार पहली बार शारदीय नवरात्रों के दौरान मां वैष्णो देवी के पवित्र त्रिकूट पर्वत की परिक्रमा का विशेष धार्मिक आयोजन किया जा रहा है। नवरात्रों के दौरान आयोजित होने वाली इस यात्रा में साधु-संतों, स्थानीय लोगों, विभिन्न धार्मिक एवं सामाजिक संगठनों के सदस्यों के साथ श्रद्धालु भी शामिल होंगे।

देश में गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा की तर्ज पर त्रिकूट पर्वत की परिक्रमा को धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। स्थानीय लोग समय-समय पर त्रिकूट पर्वत की परिक्रमा करते रहे हैं, लेकिन नवरात्रों के दौरान इसे नियमित और व्यवस्थित धार्मिक आयोजन के रूप में पहली बार शुरू किया जा रहा है। आयोजकों का उद्देश्य श्रद्धालुओं को मां वैष्णो देवी के पवित्र धाम के साथ-साथ त्रिकूट पर्वत और इसके आसपास स्थित प्राचीन धार्मिक स्थलों की महत्ता से परिचित करवाना है।

सनातन धर्म सभा कटड़ा के अध्यक्ष रतन लाल शर्मा ने बताया कि मां वैष्णो देवी के त्रिकूट पर्वत की परिक्रमा लगभग 108 किलोमीटर लंबी है। इस मार्ग में करीब 90 किलोमीटर हिस्से में पक्की सड़क का निर्माण हो चुका है, जबकि शेष मार्ग कहीं कच्चा और कहीं पगडंडी के रूप में है।

शेष मार्ग को पक्का करने के लिए विधायक बलदेव राज शर्मा, सांसद जुगल किशोर शर्मा, प्रशासन और सरकार की ओर से प्रयास किए जा रहे हैं। कुछ हिस्सों की टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जबकि कुछ स्थानों पर काम भी जारी है। उम्मीद है कि अगले एक-दो वर्षों में परिक्रमा मार्ग पूरी तरह विकसित हो जाएगा।

हर दिन अलग धार्मिक स्थल पर पूजा-अर्चना

रतन लाल शर्मा ने बताया कि प्रथम नवरात्रि 11 अक्टूबर को मां वैष्णो देवी के चरणों में हाजिरी लगाकर इस धार्मिक यात्रा का शुभारंभ किया जाएगा। इसके बाद यात्रा कटड़ा क्षेत्र में स्थित प्रसिद्ध बाबा जित्तो मंदिर पहुंचेगी। यहां पूजा-अर्चना और कीर्तन का आयोजन होगा। बाबा जित्तो को क्रांतिकारी किसान और मां वैष्णो देवी के अनन्य भक्त के रूप में श्रद्धा से याद किया जाता है।

दूसरे दिन यात्रा रियासी-कटरा मार्ग पर स्थित नौ देवी मंदिर और बाबा धनसर में हाजिरी लगाते हुए रियासी नगर से होकर भामाग क्षेत्र की ओर रवाना होगी। वहां के चोराकोट में स्थित मां दुर्गा मंदिर में हवन-यज्ञ और कीर्तन किया जाएगा। चौथे नवरात्रि को डंगाकोट स्थित मां दुर्गा मंदिर में पूजा-अर्चना और कीर्तन होगा। पांचवें नवरात्रि को भामाग क्षेत्र के टोट इलाके में स्थित मां वैष्णो देवी मंदिर में धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।

सातवें नवरात्रि को सुखाल घाटी में मां वैष्णो देवी के प्राचीन देवस्थान पर हाजिरी लगाकर पूजा-अर्चना और कीर्तन होगा। आठवें नवरात्रि को परिक्रमा मार्ग में पड़ने वाले चड़ई-मुथल गांव में रामायणी बाबा आश्रम परिसर स्थित मां दुर्गा मंदिर में हवन-यज्ञ व पूजा-अर्चना होगी। नवरात्रों के अंतिम दिन यात्रा मॉ वैष्णो देवी के प्रथम पड़ाव प्रसिद्ध भूमिका मंदिर पहुंचेगी। यहां हाजिरी, हवन-यज्ञ और कीर्तन के साथ विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा।

धार्मिक पर्यटन के साथ भामाग क्षेत्र के विकास पर जोर

सनातन धर्म सभा के वरिष्ठ सदस्य अजय शर्मा ने कहा कि इस आयोजन का उद्देश्य केवल धार्मिक यात्रा तक सीमित नहीं है। इसके माध्यम से धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ भामाग क्षेत्र के विकास और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करना भी है। उन्होंने कहा कि परिक्रमा मार्ग में श्रद्धालुओं को घने हरे-भरे जंगल, प्राकृतिक वातावरण और झरनों के साथ क्षेत्र की प्राचीन धार्मिक विरासत को देखने का अवसर मिलेगा।

उन्होंने कहा कि भामाग क्षेत्र का मां वैष्णो देवी के धार्मिक इतिहास और वर्तमान व्यवस्था में भी विशेष महत्व है। मां के भोग में इस्तेमाल होने वाला दूध, दही और घी आदि बड़ी मात्रा में इसी क्षेत्र से पहुंचता है। स्थानीय पूर्व बारीदार परिवार आज भी शुद्ध सामग्री नियमित रूप से भवन तक पहुंचाते हैं।

आयोजकों के अनुसार दिल्ली से संत विज्ञानानंद महाराज भी अपने शिष्यों के साथ इस धार्मिक यात्रा में शामिल होंगे। यात्रा को सफल बनाने के लिए सेवा भारती, एकल अभियान, मां वैष्णो लोक सेवा कल्याण संस्था, सीनियर सिटीजन वेलफेयर फोरम कटड़ा , माधव गौ सेवा, विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल सहित विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संस्थाएं सहयोग कर रही हैं।