कौन हैं आगा सैयद रुहुल्ला? जिन्होंने उमर सरकार की पार्टी छोड़ी, सांसदी से भी दिया इस्तीफा
श्रीनगर लोकसभा सांसद आगा सैयद रुहुल्ला मेहदी ने नेशनल कॉन्फ्रेंस पार्टी और अपनी लोकसभा सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है।

सांसद आगा सैयद रुहुल्ला ने दिया इस्तीफा (फाइल फोटो)
HighLights
सांसद आगा सैयद रुहुल्ला ने नेशनल कॉन्फ्रेंस और लोकसभा सदस्यता छोड़ी
उमर अब्दुल्ला सरकार से संवैधानिक अधिकारों पर गहरे मतभेद थे
अनुच्छेद 370 की बहाली पर पार्टी के रुख से असहमति जताई
डिजिटल डेस्क, श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर सरकार को मंगलवार को बड़ा झटका लगा। श्रीनगर लोकसभा सीट से सांसद आगा सैयद रुहुल्ला मेहदी ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। इसके साथ ही उन्होंने लोकसभा सदस्यता छोड़ने का भी एलान किया है। बडगाम में अपने पिता आगा सैयद मेहदी की पुण्यतिथि पर आयोजित एक जनसभा में उन्होंने यह फैसला किया।
कौन हैं सांसद आगा सैयद रुहुल्ला?
आगा सैयद रुहुल्ला नेशनल कॉन्फ्रेंस पार्टी से श्रीनगर से सांसद थे। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में सैयद रुहुल्ला ने पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) के उम्मीदवार वहीद-उर-रहमान पारा को करीब 188000 वोटों से हराया था।
सैयद रुहुल्ला बडगाम विधानसभा सीट से तीन बार एमएलए भी रह चुके हैं। जम्मू-कश्मीर सरकार में वह विज्ञान और प्रौद्योगिकी व पशुपालक जैसी मंत्रीपद पर भी कार्यरत रहे हैं।
#WATCH | Budgam, J&K: Srinagar Lok Sabha MP Aga Syed Ruhullah Mehdi officially announces his resignation from his parliamentary seat and the Jammu & Kashmir National Conference (JKNC) party on his father's 26th death anniversary. A large crowd of supporters gather at Behesht-e-Zehra Park.
— ANI (@ANI) November 3, 2026
क्यों छोड़ी पार्टी?
सांसद आगा सैयद और उमर सरकार के बीच काफी समय से मतभेद चल रहे थे। ये मतभेद उस दौरान और ज्यादा बढ़ गए जब जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने अगस्त, 2026 में सैयद रुहुल्ला के रवैये को देखते हुए चुनौती दी थी कि वह संसद से इस्तीफा देकर फिर से चुनाव लड़ें पता चल जाएगा कि वोट कैसे मिलते हैं।
इसके जवाब में उन्होंने इस्तीफा देने का एलान किया। इस्तीफे के लिए उन्होंने तीन नवंबर का दिन चुना। इस दिन उनके पिता सैयद मेहदी की पुण्यतिथि है।
किन मुद्दों पर शुरू हुए मतभेद
सांसद आगा सैयद और उमर सरकार के बीच संवैधानिक अधिकारों की बहाली को लेकर मतभेद थे। नेशनल कॉन्फ्रेंस राज्य का दर्जा बहाली तक सीमित थी, जबकि आगा सैयद विशेष दर्जा की वापसी को लेकर अड़िग थे। सांसद का मानना था कि उमर अब्दुल्ला सरकार 2024 के विधानसभा चुनाव में जनता से अनुच्छेद 370 को लेकर किए गए वादों और विशेष दर्जे की मांग पर पीछे हट रहा है।