राज्य ब्यूरो, श्रीनगर : ईद के मुबारक मौके पर कश्मीर में अलगाववादी अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए नमाज ए ईद के विशुद्ध मजहबी खुतबे का सियासी इस्तेमाल करने से बाज नहीं आए।

मीरवाइज मौलवी उमर फारूक ने इस दौरान नमाजियों को संबोधित करते हुए कहा कि धारा 35ए से छेड़खानी पर नई दिल्ली को कश्मीर में गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे। कश्मीर मसले को बातचीत के जरिये हल करने की पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की पेशकश का समर्थन करते हुए उन्होंने कहा कि ¨हदोस्तान की सरकार को इस पर सकारात्मक रूख अपनाना चाहिए।

गौरतलब है कि कश्मीर में विभिन्न अलगाववादी संगठनों के साझा मंच ज्वाइंट रजिस्टेंस लीडरशिप (जेआरएल) ने सभी इमामों, खतीबों, मौलवियों, उलमाओं और मजहबी नेताओं से पिछले दिनों अपील की थी कि वह ईद उल जुहा के मुबारक मौके पर अपने खुतबे में लोगों को धारा 35ए के मुद्दे पर जागरूक कर इसके भंग होने पर किसी बड़े आंदोलन के लिए तैयार रहने और कश्मीर में आजादी की तहरीक को मजबूत बनाने के लिए प्रेरित करने के लिए कहा। जेआरएल का नेतृत्व कट्टरपंथी सैयद अली शाह गिलानी, उदारवादी हुíरयत नेता मीरवाइज मौलवी उमर फारूक और जेकेएलएफ चेयरमैन यासीन मलिक कर रहे हैं।

जेआरएल के आह्वान पर आज कश्मीर की सभी मस्जिदों, ईदगाहों में नमाज ए ईद के बाद खुतबे में मौलवियों और उलमाओं ने धारा 35ए के संरक्षण के लिए लोगों को हर संभव प्रयास करने के लिए प्रेरित किया।

खुद मीरवाईज मौलवी उमर फारूक ने कहा कि दुनिया में कोई भी ताकत स्टेट सब्जेक्ट के कानून से छेड़खानी नहीं कर सकती। नई दिल्ली को धारा 35ए के खिलाफ साजिशें बंद करते हुए इसे मजबूत बनाना चाहिए। अगर अदालत ने धारा 35ए पर जम्मू कश्मीर के लोगों की भावनाओं के खिलाफ कोई फैसला दिया तो पूरी रियासत में लोग सड़कों पर आ जाएंगे।

मीरवाइज ने इस मौके पर कश्मीर मुद्दे को बातचीत के जरिये हल करने पर जोर देते हुए कहा कि हम पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान का समर्थन करते हैं। सिर्फ हुíरयत ही नहीं पूरा कश्मीर अवाम चाहता है कि कश्मीर मसला बातचीत से हल हो। नई दिल्ली को चाहिए वह इमरान खान की पेशकश का सकारात्मक जवाब दे और कश्मीर को अपनी फौजी ताकत से अपने कब्जे में रखने के बजाय सभी पक्षों से सार्थक बातचीत से यह मसला हल करे।

जेकेएलएफ के चेयरमैन यासीन मलिक ने सौरा में जनाब साहब की जियारतगाह में नमाज ए ईद अदा की। इसके बाद उन्होंने वहां मौजूद लोगों को धारा 35ए के संरक्षण के लिए एकजुट होने को कहा। उन्होंने कहा कि कश्मीर की आजादी की तहरीक को ¨जदा रखने और कश्मीरी का अस्तित्व बनाए रखने के लिए धारा 35ए बहुत जरुरी है।

Posted By: Jagran