नेकां से इस्तीफे के बाद रुहुल्लाह के तीखे तेवर, BJP के खिलाफ संघर्ष जारी रखने का एलान; राम माधव को भी दिया जवाब
NC से इस्तीफा देने के बाद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी ने भाजपा और अपनी पूर्व पार्टी के नेतृत्व के खिलाफ ...और पढ़ें

नेकां से अलग होकर भी सियासी मैदान में सक्रिय रहेंगे रुहुल्लाह (फाइल।फोटो)
HighLights
रुहुल्लाह ने भाजपा और नेकां नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोला।
नेकां पर भाजपा के सामने समर्पण का आरोप लगाया।
भाजपा की जम्मू-कश्मीर नीतियों को चुनौती देने का संकल्प।
राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) से इस्तीफा देने के बाद सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी ने भाजपा और अपनी पूर्व पार्टी के नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि नेशनल कॉन्फ्रेंस ने भाजपा के सामने समर्पण कर दिया है और वह इस राजनीतिक स्थिति को सामान्य बनाने की कोशिशों का विरोध करते रहेंगे। उन्होंने साफ कहा कि भाजपा की नीतियों और जम्मू-कश्मीर के प्रति उसके रवैये को किसी भी सूरत में चुनौती देना बंद नहीं करेंगे।
रुहुल्लाह ने कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस के साथ उनका टकराव पार्टी के भाजपा के सामने झुकने को लेकर था। वह इस कथित समर्पण को सामान्य राजनीतिक घटनाक्रम के रूप में स्वीकार नहीं करेंगे। उन्होंने दोहराया कि भाजपा के कितने भी नेता मौजूदा व्यवस्था के बचाव में क्यों न उतर आएं, उनका विरोध जारी रहेगा।
राम माधव के बयान पर भड़के रुहुल्लाह
भाजपा नेता राम माधव के उस बयान पर भी रुहुल्लाह ने तीखी प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने कहा था कि तीन नवंबर को बडगाम में आयोजित रुहुल्लाह की रैली को भाजपा समर्थकों का आशीर्वाद प्राप्त था। इस पर सांसद ने कहा कि वह राम माधव को जानते तक नहीं हैं और उनका उनसे कोई संबंध नहीं है।
उन्होंने नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेतृत्व पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि राम माधव के बयान के बारे में उनसे ही पूछा जाना चाहिए। संभव है कि पार्टी नेताओं ने खुद उनसे बातचीत की हो और वे इस मामले में अधिक जानकारी रखते हों।
भाजपा की नीतियों को चुनौती देने का एलान
रुहुल्लाह ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के प्रति भाजपा की नीतियों, उसके आक्रामक रवैये और प्रदेश के साथ किए जा रहे व्यवहार का विरोध जारी रहेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि भाजपा नेताओं के हस्तक्षेप से भी वह अपना रुख नहीं बदलेंगे। उनके मुताबिक, प्रदेश की मौजूदा राजनीतिक स्थिति को सामान्य बताने की कोशिशों का लगातार विरोध किया जाएगा।
आपको बता दें कि रुहुल्लाह ने तीन नवंबर को बड़गाम में एक सार्वजनिक रैली के दौरान नेशनल कॉन्फ्रेंस और श्रीनगर लोकसभा सीट से इस्तीफे का ऐलान किया था। वह करीब 24 साल तक पार्टी से जुड़े रहे और 2024 के लोकसभा चुनाव में नेशनल कॉन्फ्रेंस के टिकट पर श्रीनगर से सांसद चुने गए थे।
उन्होंने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला समेत पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर चुनावी वादों से पीछे हटने का आरोप लगाया था। इनमें जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे की बहाली का मुद्दा भी शामिल है। दूसरी ओर, नेशनल कॉन्फ्रेंस ने इस्तीफे के बाद रुहुल्लाह की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि पार्टी के राजनीतिक मंच से लाभ लेने के बाद उन्होंने उसी के खिलाफ रुख अपना लिया।
अधिकारों-सम्मान के लिए व्यापक आंदोलन के संकेत
राम माधव ने तीन नवंबर को जम्मू दौरे के दौरान नेशनल कॉन्फ्रेंस को स्पष्ट रूप से विभाजित पार्टी बताया था, हालांकि उन्होंने पार्टी के आंतरिक मामलों में भाजपा की किसी भूमिका से इनकार किया था। इसके बाद से विवाद और गहरा गया है।
रुहुल्लाह ने अपने अगले राजनीतिक कदम को लेकर संकेत दिया है कि उनका ध्यान जम्मू-कश्मीर के लोगों के अधिकारों और सम्मान की बहाली के लिए एक व्यापक आंदोलन खड़ा करने पर रहेगा। इससे साफ है कि पार्टी से अलग होने के बाद भी वह प्रदेश की राजनीति में अपनी सक्रिय भूमिका जारी रखने की तैयारी में हैं।
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