राज्य ब्यूरो, श्रीनगर : पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी के सर्वदलीय श्रद्धांजलि समारोह में भारत माता की जय के नारे लगाने पर नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला का विरोध शुरू हो गया है। बुधवार हजरतबल दरगाह में ईद का नमाज अदा करने पहुंचे फारूक को वहां से निकाले जाने की मांग करते हुए लोगों ने आजादी समर्थक नारे लगाए। इसके बाद उन्हें जूते भी दिखाए, जिससे उन्हें शर्मसार होना पड़ा। दरगाह प्रबंधकों और फारूक के सुरक्षा दस्ते ने किसी तरह स्थिति को संभाला और उन्हें नमाज के बाद खुतबा सुने बिना जल्दबाजी में वहां से निकाल ले गए।

ईद-उल-जुहा के मुबारक मौक पर फारूक अपने सुरक्षा दस्ते के साथ नमाज ए ईद अदा करने के लिए हजरतबल दरगाह पहुंचे। हजरतबल दरगाह को नेशनल कांफ्रेंस का सियासी मंच भी कहा जाता है। दरगाह के संरक्षकों ने फारूक का स्वागत करते हुए जैसे ही उनकी दस्तारबंदी शुरू की, परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं ने नारेबाजी शुरू कर दी। कुछ ने तो कथित तौर हाथों में अपनी चप्पलें उठाते हुए फारूक की तरफ संकेत करना शुरू कर दिया। यह लोग दरगाह संरक्षकों से फारूक को परिसर से बाहर निकालने के लिए कहने लगे। इससे दरगाह में असमंजस और अराजकता की स्थिति पैदा हो गई। एक तरफ नारेबाजी बंद होती तो दूसरी तरफ से नारे लगने शुरू हो जाते। वहां मौजूद कुछ लोगों ने स्थिति पर काबू पाने के लिए मजहबी नारे भी लगाए, लेकिन जैसे ही वह शांत हुआ, आजादी के नारे गूंजने लगे।

फारूक के सुरक्षा दस्ते ने किसी तरह भीड़ को आगे बढ़ने से रोके रखा। परिसर में स्थिति तनावपूर्ण हो गई। हालात को देखते हुए दरगाह संरक्षकों ने नमाज ए ईद का समय कुछ पहले कर दिया और फारूक ने कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच नमाज अदा की। इसके बाद वह खुतबा सुने बगैर कड़ी सुरक्षा के बीच वहां से निकल गए। हालांकि ईद की नमाज के बाद खुतबा सुनना अनिवार्य माना जाता है और ईद के दिन खुतबा नमाज से पहले नहीं बल्कि बाद में होता है।

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